रुपया 17 पैसे मजबूत हुआ — अमेरिकी डॉलर के मुकाबले early trade में 91.41 पर टिका, बाजार में सेंटिमेंट में बदलाव का साफ संकेत
- byAman Prajapat
- 23 January, 2026
भारत का रुपया शुक्रवार की सुबह में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार (early trade) में 17 पैसे के उछाल के साथ ₹91.41 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, जो कि इसका पिछले बंद भाव से बेहतर रुपया प्रदर्शन है।
यह हिमाकत का पल थोड़ा आश्चर्यजनक भी था, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में रुपया दबाव में रहा है; डॉलर के मुकाबले कमजोर मुद्रा का सिलसिला जारी रहा था।
मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों से पीछे हटने वाली घोषणा और भू-राजनीतिक तनाव में थोड़ी कमी ने निवेशकों की धारणा को बेहतर किया, जिससे शेयर बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार दोनों में थोड़ा ‘सेंटिमेंट रिकवरी’ देखने को मिला।
रुपया सुबह 91.45 से खुला और जल्दी ही 91.41 तक बेहतर स्थिति में आ गया, जो पिछले बंद भाव से लगभग 17 पैसे का इज़ाफ़ा दर्शाता है।
इस उछाल को कई अर्थशास्त्री हाल ही की वैश्विक geopolitics में बढ़े जोखिमों के कुछ कम होने और डॉलर को मिली कमजोर पकड़ का संकेत मान रहे हैं। डอลลาร์ की कमजोरी और risk appetite में सुधार ने emerging market currencies को थोड़ा मजबूती दी — जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।
वहीं, फॉरेक्स ट्रेडर्स का मानना है कि यह सुधार अभी बहुत गहरा नहीं है और अगर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी निवेश के बाहर निकलने का सिलसिला जारी रहा, तो रुपया फिर कमजोर स्थिति में भी आ सकता है।
मुश्किल बात यह है कि पिछले सप्ताह रुपये को अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिरने का दबाव भी रिपोर्ट हुआ था — जिससे बाजार सहभागियों में चिंता की लहर थी।
रुपया की मजबूती को लेकर जो मुख्य कारण सामने आए, उनमें सबसे बड़ा कारण टैरिफ वॉर से जुड़ी आशंकाओं में कमी के साथ कमजोर डॉलर इंडेक्स को माना जा रहा है, जिसने emerging market मुद्रा-जोड़े को फायदा पहुंचाया।
इस तेल की दुनिया में चल रही पत्रकारिता और विमर्श के बीच यह बदलाव देश के बजट, RBI की मुद्रा नीति और विदेशी पूंजी प्रवाह पर गहरा असर डाल सकता है। जैसे-जैसे विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) बाजार में पैसे वापस लेकर जा रहे हैं, रुपया पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ट्रेड डीलिंग्स या अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में सकारात्मक संकेत दिखे, तो रुपया कुछ और मजबूती हासिल कर सकता है; लेकिन जी़रो-टू-निगेटिव भू-राजनीतिक संकेत से बाजार फिर से दबाव में आ सकता है।
इस रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ा स्तरों पर यह देखा गया है कि 92.00 का लेवल एक मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है; इससे ऊपर जाने पर रुपया फिर दबाव में लौट सकता है।
रुपया की कीमतों में यह चंचलता ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव, Sensex-Nifty की दिशा और विदेशी निवेश प्रवाह की नीति से भी जुड़ी हुई है।
अगर हम पिछले रिकॉर्ड की बात करें, तो अब तक का निचला स्तर और लगातार निर्यात-आयात की मांग (मांग में डॉलर) ने भी मुद्रा के भाव को प्रभावित किया है।
कुल मिलाकर, भारतीय रुपया इस समय वैश्विक तनाव, विदेशी पूंजी के बहिर्वाह, डॉलर की मजबूती और घरेलू बाजार की प्रतिक्रिया के बीच एक संयोजन बिंदु पर है। इसे सीधे तौर पर ‘ठोस मजबूती’ नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह एक संभावित रिकवरी है — जो अगर स्थिर होती है तो आगे के कारोबार को बेहतर दिशा दे सकती है।
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