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करणी सेना प्रमुख राज शेखावत को दिल्ली HC से बड़ी राहत, कोर्ट ने कहा- कहीं भी आ-जा सकते हैं; प्रदर्शन कानून के दायरे में करें

करणी सेना प्रमुख राज शेखावत को दिल्ली HC से बड़ी राहत, कोर्ट ने कहा- कहीं भी आ-जा सकते हैं; प्रदर्शन कानून के दायरे में करें

करणी सेना अध्यक्ष राज शेखावत को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, बोले- घूमने की आजादी; प्रदर्शन कानून के दायरे में होगा

नई दिल्ली: UGC Equity Regulations 2026 के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के उस बयान को स्वीकार किया कि शेखावत को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया है। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि वह स्वतंत्र रूप से कहीं भी आ-जा सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगर वह किसी प्रदर्शन में शामिल होते हैं तो प्रदर्शन कानून के मुताबिक होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

राज शेखावत की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उन्हें UGC के नए इक्विटी नियमों के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से पहले पुलिस ने कथित तौर पर हिरासत में लिया और बाद में एक परिचित के घर पर रहने के लिए मजबूर किया गया।

दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत में कहा गया कि शेखावत को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही उन्हें किसी मामले में गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने पुलिस के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने पुलिस के बयान को स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।

हालांकि कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी स्पष्ट की—यदि राज शेखावत किसी विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेना चाहते हैं तो उनका प्रदर्शन कानून के अनुरूप होना चाहिए। यानी अदालत ने प्रदर्शन करने पर रोक नहीं लगाई, लेकिन कानून-व्यवस्था और लागू नियमों का पालन जरूरी बताया।

UGC नियमों के खिलाफ चला रहे हैं राष्ट्रव्यापी अभियान

याचिका में बताया गया कि राज शेखावत जनवरी 2026 से UGC Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को वापस लेने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

उनकी ओर से दावा किया गया कि 23 अगस्त को दिल्ली में प्रस्तावित कार्यक्रम के बारे में पुलिस को पहले से जानकारी दी गई थी। याचिका के मुताबिक कार्यक्रम में लगभग 450-500 लोगों के शामिल होने की संभावना बताई गई थी।

23 अगस्त को क्या हुआ था?

याचिका के अनुसार, राज शेखावत को 23 अगस्त की शाम करीब 5:30 बजे पुलिस ने कथित तौर पर उस समय अपने कब्जे में लिया जब वह प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। याचिका में दावा किया गया कि उन्हें रात तक रोके रखा गया और बाद में छोड़ दिया गया।

इसके बाद 24 अगस्त की सुबह से पुलिसकर्मियों के एक परिचित के घर के बाहर मौजूद रहने का भी आरोप लगाया गया। शेखावत की ओर से दावा किया गया कि उन्हें वहां से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अदालत के सामने हिरासत या गिरफ्तारी से इनकार किया। इसी बयान के आधार पर हाईकोर्ट ने तत्काल किसी अतिरिक्त राहत की जरूरत नहीं मानी।

1 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 1 सितंबर 2026 को रोस्टर बेंच के सामने सूचीबद्ध किया है। फिलहाल अदालत ने पुलिस के बयान को स्वीकार करते हुए राज शेखावत को स्वतंत्र रूप से घूमने की स्थिति स्पष्ट कर दी है।

UGC Equity Regulations पर पहले ही लग चुकी है रोक

यह मामला उस विवाद से जुड़ा है जिसमें UGC के 2026 Equity Regulations को लेकर देशभर में बहस और विरोध हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में इन नियमों पर रोक लगाते हुए कहा था कि कुछ प्रावधानों में अस्पष्टता है और उनके गलत इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद 2012 के नियमों को अंतरिम रूप से लागू रखने का निर्देश दिया गया था।

अब करणी सेना का अगला कदम क्या होगा?

हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद राज शेखावत के लिए आवाजाही की स्थिति स्पष्ट हो गई है। हालांकि, भविष्य में होने वाले किसी भी प्रदर्शन के लिए कानूनी अनुमति, सार्वजनिक व्यवस्था और लागू नियमों का पालन जरूरी रहेगा।

फिलहाल इस मामले की अगली महत्वपूर्ण तारीख 1 सितंबर 2026 है। उस दिन अदालत आगे की कार्यवाही पर विचार करेगी।


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