उदयपुर स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा, तीन बच्चे घायल; जर्जर भवन पर लगाया गया ताला
- bySanjay
- 07 October, 2026
उदयपुर स्कूल में अचानक गिरा छत का प्लास्टर, तीन बच्चे घायल

उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर जिले के भींडर क्षेत्र से स्कूल भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। 6 अक्टूबर 2026 को वाणियातलाई ग्राम पंचायत के नारदा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चलने के दौरान छत का प्लास्टर अचानक नीचे गिर गया। हादसे के समय कमरे में करीब 32 बच्चे मौजूद बताए गए। प्लास्टर गिरने से तीन बच्चों के सिर में चोट आई, जबकि दो अन्य बच्चों को मामूली चोटें लगीं।
हादसे के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शिक्षकों और ग्रामीणों ने घायल बच्चों को तत्काल भींडर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। उपचार के बाद घायल बच्चों को अस्पताल से घर भेज दिया गया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी बच्चे की मौत नहीं हुई।
कक्षा में मौजूद थे करीब 32 बच्चे
रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय हादसा हुआ उस दौरान अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक ही कमरे में पढ़ाई कर रहे थे। अचानक छत का प्लास्टर तेज आवाज के साथ नीचे आ गिरा। इसके बाद बच्चों में घबराहट और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
घायल बच्चों में पहली कक्षा की छात्रा कृष्णा कुमारी, कार्तिक और पांचवीं कक्षा के छात्र गणेशलाल का नाम सामने आया है। तीनों को सिर में चोट लगी। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
स्कूल भवन पहले से बताया जा रहा था जर्जर
इस घटना ने स्कूल भवन की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक के अनुसार स्कूल में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं और विद्यालय में कुल 37 बच्चे नामांकित हैं।
प्रधानाध्यापक ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति के बारे में शिक्षा विभाग को पहले ही सूचना दी जा चुकी थी। ग्रामीणों का भी कहना है कि स्कूल भवन काफी समय से खराब हालत में था और इसकी मरम्मत को लेकर शिकायतें की गई थीं।
हादसे के बाद स्कूल भवन पर लगाया गया ताला
हादसे के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए जर्जर स्कूल भवन को बंद कर दिया। भवन के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया है।
अब बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक कक्षाएं माताजी के चबूतरे के पास दूसरी जगह संचालित की जाएंगी, ताकि बच्चों को जर्जर भवन में बैठाकर पढ़ाने का जोखिम न रहे।
वर्ष 2001 में बना था स्कूल भवन
जानकारी के अनुसार स्कूल भवन का निर्माण वर्ष 2001 में हुआ था। ग्रामीणों ने भवन की स्थिति और उसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल एक कमरे की समस्या नहीं है, बल्कि विद्यालय के अन्य हिस्से और बरामदा भी जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द नया भवन या स्थायी सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
शिक्षा अधिकारियों ने किया मौके का निरीक्षण
हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) भींडर राजेंद्र कुमार चौबीसा मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने हादसे की स्थिति और स्कूल भवन की हालत की जानकारी ली।
अब सवाल यह है कि जब भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी पहले से विभाग तक पहुंच चुकी थी, तो बच्चों को वहां पढ़ाने की व्यवस्था क्यों जारी रही। हालांकि इस संबंध में अंतिम जिम्मेदारी और किसी तरह की लापरवाही तय करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जांच और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
हादसे के बाद बच्चों के अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
स्कूल भवन का कोई बड़ा हिस्सा अगर बच्चों के बीच गिरता तो स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती थी। ऐसे में घटना ने राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में मौजूद पुराने और जर्जर स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर ध्यान खींचा है।
पुराने जर्जर स्कूल भवनों की सुरक्षा पर फिर सवाल
उदयपुर के नारदा स्कूल की घटना के बाद सरकारी स्कूलों के भवनों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत की जरूरत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर उन स्कूलों में जहां बच्चे रोजाना पुराने भवनों में पढ़ते हैं, वहां भवन की स्थिति की समय-समय पर जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस घटना में तीन बच्चों के घायल होने के बाद स्कूल भवन को बंद कर वैकल्पिक स्थान पर कक्षाएं शुरू करने का फैसला लिया गया है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन आगे भवन की मरम्मत, पुनर्निर्माण या नया स्कूल भवन उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।
महत्वपूर्ण तारीख: यह हादसा 6 अक्टूबर 2026 को हुआ था और 7 अक्टूबर 2026 को इसकी अपडेटेड रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इसलिए इसे 7 अक्टूबर की खबर में लिखते समय घटना की तारीख 6 अक्टूबर ही बताना सही रहेगा।
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