एंथ्रोपिक ने स्वामी सर्वप्रियानंद को बुलाया, AI पर हुई खास बातचीत; Claude को ‘सही-गलत’ समझाने में वेदांत की चर्चा
- bySanjay
- 03 October, 2026
एंथ्रोपिक ने स्वामी सर्वप्रियानंद को बुलाया, AI पर हुई खास बातचीत; Claude को ‘सही और गलत’ समझाने में वेदांत की चर्चा
Category: Technology News (टेक्नोलॉजी)
नई दिल्ली/सैन फ्रांसिस्को। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में अब सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि दर्शन, नैतिकता और चेतना जैसे सवाल भी तेजी से चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं। इसी कड़ी में AI मॉडल Claude विकसित करने वाली कंपनी Anthropic ने न्यूयॉर्क स्थित Vedanta Society के प्रमुख और रामकृष्ण ऑर्डर के संन्यासी स्वामी सर्वप्रियानंद को अपने सैन फ्रांसिस्को मुख्यालय में आमंत्रित किया।
स्वामी सर्वप्रियानंद ने खुद एक सार्वजनिक बातचीत में इस मुलाकात के बारे में जानकारी दी थी। उनके मुताबिक Anthropic की ओर से पहले उनसे ऑनलाइन बातचीत की गई और बाद में उन्हें कंपनी के मुख्यालय आने का निमंत्रण दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह मुलाकात AI ethics, Claude के प्रशिक्षण और इस बड़े सवाल से जुड़ी थी कि अत्याधुनिक AI सिस्टम के व्यवहार में नैतिकता और ‘सही-गलत’ की समझ को किस तरह देखा जाए।
पहले ऑनलाइन बातचीत, फिर सैन फ्रांसिस्को बुलाया
स्वामी सर्वप्रियानंद के अनुसार Anthropic ने शुरुआत में उनसे ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए संपर्क किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी नौकरी के लिए संपर्क नहीं था। इसके बाद उन्हें कंपनी के सैन फ्रांसिस्को मुख्यालय आने के लिए आमंत्रित किया गया।
उनके मुताबिक कंपनी ने उनके यात्रा और होटल की व्यवस्था की। मुख्यालय में हुई बातचीत सामान्य सार्वजनिक कार्यक्रम जैसी नहीं थी। स्वामी ने बताया कि बैठक से पहले उनसे Non-Disclosure Agreement (NDA) पर हस्ताक्षर करवाए गए थे, जिसके कारण वह वहां हुई कई विशिष्ट बातों को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं कर सकते।
AI को ‘सही और गलत’ समझाने में दर्शन की भूमिका
Anthropic की इस पहल की सबसे खास बात यह है कि कंपनी ने AI के नैतिक व्यवहार पर चर्चा के लिए केवल इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों तक खुद को सीमित नहीं रखा।
रिपोर्टों के अनुसार स्वामी सर्वप्रियानंद के साथ अलग-अलग धार्मिक परंपराओं से जुड़े विचारकों, धर्मशास्त्रियों, काउंसलर्स और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इन चर्चाओं में हिस्सा लिया। उद्देश्य उन्नत AI सिस्टम के व्यवहार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों से जुड़े सवालों पर अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझना था।
स्वामी सर्वप्रियानंद का संबंध अद्वैत वेदांत से है। ऐसे में उनकी भागीदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू चेतना और ‘स्व’ जैसे दार्शनिक सवालों पर भारतीय दर्शन के नजरिए को सामने लाना था।
क्या AI में चेतना हो सकती है?

AI के विकास के साथ सबसे जटिल सवालों में से एक यह है कि अत्यधिक सक्षम मशीनों को लेकर ‘चेतना’ शब्द का इस्तेमाल किस अर्थ में किया जा सकता है।
Anthropic से जुड़ी चर्चाओं में भी यह सवाल सामने आया कि क्या भविष्य में अत्यधिक उन्नत AI सिस्टम में किसी तरह की consciousness या sense of self की बात की जा सकती है और यदि ऐसा सवाल उठता है तो उसके नैतिक और दार्शनिक परिणाम क्या होंगे।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि Claude या किसी मौजूदा AI सिस्टम को वैज्ञानिक रूप से मानव जैसी चेतना वाला साबित कर दिया गया है। यह मुख्य रूप से दार्शनिक और नैतिक विमर्श का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी चर्चा को इसी संदर्भ में रखा गया है।
वेदांत से Anthropic क्या समझना चाहती है?
