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18 साल बाद भारत-EU फ्री ट्रेड डील, बाजार और रोजगार पर पड़ेगा गहरा असर

18 साल बाद भारत-EU फ्री ट्रेड डील, बाजार और रोजगार पर पड़ेगा गहरा असर

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 साल के बाद फ्री ट्रेड डील पर मोहर लग चुकी है.

दोनों देशों ने टैरिफ में बड़ी कटौती और कुछ प्रोडक्ट्स पर टैरिफ समाप्त करने की सहमति जताई है. 
भारत-यूरोप ट्रेड डील के बाद आम लोगों पर इसका सबसे पहला असर क्या होगा?
👍 - विदेशी सामान की कीमतें घटेंगी
👎 - घरेलू कारोबार पर दबाव बढ़ेगा
🙏 - नए रोजगार के अवसर खुलेंगे
😮 - *कुछ कह नहीं सकते*yah wali news mere liye Banakar dijiye kuchh alag pattern mein vah pattern banaaiye jo abhi tak Kisi Ne use nahin kiya ho
ठोक-ठाक समझौता!
18 साल की बात पूरी हुई
भारत-यूरोपीय संघ FTA पर हुई मुहर, अब आयात-निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।

समझौते की मुख्य बातें
टैरिफ में भारी कटौती – यूरोप से आने वाले सामान पर शुल्क कम।

कुछ उत्पादों पर शुल्क हटा – यूरोपीय ब्रांड्स के लिए भारत का बाज़ार और खुला।

दोतरफ़ा रास्ता – भारतीय कंपनियों को भी यूरोप में नई पहुँच मिलेगी।

पहला असर आम लोगों पर कैसे?
👍 यूरोपीय सामान सस्ते होंगे – वाइन, चॉकलेट, लक्ज़री आइटम्स, ब्यूटी प्रोडकक्ट्स की कीमतों में गिरावट संभव।

👎 घरेलू छोटे उद्योग दबाव में – सीधे यूरोपीय प्रोडक्ट्स से टक्कर, मुकाबला करना चुनौती।

🙏 नए रोज़गार के अवसर – लॉजिस्टिक्स, एक्सपोर्ट सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में नौकरियाँ बढ़ सकती हैं।

😮 असर अनिश्चित – बाज़ार, विदेशी निवेश और वैश्विक हालात पर असर का पूरा आकलन समय लेगा।

दीर्घकालिक असर क्या होगा?
भारत यूरोप के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में तेजी आएगी – ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी सेक्टर फायदे में।

भारतीय दवा और आईटी सेवाओं को यूरोप में नए दरवाज़े मिल सकते हैं।

नोट: समझौते का असर अगले 3-5 साल में साफ़ दिखेगा। दोनों पक्षों को अपने कारोबार को मज़बूत करने और गैर-टैरिफ़ बाधाएँ हटाने पर काम करना होगा।

🔹 समय बताएगा – भारत को नया वैश्विक ट्रेड पार्टनर मिला है।


दो दशक की मोहलत के बाद हुई सहमति, भारत और EU ने 'मदर ऑफ ऑल डील्स' पर लगाई मुहर
27 जनवरी, 2026

नई दिल्ली: लगभग 18 साल के लंबे और ऑफ-ऑन चले वार्ता के बाद भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ (EU) ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बनाई है। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए "द्वार खोलने वाला" माना जा रहा है।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस सौदे को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-यूरोप संबंधों में "नए युग का शंखनाद" बताया है।

कार-वाइन से लेकर कपड़ा-ज्वेलरी तक, इस तरह बदलेंगे बाजार
समझौते का सबसे ठोस और तत्काल असर दोनों ओर के उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) में भारी कटौती होगी। मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए: यूरोपीय सामान होंगे सस्ते
कैरों पर बड़ी राहत: भारत में यूरोपीय कारों पर लगने वाला टैरिफ, जो वर्तमान में 110% तक है, धीरे-धीरे घटाकर 10% कर दिया जाएगा। हालांकि, यह छूट सालाना 2.5 लाख कारों तक ही सीमित होगी। इसके अलावा कार पुर्जों पर शुल्क भी 5-10 साल में खत्म हो जाएंगे।

