दौसा में 27 अक्टूबर से शुरू होगा ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह का 43वां उर्स, चार दिन तक सजेंगी रूहानी महफिलें
- bySanjay
- 22 October, 2026
दौसा में उर्स की तैयारियां तेज, देशभर से पहुंचेंगे जायरीन
दौसा। राजस्थान के दौसा शहर में सूफी परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन 27 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। मुर्शिद नगर स्थित दरगाह शरीफ में हजरत ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह का 43वां सालाना उर्स मुबारक 27 से 30 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। चार दिवसीय इस आयोजन में राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है।
आस्ताना-ए-हकीमी सोसायटी के तत्वावधान में होने वाले इस उर्स को लेकर दरगाह परिसर में तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन के दौरान कुरआन ख्वानी, चादरपोशी, गुलपोशी, मिलाद शरीफ, महफिले समाअ यानी सूफियाना कव्वाली, मुशायरा और अन्य धार्मिक रस्में आयोजित की जाएंगी। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, बाहर से आने वाले जायरीन के ठहरने, लंगर और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी की जा रही है।
चार दिनों में होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

उर्स का कार्यक्रम चार दिनों तक चलेगा। प्रत्येक दिन अलग-अलग धार्मिक रस्मों और सूफियाना महफिलों का आयोजन प्रस्तावित है।
27 अक्टूबर: कुरआन ख्वानी और चादरपोशी से आगाज
उर्स के पहले दिन सुबह कुरआन ख्वानी के साथ कार्यक्रम शुरू होगा। इसके बाद सरकारी चादर पेश करने और गुलपोशी की रस्म अदा की जाएगी। रात में मिलाद शरीफ और महफिले समाअ का आयोजन होगा, जिसमें सूफियाना कलाम पेश किए जाने की तैयारी है।
28 अक्टूबर: आम चादर और महफिले समाअ
दूसरे दिन सुबह कुरआन ख्वानी होगी। इसके बाद जायरीन की ओर से चादर और फूल पेश करने का सिलसिला चलेगा। रात में शब-बेदारी और महफिले समाअ आयोजित की जाएगी।
29 अक्टूबर: कुल शरीफ और मुशायरा
तीसरे दिन सुबह 11 बजे कुल शरीफ की रस्म प्रस्तावित है। इसके बाद मुशायरे और महफिले समाअ का आयोजन किया जाएगा। इसमें शायर और कव्वाल अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
30 अक्टूबर: संदल शरीफ और समापन
उर्स के अंतिम दिन सुबह 10 बजे जुलूस-ए-संदल शरीफ निकाले जाने का कार्यक्रम है। इसके बाद मजार-ए-अकदस पर गुस्ल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। महफिले रंग और समाअ के साथ चार दिवसीय आयोजन का समापन होगा।
बाहर से आने वाले जायरीन के लिए व्यवस्थाएं
उर्स में राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात से भी जायरीन के पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। आयोजन समिति की ओर से दरगाह परिसर में आने वाले लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं पूरी करने की तैयारी की जा रही है।
ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को देखते हुए यात्रा, ठहरने और स्थानीय आवागमन की योजना पहले से बनाना उपयोगी रहता है। जायरीन को कार्यक्रम में शामिल होने से पहले आयोजकों से समय और व्यवस्थाओं की नवीनतम जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
आस्था, सूफियाना परंपरा और भाईचारे का संदेश
ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह का सालाना उर्स स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण आयोजन है। चादरपोशी, दुआ, सूफियाना कलाम और सामूहिक आयोजन इस परंपरा के प्रमुख हिस्से हैं। ऐसे अवसरों पर बड़ी संख्या में लोग धार्मिक रस्मों में शामिल होने और अमन, शांति तथा खुशहाली की दुआ करने के लिए पहुंचते हैं।
27 से 30 अक्टूबर तक चलने वाले इस उर्स को लेकर अब तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। दौसा में आयोजित होने वाला यह चार दिवसीय कार्यक्रम स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले जायरीन के लिए भी खास महत्व रखता है।
कार्यक्रम संबंधी जानकारी: ऊपर दिया गया कार्यक्रम 22 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित उपलब्ध आयोजन-विवरण पर आधारित है। यात्रा से पहले समय-सारणी और स्थानीय व्यवस्थाओं की पुष्टि आयोजक समिति से कर लें
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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