अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना के हथियारों और मिसाइलों के भंडार को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि महीनों से चल रहे युद्ध में अमेरिका ने बड़ी संख्या में लंबी दूरी की मिसाइलों और एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया है। इसके चलते अमेरिकी हथियार भंडार पर गंभीर दबाव पड़ा है।
ATACMS और PrSM के स्टॉक पर बड़ा असर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान युद्ध के दौरान Army Tactical Missile Systems यानी ATACMS और Precision Strike Missiles यानी PrSM का बेहद बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इन हथियारों का अमेरिकी स्टॉक लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है।
ये मिसाइलें अमेरिकी सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के जमीनी लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। ऐसे हथियारों की कमी भविष्य में किसी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में अमेरिका के विकल्पों को सीमित कर सकती है।
THAAD और Patriot मिसाइलों पर भी दबाव
सिर्फ आक्रामक मिसाइलें ही नहीं, बल्कि अमेरिकी एयर-डिफेंस सिस्टम पर भी युद्ध का बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक THAAD और Patriot इंटरसेप्टर का इस्तेमाल तेजी से हुआ है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन हथियारों के स्टॉक को दोबारा भरने में वर्षों का समय लग सकता है।
अमेरिका के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि THAAD और Patriot जैसे सिस्टम दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को रोकने में इस्तेमाल होते हैं।
क्या अमेरिका के पास मिसाइलें खत्म हो गई हैं?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी मिसाइल भंडार में भारी कमी और पूरी तरह मिसाइल खत्म हो जाने में अंतर है।
CSIS के विश्लेषण के अनुसार, ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी मिसाइल भंडार काफी कम हुआ है, लेकिन अमेरिका के पास युद्ध जारी रखने की क्षमता बनी हुई थी। हालांकि, मौजूदा स्टॉक को फिर से भरना एक बड़ी चुनौती है।
यानी सोशल मीडिया पर चल रहा यह दावा कि “मिसाइलों का भंडार खाली होते ही अमेरिकी सेना जंग छोड़कर भाग गई” उपलब्ध रिपोर्टों से सीधे तौर पर साबित नहीं होता।
युद्ध ने अमेरिकी हथियार उद्योग के सामने खड़ी की बड़ी चुनौती
ईरान युद्ध ने अमेरिकी सैन्य उद्योग की उत्पादन क्षमता पर भी सवाल खड़े किए हैं। महंगी और अत्याधुनिक मिसाइलों को बड़ी संख्या में तेजी से बनाना आसान नहीं है। सप्लाई चेन, उत्पादन क्षमता और जरूरी घटकों की उपलब्धता के कारण स्टॉक को फिर से भरने में लंबा समय लग सकता है।
अमेरिका ने हथियारों के भंडार को फिर से मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है। Patriot मिसाइलों की नई खरीद और उत्पादन बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर के समझौतों की भी रिपोर्ट सामने आई है।
क्या अमेरिका ने ईरान से जंग छोड़ दी?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका केवल मिसाइलों की कमी के कारण युद्ध से पीछे हट गया है। अगस्त 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका अभी भी ईरान पर दबाव बनाए हुए है और अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखने की क्षमता का दावा कर रही है।
दूसरी तरफ, ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम और शांति वार्ता को लेकर स्थिति भी लगातार बदल रही है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर विवाद जारी है।
अमेरिका के लिए आगे क्या चुनौती है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर भविष्य में ईरान के साथ संघर्ष और लंबा चलता है या चीन जैसे किसी बड़े सैन्य प्रतिद्वंद्वी के साथ संकट पैदा होता है, तो क्या अमेरिका के पास पर्याप्त आधुनिक मिसाइल और इंटरसेप्टर मौजूद होंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी हथियार भंडार को युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंचाने में काफी समय लग सकता है। यही वजह है कि ईरान युद्ध ने अमेरिकी सैन्य तैयारी और हथियार उत्पादन क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष: अमेरिकी मिसाइल भंडार पर युद्ध का बड़ा असर पड़ा है और कई महत्वपूर्ण हथियारों के स्टॉक में भारी कमी की रिपोर्ट है। लेकिन यह कहना कि “मिसाइलें खत्म होते ही अमेरिकी सेना जंग छोड़कर भाग गई” अभी तथ्यात्मक रूप से स्थापित नहीं है। असली कहानी अमेरिकी हथियार भंडार पर बढ़ते दबाव और उसे दोबारा भरने की बड़ी चुनौती की है।
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