मदिरा और कृषि उत्पाद: यूरोप से आने वाली वाइन, बीयर और ओलिव ऑयल जैसी चीजों पर भी टैरिफ में भारी कटौती होगी। यूरोप से आने वाली मशीनरी, रसायन और विमानों पर भी टैरिफ समाप्त हो जाएंगे।

भारतीय उद्योगों के लिए: EU के दरवाजे खुलेंगे चौड़े
श्रम प्रधान उद्योगों को बढ़ावा: EU भारत के लिए जिन उत्पादों पर शुल्क खत्म करेगा, उनमें कपड़ा, परिधान, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, गहने और आभूषण शामिल हैं। ये वे क्षेत्र हैं जो अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ से पहले से ही प्रभावित हैं।

रोजगार के नए अवसर: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, केवल कपड़ा क्षेत्र में ही यह समझौता 60 से 70 लाख नई नौकरियां पैदा कर सकता है।

सेवा क्षेत्र को फायदा: भारत की IT और पेशेवर सेवा कंपनियों को यूरोपीय बाजार में काम करना आसान होगा, क्योंकि दोनों पक्षों ने पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक फ्रेमवर्क पर सहमति बनाई है।

'दो महान शक्तियों' के बीच साझेदारी का नया दौर
यह समझौता सिर्फ एक व्यापारिक डील नहीं है। यह एक ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ रहा है। EU प्रमुख वॉन डेर लेयेन ने कहा, "यह दो महान शक्तियों की कहानी है... जिन्होंने सही अर्थों में 'विन-विन' साझेदारी चुनी।" यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि यह समझौता दुनिया को एक "महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश" देता है कि भारत और EU टैरिफ से ज्यादा व्यापार समझौतों पर विश्वास करते हैं।

एक नजर में: समझौते की बड़ी बातें
पहलू भारत के लिए यूरोपीय संघ के लिए
प्रमुख टैरिफ छूट कपड़ा, चमड़ा, गहने, समुद्री भोजन पर EU शुल्क खत्म। कार (110% से घटकर 10%), वाइन, बीयर, मशीनरी पर भारतीय शुल्क में भारी कटौती।
आर्थिक पैमाना 136 अरब डॉलर का वार्षिक व्यापार (2024-25), 2 अरब लोगों का बाजार। वैश्विक GDP का 25% हिस्सा।
अनुमानित लाभ निर्यात बढ़ोतरी, लाखों नए रोजगार, अमेरिकी टैरिफ से राहत। 2032 तक भारत को निर्यात दोगुना होने की उम्मीद, सालाना 4 अरब यूरो की टैरिफ बचत।
संवेदनशील क्षेत्र डेयरी, अनाज, चीनी जैसे क्षेत्रों की सुरक्षा। कृषि क्षेत्र (बीफ, चिकन, चावल आदि) को संरक्षण।
समयरेखा और अगला कदम
2007: भारत-EU FTA वार्ता शुरू हुई।

2013: बाजार पहुंच और नियामक मुद्दों पर रुकी।

जुलाई 2022: रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वार्ता फिर से शुरू।

27 जनवरी 2026: वार्ता संपन्न और समझौते की घोषणा।

आगे की राह: अब समझौते को कानूनी जांच से गुजरना है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि 2026 के अंत तक इसे लागू किया जा सकता है।

यह समझौता भारत की 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता की रणनीति को एक नई गति दे सकता है। साथ ही, यूरोप को भारत के विशाल और तेजी से बढ़ते बाजार में प्रवेश का एक अभूतपूर्व अवसर मिला है।


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