तमिलनाडु की राजनीतिक गहमागहमी: पलानीस्वामी ने अमित शाह से की दिल्ली में अहम बैठक, चुनावी रणभूमि में बढ़ा ताप
- byAman Prajapat
- 08 January, 2026
दिल्ली की ठंडी हवा में भी राजनीति का माहौल गर्म है — और सबसे आगे है तमिलनाडु।
पिछले दिनों AIADMK के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने केंद्रीय गृह एवं BJP के वरिष्ठ नेता अमित शाह से दिल्ली में भेंट की, और इस मुलाकात का राजनीतिक पारा काफी उँचा है।
बैठक औपचारिक से कहीं अधिक थी — ये मिलन उस समय हुआ है जब तमिलनाडु में अगले साल 2026 के विधानसभा चुनाव की रणनीति तेज-तर्रार रूप से ढल रही है।
AIADMK, जो लंबे समय से DMK-led गठबंधन के सामने विपक्ष में है, अब BJP-NDA सहयोगी के साथ तालमेल बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है।
🧠 क्या हुई बैठक में?
पलानीस्वामी ने अमित शाह से मुलाकात दिल्ली में की, जहाँ राजनीतिक मुद्दों की लंबी बातचीत हुई — खासकर तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति, बीजेपी-AIADMK गठबंधन की संभावनाएँ और आगामी चुनाव की रणनीति।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मुख्य बातें इस प्रकार थीं:
✔️ NDA गठबंधन के तहत सीट-बंटवारे की प्रारंभिक बातचीत।
बातचीत का मुख्य एजेंडा विधानसभा चुनाव के लिए सीट-शेयरिंग की संभावनाओं को परखना था। BJP को कहा जा रहा है कि वह कुछ विधानसभा सीटों पर अधिक प्रतिनिधित्व मांगे, जहाँ उसकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
✔️ गठबंधन में टूटे नेताओं का एकीकरण।
AIADMK और BJP दोनों ने संभावित सहयोगी रुझानों — जैसे कि TTV दिनाकरण और O Panneerselvam — को विपक्ष के वोट को टूटने से बचाने के लिए एक साथ लाने पर भी विचार किया।
✔️ राजनीतिक रणनीति और जीत का लक्ष्य।
पलानीस्वामी ने दिल्ली में यह भी स्पष्ट किया कि AIMDMK-BJP गठबंधन का लक्ष्य है DMK के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाना और 2026 चुनाव में बहुमत हासिल करना।
🗳️ क्या AIADMK और BJP साथ लड़ेंगे?
अभी तक कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है कि BJP और AIADMK सरकार तक साथ जाएंगे या नहीं, लेकिन सीट-बंटवारे की बात की शुरुआत हो चुकी है।
यह बैठक इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के बाद BJP अब दक्षिण में भी अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, और तमिलनाडु इसका एक बड़ा मंच है।
⚖️ स्टालिन का प्रतिवाद
बीच में DMK के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी अमित शाह की तमिलनाडु में सक्रिय राजनीति पर तीखा हमला किया है, यह कहते हुए कि केंद्र की राजनीति की वजह से राज्य में भाजपा-AIADMK गठबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्टालिन ने भाजपा की नीतियों को धर्म, भाषा और सांप्रदायिक विभाजन के माध्यम से वोटों को बांटने की कोशिश बताया है और कहा है कि DMK अधिक समावेशी नीति अपनाता है।

📈 राजनीतिक पटल पर बदलाव
तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा से दमदार और डीएमके-AIADMK की परंपरा पर आधारित रहा है। लेकिन इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं:
✔️ Anbumani Ramadoss का PMK का NDA में शामिल होना
✔️ AIADMK-BJP सीट-बंटवारे की प्रारंभिक बातचीत
✔️ संभावित साझेदारियों के बारे में चर्चा
इन सब वजहों से स्थिति अधिक जटिल हो रही है।
🧩 आम जनता का रिएक्शन और सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में आने वाला चुनाव सिर्फ दो बड़े दलों के बीच संघर्ष नहीं होगा; इसमें भाजपा की राष्ट्रीय भूमिका, स्थानीय दलों की पहचान, और मतदाताओं के असली मुद्दे — जैसे रोजगार, भाषा-संस्कृति संरक्षण और आर्थिक विकास — बड़े रोल में होंगे।
कुछ लोग इसे तमिलनाडु में DMK के शासन की चुनौती मान रहे हैं, तो कुछ इसे BJP-AIADMK गठबंधन की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
🔚 निष्कर्ष
कहना कोई ज़्यादा रोमांटिक नहीं है — राजनीति वही पुरानी खेल है जहाँ साझेदारी, गठबंधन, और सत्ता की भूख सब कुछ हावी होता है।
पलानीस्वामी और अमित शाह की दिल्ली बैठक सिर्फ खबर नहीं है — यह तमिलनाडु की 2026 की राजनीति का एक बड़ा मोड़ हो सकती है।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
जीणमाता मंदिर के पट...
Related Post
Hot Categories
Recent News
Daily Newsletter
Get all the top stories from Blogs to keep track.





_1768405680.png)


_1768320639.png)
