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घर, सोसायटी और दफ्तरों में बारिश का पानी बचाने की अपील, ‘कैच द रेन’ अभियान से भूजल रिचार्ज पर जोर

 घर, सोसायटी और दफ्तरों में बारिश का पानी बचाने की अपील, ‘कैच द रेन’ अभियान से भूजल रिचार्ज पर जोर

घर, सोसायटी और दफ्तरों में बारिश का पानी बचाने की अपील, ‘कैच द रेन’ अभियान से भूजल रिचार्ज पर जोर

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। देश में जल संरक्षण और भूजल स्तर को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बार फिर वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत घरों, आवासीय सोसायटियों, कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में बारिश का पानी इकट्ठा करने तथा उपयुक्त स्थानों पर भूजल रिचार्ज की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है। इस अभियान का उद्देश्य बारिश के दौरान बहकर निकल जाने वाले पानी को उपयोगी बनाना और भविष्य के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।

जल संरक्षण से जुड़ी यह जानकारी 26 अक्टूबर 2026 को प्रेस सूचना ब्यूरो की ओर से प्रकाशित की गई। इसमें वर्षा जल संचयन के साथ पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन, तालाबों से गाद हटाने, रिचार्ज पिट बनाने और अनुपयोगी बोरवेल को उपयुक्त परिस्थितियों में भूजल रिचार्ज के लिए उपयोगी बनाने जैसे उपायों पर भी ध्यान दिलाया गया है।

बारिश की हर बूंद को उपयोगी बनाने पर जोर

भारत के अनेक क्षेत्रों में बारिश कुछ महीनों के दौरान होती है, जबकि पानी की मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। ऐसे में वर्षा जल संचयन पानी की उपलब्धता और प्रबंधन को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। घरों की छतों, स्कूलों, अस्पतालों, कार्यालयों और आवासीय परिसरों से बारिश का काफी पानी नालियों के रास्ते बाहर चला जाता है। यदि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उचित व्यवस्था बनाई जाए, तो इस पानी का एक हिस्सा संग्रहित किया जा सकता है या सुरक्षित तरीके से जमीन में पहुंचाया जा सकता है।

‘कैच द रेन’ अभियान का मूल संदेश है कि बारिश जहां और जब हो, वहां उपलब्ध पानी को बचाने की कोशिश की जाए। इसके लिए सिर्फ सरकारी विभागों की भूमिका पर्याप्त नहीं है। स्थानीय निकायों, ग्राम पंचायतों, आवासीय समितियों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।

घरों में कैसे काम आती है वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था?

घर की छत पर गिरने वाले पानी को पाइपों के माध्यम से एक निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। इसके बाद जरूरत और उपलब्ध जगह के अनुसार पानी को टैंक में संग्रहित किया जा सकता है या उपयुक्त फिल्टर के जरिए रिचार्ज पिट तक पहुंचाया जा सकता है।

वर्षा जल संचयन की सामान्य व्यवस्था में छत से पानी इकट्ठा करने वाली नालियां, पानी ले जाने वाले पाइप, शुरुआती गंदे पानी को अलग करने की व्यवस्था, फिल्टर और संग्रहण टैंक या भूजल रिचार्ज संरचना शामिल हो सकती हैं।

इस व्यवस्था का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि छत का क्षेत्रफल कितना है, वहां कितनी बारिश होती है, पानी की गुणवत्ता कैसी है और परिसर में पानी रखने या जमीन में पहुंचाने के लिए कितनी जगह उपलब्ध है।

यदि घर में बारिश का पानी टैंक में जमा किया जाता है, तो उसके उपयोग के उद्देश्य के अनुसार उचित सफाई और गुणवत्ता जांच जरूरी हो सकती है। बिना पर्याप्त उपचार और जांच के इस पानी को पीने योग्य नहीं मानना चाहिए।

सोसायटियों और अपार्टमेंट में क्यों जरूरी है सामूहिक प्रयास?

बड़ी आवासीय सोसायटियों में छतों, पार्किंग क्षेत्रों और अन्य खुले हिस्सों से बारिश का पर्याप्त पानी बह सकता है। ऐसे परिसरों में एक व्यवस्थित जल संचयन योजना तैयार करने से पानी के बहाव को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है।

आवासीय समितियां अपनी इमारतों की छतों से पानी इकट्ठा करने, वर्षा जल निकासी व्यवस्था की सफाई कराने और विशेषज्ञों की मदद से रिचार्ज संरचनाओं की उपयुक्तता जांचने जैसे कदम उठा सकती हैं।

हालांकि, हर जगह एक ही प्रकार की व्यवस्था प्रभावी नहीं होती। जिन क्षेत्रों में मिट्टी की जल सोखने की क्षमता कम है, भूजल पहले से बहुत गहरा है या भूजल प्रदूषण की आशंका है, वहां तकनीकी जांच के बाद ही रिचार्ज संरचना का चयन किया जाना चाहिए।

सोसायटियों में नियमित रखरखाव भी महत्वपूर्ण है। फिल्टर में गंदगी जमा होने, पाइप बंद होने या टैंक की सफाई न होने पर पूरी व्यवस्था की उपयोगिता घट सकती है।

दफ्तरों, स्कूलों और सरकारी भवनों में भी बढ़ सकती है उपयोगिता

कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सरकारी भवनों में अक्सर बड़ी छतें होती हैं। इसलिए इन परिसरों में वर्षा जल संचयन की योजना तैयार करने की पर्याप्त संभावना रहती है।

