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सर्बिया की राजनीति में ऐतिहासिक उलटफेर! छात्र आंदोलन की ‘स्टूडेंट लिस्ट’ की बड़ी जीत, अलेक्जेंडर वुचिच ने मानी चुनावी हार

सर्बिया की राजनीति में ऐतिहासिक उलटफेर! छात्र आंदोलन की ‘स्टूडेंट लिस्ट’ की बड़ी जीत, अलेक्जेंडर वुचिच ने मानी चुनावी हार

सर्बिया की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव, छात्र आंदोलन ने चुनाव में दर्ज की बड़ी जीत

बेलग्रेड, 26 अक्टूबर 2026। यूरोप के बाल्कन क्षेत्र के देश सर्बिया में संसदीय चुनाव के नतीजों ने राजनीति की दिशा बदलने के संकेत दिए हैं। करीब दो साल से भ्रष्टाचार और सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़ी ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने चुनाव में बड़ी बढ़त हासिल की है। लंबे समय से सर्बिया की राजनीति में प्रभावशाली रहे अलेक्जेंडर वुचिच ने शुरुआती चुनावी आंकड़ों के आधार पर अपनी हार स्वीकार कर ली। इस घटनाक्रम को देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। 

चुनावी आंकड़ों में छात्र समर्थित समूह आगे

सर्बिया के सरकारी चुनाव आयोग की 26 अक्टूबर को जारी जानकारी के मुताबिक, उपलब्ध मतगणना आंकड़ों में स्टूडेंट लिस्ट को 52.65 प्रतिशत वोट मिले, जबकि अलेक्जेंडर वुचिच से जुड़ी ‘यूनाइटेड सर्बिया’ सूची को 39.22 प्रतिशत वोट मिले। यह आंकड़ा 8,135 मतदान केंद्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित बताया गया। चुनाव आयोग की इस रिपोर्ट के समय मतगणना की प्रक्रिया और अंतिम परिणामों से जुड़ी औपचारिकताएं महत्वपूर्ण थीं, इसलिए सीटों के अंतिम बंटवारे को आधिकारिक अंतिम नतीजों के अनुसार ही देखा जाना चाहिए। 

चुनाव के बाद वुचिच ने माना कि उनकी राजनीतिक सूची को हार का सामना करना पड़ा है। शुरुआती अनुमानों में छात्र आंदोलन से जुड़ी सूची को 250 सदस्यीय संसद में लगभग 135 से 140 सीटें मिलने की संभावना जताई गई। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या आधिकारिक परिणामों से तय होगी। 

आखिर क्यों चर्चा में आया छात्र आंदोलन?

सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर छतरीदार ढांचे के ढहने की घटना के बाद तेज हुई थी। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने घटना की पारदर्शी जांच, जिम्मेदारी तय करने और सरकारी संस्थानों में जवाबदेही की मांग उठाई।

समय के साथ विरोध प्रदर्शन केवल उस हादसे तक सीमित नहीं रहे। आंदोलन ने भ्रष्टाचार के आरोपों, संस्थागत पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। लगातार चल रहे प्रदर्शनों ने सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती खड़ी की और छात्र आंदोलन से जुड़े समूह ने चुनाव में भाग लेकर अपना समर्थन मतों में बदलने की कोशिश की। 

दो साल के विरोध के बाद मतदाताओं का फैसला

छात्र आंदोलन से जुड़े उम्मीदवारों की जीत को इस बात के संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि भ्रष्टाचार और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों ने मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया। चुनाव में स्टूडेंट लिस्ट ने खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग विकल्प के रूप में पेश किया। इससे ऐसे नागरिकों को भी एक साझा मंच मिला जो मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव चाहते थे।

हालांकि, चुनावी जीत अपने आप में सभी समस्याओं के समाधान की गारंटी नहीं है। अब इस समूह के सामने संसद में प्रभावी भूमिका निभाने, सरकार गठन की प्रक्रिया में हिस्सा लेने और अपने प्रमुख वादों को नीतियों में बदलने जैसी चुनौतियां होंगी। 

वुचिच की राजनीति के लिए बड़ा झटका

अलेक्जेंडर वुचिच लंबे समय से सर्बिया की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं। वे 2014 से 2017 तक प्रधानमंत्री रहे और 2017 में राष्ट्रपति बने। इस चुनाव में उनकी राजनीतिक ताकत को मिली चुनौती को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह केवल किसी एक सीट या क्षेत्र का परिणाम नहीं, बल्कि संसद में सत्ता के संतुलन को बदल सकने वाला घटनाक्रम है।

वुचिच के आलोचक उनकी सरकार पर सत्ता के केंद्रीकरण और भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, उनकी राजनीतिक camp ने इन आरोपों का विरोध किया है। चुनाव परिणामों के बाद अब सर्बिया में शासन, संस्थागत सुधार और राजनीतिक नेतृत्व की दिशा पर नई बहस होने की संभावना है। 

यूरोप और बाल्कन क्षेत्र पर क्या हो सकता है असर?

सर्बिया यूरोपीय संघ में शामिल होने का इच्छुक देश है, लेकिन उसकी विदेश नीति में रूस और चीन के साथ संबंध भी अहम रहे हैं। छात्र समर्थित समूह की जीत के बाद यह सवाल उठेगा कि नई संसद यूरोपीय संघ के साथ संबंधों, कानून के शासन, मीडिया की स्वतंत्रता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जैसे विषयों पर क्या रुख अपनाती है।

यूरोपीय नेताओं ने चुनाव के बाद कानून के शासन, स्वतंत्र मीडिया और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े सुधारों के समर्थन की बात कही है। फिर भी, नई राजनीतिक व्यवस्था की वास्तविक दिशा उसके फैसलों और नीतियों से ही स्पष्ट होगी। कोसोवो समेत क्षेत्र के संवेदनशील मुद्दों पर तुरंत बड़े बदलाव होंगे, ऐसा मान लेना अभी जल्दबाजी होगी। 

आगे की राह आसान नहीं

छात्र आंदोलन से जुड़े समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन की ऊर्जा को स्थायी राजनीतिक और प्रशासनिक कामकाज में बदलना होगी। चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार, पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुख रहे, लेकिन इन्हें लागू करने के लिए संसद में सहमति, स्पष्ट नेतृत्व और ठोस नीतियों की जरूरत होगी।

इसके अलावा, विभिन्न पृष्ठभूमियों से जुड़े उम्मीदवारों और समर्थकों को एक साझा राजनीतिक दिशा में साथ रखना भी महत्वपूर्ण रहेगा। मतदाताओं की अपेक्षाएं ऊंची होने के कारण नई संसद के कामकाज पर देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जाएगी।

निष्कर्ष

सर्बिया के संसदीय चुनाव में छात्र आंदोलन से जुड़ी स्टूडेंट लिस्ट की बढ़त और अलेक्जेंडर वुचिच की हार स्वीकार करने की घोषणा ने देश की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना पैदा की है। इस परिणाम के पीछे करीब दो साल से चल रहा विरोध प्रदर्शन और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाजें महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि रही हैं। अब असली परीक्षा यह होगी कि चुनावी जीत को किस तरह संस्थागत सुधारों, जवाबदेही और प्रभावी शासन में बदला जाता है


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