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Big SEBI Action: सेंसेक्स में कथित हेरफेर पर SEBI की बड़ी कार्रवाई, 2 संस्थाओं पर गंभीर आरोप

Big SEBI Action: सेंसेक्स में कथित हेरफेर पर SEBI की बड़ी कार्रवाई, 2 संस्थाओं पर गंभीर आरोप

Big SEBI Action: सेंसेक्स में कथित हेरफेर पर सेबी की बड़ी कार्रवाई, दो संस्थाओं पर लगे गंभीर आरोप

मुंबई: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सेंसेक्स से जुड़े कैश मार्केट और एक्सपायरी-डे ऑप्शंस कारोबार में कथित तौर पर संदिग्ध ट्रेडिंग गतिविधियों को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। नियामक की जांच में दो संस्थाओं की गतिविधियां सवालों के घेरे में आई हैं। आरोप है कि इन संस्थाओं ने कैश मार्केट में बड़े पैमाने पर sell orders लगाए और बाद में उन्हें रद्द कर दिया।

SEBI के अनुसार, संबंधित गतिविधियों में करीब 12.65 लाख शेयरों के sell orders शामिल थे। बाद में इन सभी orders को cancel कर दिया गया। नियामक ने इन गतिविधियों को सेंसेक्स के expiry-day options में ली गई पोजीशन से जोड़कर देखा है।

12.65 लाख शेयरों के sell orders ने खींचा SEBI का ध्यान

SEBI की जांच के मुताबिक, संबंधित इकाई Mansi ने कैश मार्केट में बड़ी संख्या में sell orders लगाए थे। हालांकि, इन orders को बाद में execute करने के बजाय cancel कर दिया गया।

नियामक की नजर में इस तरह के बड़े orders और उनका बाद में cancel होना महज सामान्य ट्रेडिंग गतिविधि नहीं हो सकती। जांच में इन orders के समय, मात्रा और संबंधित derivatives positions के बीच संभावित संबंध को देखा गया।

Expiry Day पर सेंसेक्स ऑप्शंस से कनेक्शन

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सेंसेक्स के expiry day options से जुड़ा है। Expiry के दिन index options में कीमतों में छोटे बदलाव भी ट्रेडर्स की positions के मुनाफे या नुकसान पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

SEBI ने cash-market में दिखाई गई गतिविधियों और उसी समय derivatives market में मौजूद positions के बीच संबंध की जांच की। नियामक का आरोप है कि cash-market orders का इस्तेमाल बाजार में कीमत या धारणा को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर किया गया हो सकता है।

Orders लगाए, लेकिन ट्रेड नहीं किया?

बाजार में किसी शेयर के बड़े sell orders दिखाई देने पर दूसरे ट्रेडर्स को उस शेयर में बिकवाली का दबाव महसूस हो सकता है। अगर ऐसे orders बाद में बिना execution के cancel कर दिए जाएं, तो नियामक यह जांच सकता है कि उनका वास्तविक उद्देश्य खरीद-बिक्री करना था या order book को प्रभावित करना।

SEBI पहले भी ऐसी गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है। उसके enforcement records में market manipulation और spoofing से जुड़े मामलों में कार्रवाई के उदाहरण मिलते हैं।

दो संस्थाओं पर गलत तरीके से मुनाफा कमाने का आरोप

इस मामले में SEBI ने दो संस्थाओं की ट्रेडिंग गतिविधियों को जांच के दायरे में लिया है। आरोप यह है कि cash-market में की गई गतिविधियों का संबंध सेंसेक्स options में उनकी expiry-day positions से था और इस रणनीति के जरिए कथित तौर पर अनुचित लाभ हासिल करने की कोशिश की गई।

हालांकि, किसी नियामकीय आदेश में लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध अपराध मानना उचित नहीं है। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने और नियामकीय प्रक्रिया के तहत जवाब देने का अधिकार होता है।

SEBI की कार्रवाई क्यों है महत्वपूर्ण?

सेंसेक्स और उसके derivatives बाजार में बड़ी मात्रा में कारोबार होता है। ऐसे में अगर कोई ट्रेडर जानबूझकर बड़े orders के जरिए order book को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो इससे दूसरे बाजार प्रतिभागियों के फैसले प्रभावित हो सकते हैं।

SEBI का उद्देश्य बाजार में निष्पक्ष और पारदर्शी ट्रेडिंग सुनिश्चित करना है। इसी वजह से regulator ऐसी गतिविधियों पर नजर रखता है जिनसे कीमतों में कृत्रिम प्रभाव या अन्य निवेशकों को गलत संकेत मिलने की आशंका हो।

निवेशकों के लिए क्या है संदेश?

इस मामले से यह संकेत मिलता है कि बाजार नियामक अब cash और derivatives दोनों segments में ट्रेडिंग गतिविधियों के बीच संबंधों पर बारीकी से नजर रख रहा है। खासकर expiry days पर बड़े orders, order cancellations और derivatives positions के बीच असामान्य पैटर्न नियामक की जांच के दायरे में आ सकते हैं।

SEBI के enforcement records में हाल के वर्षों में market manipulation और trading-related मामलों पर लगातार कार्रवाई दर्ज हुई है।

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सेंसेक्स में कथित हेरफेर पर SEBI की बड़ी कार्रवाई

फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि 12.65 लाख शेयरों के sell orders क्यों लगाए गए, उन्हें बाद में क्यों cancel किया गया और उनका सेंसेक्स options की expiry-day positions से क्या संबंध था। SEBI की कार्रवाई इसी कथित ट्रेडिंग पैटर्न की जांच पर केंद्रित है।


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