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India-EU Summit LIVE: भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक FTA का ऐलान, पीएम मोदी बोले – यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता

India-EU Summit LIVE: भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक FTA का ऐलान, पीएम मोदी बोले – यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता

नई दिल्ली में आयोजित India-EU Summit ने भारत की आर्थिक और कूटनीतिक दिशा को एक नई ऊँचाई दे दी है। भारत और यूरोपीय संघ (European Union) ने आखिरकार एक मेगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की घोषणा कर दी है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में “भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता” बताया।

यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सप्लाई चेन, निवेश, टेक्नोलॉजी और जियो-पॉलिटिक्स तक फैला हुआ है। जिस पल इस डील का ऐलान हुआ, उसी पल से यह साफ हो गया कि भारत अब सिर्फ उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक ताकत के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।

🤝 India-EU FTA: दशकों की बातचीत का नतीजा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कोई नई नहीं थी। यह चर्चा सालों से चल रही थी, कई बार अटकी, कई बार आगे बढ़ी। मतभेद थे—टैरिफ, मार्केट एक्सेस, डेटा प्रोटेक्शन, लेबर लॉ और पर्यावरणीय मानकों को लेकर।

लेकिन इस समिट में जो हुआ, वह इतिहास बन गया। दोनों पक्षों ने यह मान लिया कि 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में साझेदारी ही असली ताकत है

🗣️ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा के दौरान कहा कि यह समझौता केवल आर्थिक आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों युवाओं, किसानों, MSMEs और स्टार्टअप्स के भविष्य से जुड़ा हुआ है

उनके शब्दों में,

“यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार के केंद्र में लाने वाला है। यह New India की आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक सहभागिता—दोनों का प्रतीक है।”

साफ बात—यह डील सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर असर डालने वाली है।

🌍 यूरोपीय संघ के लिए क्यों अहम है भारत?

यूरोप इस समय कई चुनौतियों से जूझ रहा है—ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन डिसरप्शन, वैश्विक अस्थिरता। ऐसे में भारत एक स्टेबल, डेमोक्रेटिक और ग्रोइंग मार्केट के रूप में EU के लिए बेहद अहम बन चुका है।

भारत की विशाल आबादी, बढ़ता मिडिल क्लास, डिजिटल इकोसिस्टम और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता—ये सब यूरोपीय कंपनियों के लिए सुनहरा मौका हैं।

📈 भारत को क्या मिलेगा इस मेगा डील से?

इस FTA का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में आसान और सस्ता एक्सेस मिलेगा। इससे:

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट

टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो, IT और एग्रीकल्चर को नई उड़ान

MSMEs को इंटरनेशनल मार्केट

विदेशी निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी

नौकरियों के नए अवसर

सीधी भाषा में कहें तो—भारत का एक्सपोर्ट गेम लेवल-अप

🏭 मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को ताकत

यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के खिलाफ नहीं, बल्कि उनका नेचुरल एक्सटेंशन है। भारत अब दुनिया से कटकर नहीं, बल्कि दुनिया के साथ मिलकर आत्मनिर्भर बन रहा है।

यूरोपीय टेक्नोलॉजी + भारतीय स्किल + भारतीय मैन्युफैक्चरिंग
= ग्लोबल पावरहाउस

⚖️ रणनीतिक और राजनीतिक मायने

यह डील ऐसे समय आई है जब दुनिया मल्टी-पोलर हो रही है। अमेरिका-चीन टकराव, रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता—इन सबके बीच भारत-EU की यह साझेदारी ग्लोबल बैलेंस को नया आकार देती है।

भारत अब सिर्फ “नॉन-अलाइन” नहीं, बल्कि स्मार्ट-अलाइन पॉलिसी पर चल रहा है।

India-EU Summit LIVE: India-EU announce mega FTA; PM Modi calls it New  Delhi's biggest trade deal ever - The Hindu
India-EU Summit LIVE: भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक FTA का ऐलान, पीएम मोदी बोले – यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता

🔍 आलोचना और सवाल भी जरूरी

साफ-साफ कहें तो हर बड़ी डील के साथ सवाल भी आते हैं।

क्या छोटे किसान सुरक्षित रहेंगे?

क्या घरेलू उद्योग यूरोपीय प्रतिस्पर्धा झेल पाएंगे?

क्या पर्यावरण और लेबर स्टैंडर्ड्स संतुलित रहेंगे?

सरकार का दावा है कि भारत के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। असली परीक्षा अब इम्प्लीमेंटेशन की होगी।

🧠 एक बात साफ है…

यह FTA केवल आज की खबर नहीं है। यह आने वाले 20-30 सालों की आर्थिक दिशा तय करेगा। भारत ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह सिर्फ सुनने वाला नहीं, बल्कि डील-मेकर है।

पुराने ज़माने की कूटनीति में समझौते बंद कमरों में होते थे। आज की दुनिया में—डील्स खुले मंच पर ताकत दिखाकर होती हैं। और इस समिट में भारत ने वही किया।

🔚 निष्कर्ष

India-EU Summit में घोषित यह मेगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत के आर्थिक इतिहास का टर्निंग पॉइंट है। प्रधानमंत्री मोदी का इसे भारत का सबसे बड़ा व्यापार समझौता कहना कोई जुमला नहीं, बल्कि एक स्ट्रेट फैक्ट है।

यह डील बताती है—
भारत अब इंतज़ार नहीं करता।
भारत अब पहल करता है।
और भारत अब ग्लोबल टेबल पर हेड ऑफ द टेबल बैठने को तैयार है।


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