जैसलमेर में बड़ी सफलता! ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के 3 बच्चों को पहली बार री-वाइल्डिंग टनल में किया गया शिफ्ट
- bypari rathore
- 27 July, 2026
जैसलमेर में बड़ी कामयाबी! पहली बार ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के 3 बच्चों को री-वाइल्डिंग टनल में किया गया शिफ्ट
जैसलमेर। राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जैसलमेर स्थित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण केंद्र में पहली बार ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Godawan) के तीन चूजों (बच्चों) को सफलतापूर्वक री-वाइल्डिंग टनल में स्थानांतरित किया गया है। विशेषज्ञ इसे इस गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।
क्या है री-वाइल्डिंग टनल?
री-वाइल्डिंग टनल एक विशेष रूप से विकसित संरक्षित क्षेत्र है, जहां कृत्रिम देखभाल में पले पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाया जाता है। इसका उद्देश्य उन्हें जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए तैयार करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार, भोजन खोजने की क्षमता और वातावरण के प्रति अनुकूलन को मजबूत करती है।
क्यों खास है यह उपलब्धि?
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड दुनिया के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षियों में से एक है। इसकी घटती आबादी को देखते हुए कई वर्षों से संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
तीन चूजों का पहली बार री-वाइल्डिंग टनल में पहुंचना इस बात का संकेत है कि संरक्षण प्रयास सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे भविष्य में इस प्रजाति की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
संरक्षण अभियान को मिलेगी मजबूती
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में और अधिक चूजों को भी इसी प्रक्रिया से प्राकृतिक आवास के लिए तैयार किया जा सकेगा।
राजस्थान लंबे समय से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण का प्रमुख केंद्र रहा है और जैसलमेर इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है ग्रेट इंडियन बस्टर्ड?
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, जिसे राजस्थान में गोडावण भी कहा जाता है, भारत के सबसे प्रतिष्ठित पक्षियों में शामिल है। यह घास के मैदानों की पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हाल के वर्षों में आवास की कमी, बिजली की हाई-टेंशन लाइनों से टकराव और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण इसकी संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
आगे की योजना
संरक्षण केंद्र के विशेषज्ञ अब इन चूजों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखेंगे। सफल अनुकूलन के बाद इन्हें नियंत्रित तरीके से प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

निष्कर्ष
जैसलमेर में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के तीन चूजों को री-वाइल्डिंग टनल में स्थानांतरित किया जाना भारत के वन्यजीव संरक्षण अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह कदम इस दुर्लभ पक्षी की आबादी बढ़ाने और भविष्य में इसके संरक्षण को नई मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
"इको-फ्रेंडली इनोवेश...
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