वेदांत दर्शन में चेतना, आत्मा, अनुभव और ‘स्व’ जैसे प्रश्नों पर हजारों वर्षों से विचार किया जाता रहा है। Anthropic की ओर से धार्मिक और दार्शनिक विशेषज्ञों से बातचीत का एक उद्देश्य यह समझना बताया जा रहा है कि अलग-अलग परंपराएं नैतिकता, चेतना और मानव मूल्यों को किस तरह देखती हैं।
AI सिस्टम जब इंसानों के साथ बातचीत करते हैं, निर्णयों में सहायता करते हैं और जटिल सवालों का जवाब देते हैं, तब केवल तकनीकी क्षमता पर्याप्त नहीं मानी जाती। यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि AI का व्यवहार किन मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
इसी संदर्भ में भारतीय दर्शन समेत विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं से विचार लेना Anthropic की व्यापक AI ethics चर्चा का हिस्सा बताया गया है।
स्वामी सर्वप्रियानंद कौन हैं?
स्वामी सर्वप्रियानंद Vedanta Society of New York के आध्यात्मिक प्रमुख हैं और रामकृष्ण ऑर्डर से जुड़े संन्यासी हैं। Vedanta Society of New York के अनुसार वे जनवरी 2017 से संस्था के मंत्री और आध्यात्मिक नेता हैं। उन्होंने 1994 में रामकृष्ण मठ में प्रवेश किया और 2004 में संन्यास ग्रहण किया।
वे अद्वैत वेदांत पर व्याख्यान और संवाद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। उनकी बातचीत में भारतीय दर्शन, चेतना और आधुनिक जीवन से जुड़े विषयों पर चर्चा होती रही है। संस्था के अनुसार उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी व्याख्यान दिए हैं।
Anthropic ने सिर्फ एक धार्मिक परंपरा से बात नहीं की
इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Anthropic की चर्चाएं केवल हिंदू दर्शन तक सीमित नहीं थीं। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी ने अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के विचारकों और विशेषज्ञों से भी संवाद किया।
इसमें कैथोलिक, यहूदी, सिख और ईसाई परंपराओं से जुड़े धार्मिक विचारकों के साथ बातचीत का उल्लेख सामने आया है। इससे संकेत मिलता है कि AI की नैतिकता को किसी एक धार्मिक या दार्शनिक नजरिए से देखने के बजाय विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की कोशिश की जा रही थी।
NDA की वजह से कई बातें अभी भी सामने नहीं आईं
स्वामी सर्वप्रियानंद ने बताया कि बैठक के दौरान उनसे NDA पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। इसलिए उन्होंने वहां हुई बातचीत के कई विशिष्ट हिस्सों को सार्वजनिक नहीं किया।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से बैठक के व्यापक उद्देश्य, AI ethics और Claude के प्रशिक्षण से जुड़े विषयों का उल्लेख किया है, लेकिन Anthropic के अंदर दिखाए गए कुछ काम या परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने ‘Mythos’ और ‘Project Glasswing’ जैसे नामों का भी उल्लेख किया, लेकिन NDA के कारण इनके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। मीडिया रिपोर्टों में भी इन संदर्भों की पूरी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
AI की दौड़ अब सिर्फ ज्यादा शक्तिशाली मॉडल बनाने तक सीमित नहीं
Anthropic और स्वामी सर्वप्रियानंद से जुड़ी यह खबर AI उद्योग में हो रहे एक बड़े बदलाव की ओर भी ध्यान खींचती है। अब चर्चा केवल इस बात पर नहीं है कि AI मॉडल कितना तेज, कितना स्मार्ट या कितना सक्षम है।
इसके साथ यह सवाल भी जुड़ रहा है कि AI को इंसानों के साथ किस तरह व्यवहार करना चाहिए, मुश्किल नैतिक परिस्थितियों में उसे किस प्रकार प्रतिक्रिया देनी चाहिए और उसके जवाबों में किन मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
Claude जैसे बड़े AI मॉडल लाखों लोगों के साथ बातचीत कर सकते हैं। ऐसे में AI के व्यवहार और नैतिक सीमाओं पर विचार करना तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
भारतीय दर्शन और AI की नई बहस
स्वामी सर्वप्रियानंद और Anthropic की बातचीत ने भारतीय दर्शन को AI की आधुनिक बहस से जोड़ने का एक नया उदाहरण सामने रखा है।
एक ओर AI इंजीनियर मशीन लर्निंग, मॉडल ट्रेनिंग और सुरक्षा तकनीकों पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दार्शनिक और धार्मिक विचारक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मानव चेतना, नैतिकता और ‘स्व’ जैसे मूलभूत विचारों को मशीनों के संदर्भ में किस तरह समझा जाए।
फिलहाल Anthropic की इस पहल से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं हैं। लेकिन स्वामी सर्वप्रियानंद के सार्वजनिक बयान के बाद यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि आने वाले समय में AI के विकास में तकनीक के साथ दर्शन और नैतिकता की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
यानी Claude को बेहतर बनाने की चर्चा अब सिर्फ कोड और कंप्यूटिंग तक सीमित नहीं दिख रही—इसके बीच वेदांत, चेतना, नैतिकता और मानव मूल्यों जैसे सवाल भी जगह बना रहे हैं।
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