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भिवाड़ी फैक्ट्री ब्लास्ट: मोतिहारी के 7 घरों में मातम, 7 चिराग बुझे

भिवाड़ी फैक्ट्री ब्लास्ट: मोतिहारी के 7 घरों में मातम, 7 चिराग बुझे

भिवाड़ी फैक्ट्री ब्लास्ट: मोतिहारी के 7 घरों में मातम, एक झटके में बुझ गईं 7 जिंदगियां
मोतिहारी/भिवाड़ी: राजस्थान के भिवाड़ी में हुए भीषण फैक्ट्री विस्फोट की आंच सिर्फ औद्योगिक इकाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने बिहार के मोतिहारी जिले के सात परिवारों की खुशियों को राख में बदल दिया। इस हादसे ने पूर्वी चंपारण के इन सात घरों के 'चिराग' हमेशा के लिए बुझा दिए, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

आंसुओं का सैलाब, सूनी पड़ गईं डगर
जैसे ही भिवाड़ी में मारे गए युवकों की सूचना उनके पैतृक गांव पहुंची, मातमपुर्सी का माहौल छा गया। जिन घरों में कल तक बेटों के लौटने की आस थी, आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। परिजनों का गला बैठ गया है, लेकिन आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। मांएं बेसुध होकर अपने बेटों के नाम ले-लेकर बिलख रही हैं तो पिता स्तब्ध होकर दीवारों की ओर ताकते नजर आ रहे हैं। परिवार वालों को अब भी यकीन नहीं हो पा रहा कि उनके लाल इस दुनिया में नहीं रहे।

रोजी-रोटी की तलाश में गए थे, यमराज के मुंह में समाए
सभी मृतक युवा मोतिहारी के आसपास के गांवों के रहने वाले थे और रोजगार की तलाश में भिवाड़ी गए थे। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर घर से निकले इन बेटों ने कभी नहीं सोचा था कि वे कफन में लिपटकर वापस लौटेंगे। यह हादसा उन परिवारों के लिए एक ऐसा सदमा है, जिससे उबर पाना उनके लिए मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन लग रहा है।

सवाल और सुरक्षा की अनदेखी
यह घटना एक बार फिर देश में मजदूरों और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा के प्रति लापरवाही पर सवाल खड़े करती है। कारखानों में सुरक्षा के मानकों को लेकर उठ रहे सवालों ने इस हादसे के बाद और तूल पकड़ लिया है। स्थानीय प्रशासन पर पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।

प्रशासन में हड़कंप
घटना की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने भी संज्ञान लिया है। जिला प्रशासन का कहना है कि मृतकों के परिवारों को हर संभव सरकारी सहायता दी जाएगी और शवों को जल्द से जल्द लाने के लिए राजस्थान सरकार से समन्वय किया जा रहा है।

यह त्रासदी उन हजारों प्रवासी मजदूरों की दास्तां बयां करती है जो सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए घर-बार छोड़कर दूर देश में काम करते हैं और अक्सर सुरक्षा की दृष्टि से अनदेखी का शिकार हो जाते हैं।


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