डॉलर को चुनौती देगा BRICS! लोकल करेंसी में बढ़ेगा कारोबार, ट्रंप ने दी 100% टैरिफ की धमकी
- bySanjay
- 12 September, 2026
डॉलर के दबदबे को चुनौती! BRICS देशों का लोकल करेंसी में कारोबार बढ़ाने पर जोर, ट्रंप की टैरिफ चेतावनी से बढ़ा तनाव
दुनिया की अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर की मजबूत पकड़ के बीच BRICS देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। नई दिल्ली में चल रहे BRICS Summit 2026 में सदस्य देशों ने सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को ज्यादा आसान और प्रभावी बनाने तथा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। हालांकि, फिलहाल किसी साझा BRICS करेंसी को लॉन्च करने का फैसला नहीं किया गया है।
BRICS का फोकस कॉमन करेंसी पर नहीं
BRICS देशों के बीच लंबे समय से डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चा होती रही है। लेकिन इस बार समूह ने तत्काल कोई नई साझा मुद्रा बनाने के बजाय व्यावहारिक भुगतान व्यवस्था और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया है।
नई दिल्ली घोषणा में BRICS Payment Task Force के काम का स्वागत करते हुए सीमा-पार भुगतान और पेमेंट सिस्टम के बीच बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर दिया गया। सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के निपटान की संभावनाओं पर भी काम आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत ने भी स्थानीय मुद्रा में व्यापार पर दिया जोर
भारत की ओर से भी BRICS देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर जोर दिया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने BRICS देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम करने और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही।
इसका मकसद यह है कि दो देशों के बीच कारोबार में हर बार किसी तीसरी मुद्रा पर निर्भरता कम हो और भुगतान प्रक्रिया ज्यादा सीधी हो सके।
UPI जैसे सिस्टम को भी मिल सकता है बढ़ावा
BRICS के भीतर डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़ने की कोशिश भी चर्चा में है। भारत का UPI और ब्राजील का Pix जैसे घरेलू भुगतान नेटवर्क अपने-अपने देशों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं। इनके बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने से भविष्य में सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अलग-अलग देशों की करेंसी, नियम, पूंजी नियंत्रण और व्यापार असंतुलन जैसी चुनौतियां अभी मौजूद हैं। इसलिए इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने पर जोर है।
ट्रंप ने BRICS को लेकर दी टैरिफ की चेतावनी
BRICS के स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था की कोशिशों पर अमेरिका की नजर भी बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही BRICS देशों की डॉलर से दूरी बनाने वाली कोशिशों पर कड़ी प्रतिक्रिया दे चुके हैं और अतिरिक्त टैरिफ की धमकी दे चुके हैं।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक भूमिका को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश को अमेरिका गंभीरता से लेगा। इसी वजह से BRICS की स्थानीय मुद्रा वाली पहल को लेकर अमेरिका और BRICS देशों के बीच आर्थिक तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
क्या सच में डॉलर को बड़ा झटका लगेगा?
BRICS की कोशिशों को डॉलर के विकल्प की दिशा में एक कदम जरूर माना जा रहा है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि डॉलर का दबदबा खत्म होने वाला है। अमेरिकी डॉलर अभी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और केंद्रीय बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक है।
BRICS खुद भी फिलहाल डॉलर को पूरी तरह हटाने के बजाय स्थानीय मुद्राओं में ज्यादा विकल्प और बेहतर भुगतान व्यवस्था तैयार करने पर जोर दे रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?
भारत के लिए स्थानीय मुद्रा में व्यापार का विस्तार कई वजहों से महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि भारतीय कंपनियां कुछ साझेदार देशों के साथ सीधे रुपये में व्यापार का निपटान कर पाती हैं, तो मुद्रा बदलने की लागत और कुछ लेनदेन संबंधी जोखिम कम हो सकते हैं।
हालांकि, इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने BRICS देश और कितनी बड़ी कंपनियां इन व्यवस्थाओं को बड़े पैमाने पर अपनाती हैं।
कुल मिलाकर, BRICS की रणनीति फिलहाल डॉलर को एक झटके में हटाने की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों के लिए ज्यादा जगह बनाने की है। यही कोशिश आने वाले वर्षों में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।
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जयपुर मे सोने और चां...
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