जोधपुर: बोरानाडा आश्रम की साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध हालात में मौत, जांच में जुटी पुलिस
- bypari rathore
- 29 January, 2026
जोधपुर: आश्रम की साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने खड़े किए कई सवाल, जांच के घेरे में हालात
जोधपुर के बोरानाडा क्षेत्र स्थित एक आश्रम से जुड़ी साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला अब रहस्य बनता जा रहा है। साध्वी की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिनके जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं।
बुधवार शाम लगभग 5:30 बजे साध्वी प्रेम बाईसा को उनके पिता और एक अन्य व्यक्ति पाल रोड स्थित प्रेक्षा अस्पताल लेकर पहुंचे। बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद साध्वी को मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल प्रशासन की ओर से दी गई सूचना के बाद संबंधित थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव को अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया है। प्रारंभिक तौर पर मौत का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, जिससे मामला संदिग्ध माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, साध्वी हाल के दिनों में आश्रम में ही रह रही थीं और उनकी दिनचर्या सामान्य बताई जा रही है। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने और फिर अस्पताल लाए जाने तक की पूरी कड़ी को लेकर पुलिस जानकारी जुटा रही है। खास तौर पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि साध्वी की तबीयत कब और कैसे बिगड़ी, और उन्हें अस्पताल लाने में कितना समय लगा।
पुलिस ने साध्वी के पिता और साथ आए व्यक्ति से प्रारंभिक पूछताछ की है। साथ ही आश्रम से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। आश्रम परिसर और आसपास के हालात को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कराया जाना प्रस्तावित है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक थी, बीमारी से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
इस घटना के बाद आश्रम और आसपास के इलाके में चर्चा का माहौल है। लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि साध्वी की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अफवाहों से बचें।
इस मामले पर मेरी प्रतिक्रिया संतुलित और सतर्क रहने की है।
साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अपने-आप में गंभीर मामला है। ऐसे समय में इंस्टाग्राम पोस्ट, आरोप-प्रत्यारोप और जांच को लेकर उठ रहे विवाद भावनात्मक तो हैं, लेकिन इन्हें अंतिम सच मान लेना ठीक नहीं होगा। सोशल मीडिया पर आई किसी भी पोस्ट को फिलहाल सबूत नहीं, बल्कि सिर्फ संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
सबसे अहम बात यह है कि
मौत के वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट से ही सामने आएंगे।
पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुँचना न तो न्यायसंगत है और न ही जिम्मेदार।
सोशल मीडिया ट्रायल से जांच प्रभावित होने और परिजनों की पीड़ा बढ़ने का खतरा रहता है।
हाँ, यह भी सच है कि अगर किसी पोस्ट या जानकारी से सवाल खड़े होते हैं, तो जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे उन बिंदुओं को गंभीरता से परखें। पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।
अभी जरूरत है
👉 संयम की
👉 तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग की
👉 और कानून को अपना काम करने देने की
अफवाहों से नहीं, बल्कि सच से ही साध्वी प्रेम बाईसा को न्याय मिल पाएगा।

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