संस्थाएं भवन की छत से आने वाले पानी की मात्रा का अनुमान लगाकर संग्रहण टैंक या उपयुक्त भूजल रिचार्ज प्रणाली विकसित कर सकती हैं। साथ ही, जल संरक्षण को लेकर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं, ताकि कर्मचारी, विद्यार्थी और आसपास के लोग भी पानी बचाने की आदत अपनाएं।

सिर्फ ढांचा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि व्यवस्था काम कर रही है या नहीं, बारिश के दौरान कितना पानी इकट्ठा हुआ और रखरखाव की जिम्मेदारी किसके पास है।

सरकार ने बताए जल संरक्षण के प्रमुख उपाय

26 अक्टूबर को जारी सरकारी जानकारी में ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण उपायों का उल्लेख किया गया है। इनमें घरों, सोसायटियों और कार्यस्थलों पर वर्षा जल संचयन अपनाना, उपयुक्त स्थानों पर रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट बनाना तथा पुराने जल स्रोतों को फिर से उपयोगी बनाना शामिल है।

इसके अलावा, पारंपरिक बावड़ियों और कुओं के पुनर्जीवन, तालाबों और जलाशयों से गाद हटाने तथा जल संरक्षण वाले क्षेत्रों में वृक्षारोपण को भी प्रोत्साहित किया गया है।

इन उपायों का उद्देश्य बारिश के पानी को ज्यादा समय तक उपयोगी बनाए रखना, स्थानीय जल संसाधनों को मजबूत करना और जल संरक्षण के कामों में समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है।

जल संचय जनभागीदारी पहल के आंकड़े क्या बताते हैं?

सरकारी जानकारी के मुताबिक, ‘जल संचय जनभागीदारी’ पहल के अंतर्गत देश में 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाएं बनाए जाने की सूचना दी गई है।

इस पहल के पहले चरण के प्रभाव का आकलन करने वाले अध्ययन में लगभग 23 लाख संरचनाओं का मूल्यांकन किया गया। अध्ययन में 1 जून से 31 दिसंबर 2025 के बीच के वर्षा आंकड़ों के आधार पर इन हस्तक्षेपों से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भूजल रिचार्ज होने का अनुमान लगाया गया।

यह आंकड़ा सरकारी अध्ययन के अनुमान पर आधारित है। इसे देश की प्रत्येक संरचना के अलग-अलग सत्यापित परिणाम या हर राज्य में समान उपलब्धि के रूप में नहीं समझना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश, भूगर्भीय परिस्थितियों और संरचनाओं की कार्यक्षमता के कारण परिणाम अलग हो सकते हैं।

राजस्थान जैसे राज्यों के लिए क्यों अहम है यह अभियान?

राजस्थान के कई इलाकों में पानी की उपलब्धता, भूजल पर निर्भरता और बारिश के असमान वितरण की चुनौती बनी रहती है। ऐसे क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन, पारंपरिक तालाबों का संरक्षण और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप भूजल रिचार्ज की योजनाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

गांवों में पुराने तालाबों और जल निकासी मार्गों की देखभाल, सार्वजनिक भवनों की छतों से बारिश का पानी संग्रहित करना तथा पंचायत स्तर पर जल संरक्षण कार्यों की निगरानी उपयोगी कदम हो सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में घरों, बाजारों, संस्थानों और आवासीय परिसरों को भी ऐसी व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

हालांकि, राजस्थान के किसी खास जिले या गांव में अभियान के तहत कितने नए ढांचे बने हैं या उनसे कितना भूजल रिचार्ज हुआ है, इसका दावा करने के लिए संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय आंकड़ों की अलग से पुष्टि आवश्यक होगी।

क्या केवल वाटर हार्वेस्टिंग से पानी की समस्या खत्म हो जाएगी?

वर्षा जल संचयन जल संरक्षण का महत्वपूर्ण उपाय है, लेकिन इसे पानी की हर समस्या का अकेला समाधान नहीं माना जा सकता। इसके साथ पानी की बर्बादी रोकना, पाइपलाइन लीकेज ठीक करना, जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना, तालाबों का रखरखाव करना और भूजल का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

भूजल रिचार्ज के लिए बनाई गई संरचनाओं का डिजाइन स्थानीय मिट्टी, चट्टानों, जलस्तर और पानी की गुणवत्ता के आधार पर होना चाहिए। प्रदूषित पानी को बिना उचित उपचार के जमीन में पहुंचाने से भूजल की गुणवत्ता खराब हो सकती है। इसी तरह, अनुपयोगी बोरवेल को रिचार्ज के लिए इस्तेमाल करने से पहले उसकी तकनीकी जांच और सुरक्षित तैयारी जरूरी है।

आगे क्या होगा?

‘कैच द रेन’ अभियान का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि घरों, संस्थानों, स्थानीय निकायों और सरकारी विभागों में सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी ढंग से लागू किए जाते हैं। वर्षा जल संचयन की संरचनाओं का निर्माण, उनका नियमित रखरखाव और उनके वास्तविक परिणामों की निगरानी लंबे समय तक जल सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर सकती है।

सरकारी संदेश का मुख्य उद्देश्य साफ है—बारिश के पानी को केवल बह जाने देने के बजाय स्थानीय जरूरत और वैज्ञानिक परिस्थितियों के अनुसार उसका संग्रहण और संरक्षण किया जाए। यदि समुदाय, प्रशासन और संस्थान मिलकर इन उपायों को अपनाते हैं, तो जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।


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