पितृसत्ता से नफरत करने वाली महिला को डेट कर रहे हैं? थैरेपिस्ट की ‘सर्वाइवल गाइड’ वायरल, बोले– “सबसे खराब लाइन है: Not All Men”
- byAman Prajapat
- 24 January, 2026
आज की डेटिंग दुनिया किसी पुराने प्रेम गीत जैसी नहीं रही—यह ज़्यादा एक बहस का मैदान बन चुकी है। जहां एक तरफ़ प्यार है, वहीं दूसरी ओर विचारधाराओं की टकराहट। इसी टकराव के बीच एक थैरेपिस्ट की “सर्वाइवल गाइड” सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है, खासकर उन पुरुषों के लिए जो ऐसी महिलाओं को डेट कर रहे हैं जो खुलकर कहती हैं—“मैं पितृसत्ता से नफरत करती हूँ।”
यह बयान सुनते ही कई पुरुष defensive हो जाते हैं। और यहीं से शुरू होती है असली समस्या।
🔥 ‘Not All Men’ — एक वाक्य, सौ गलतफहमियां
थैरेपिस्ट के मुताबिक, अगर कोई महिला पितृसत्ता, जेंडर भेदभाव या पुरुष-प्रधान सोच की बात कर रही है और जवाब में पुरुष कहता है—
“लेकिन सारे पुरुष ऐसे नहीं होते”,
तो वही पल रिश्ता फिसलने लगता है।
यह लाइन सुनने में भले ही तर्कसंगत लगे, लेकिन भावनात्मक स्तर पर यह महिला के अनुभव को नकारने जैसा होता है।
यह कहना ऐसा है जैसे किसी के दर्द पर तर्क थोप देना।
🧠 थैरेपिस्ट क्या समझाना चाहती हैं?
थैरेपिस्ट का साफ कहना है—
यह बहस व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सिस्टम की है।
पितृसत्ता किसी एक पुरुष का नाम नहीं है।
यह सदियों पुरानी सोच है—
जहां शक्ति, निर्णय और आज़ादी का पलड़ा एक तरफ झुका रहा।
जब महिला अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करती है, तो वह अपने जीवन के अनुभव, डर, गुस्से और थकान की बात कर रही होती है।
और उस वक्त “Not All Men” कहना, बातचीत को समझ से हटाकर बहस बना देता है।
💬 आज की महिलाओं का गुस्सा कहां से आता है?
आज की औरतें पहले से ज़्यादा पढ़ी-लिखी हैं, जागरूक हैं और सवाल पूछती हैं।
उन्होंने देखा है—
दफ़्तर में बराबर काम, लेकिन कम सैलरी
घर में जिम्मेदारियां बराबर, लेकिन अधिकार कम
आज़ादी मांगी तो “किरदार” पर सवाल
चुप रहीं तो “कमज़ोर” का ठप्पा
यह गुस्सा किसी एक रिश्ते से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से उपजा है।
🧍♂️ पुरुषों के लिए ‘सर्वाइवल गाइड’ क्या कहती है?
थैरेपिस्ट के मुताबिक, अगर आप ऐसी महिला को डेट कर रहे हैं—
✔️ पहले सुनिए, जवाब बाद में दीजिए
✔️ हर बात को अपने ऊपर मत लीजिए
✔️ डिफेंस मोड में जाने से बचिए
✔️ बहस जीतने से ज़्यादा समझना ज़रूरी है
✔️ सिस्टम और व्यक्ति के फर्क को समझिए
रिश्ता तर्क से नहीं, संवेदना से चलता है।
⚠️ क्यों पुरुषों को लगता है कि उन पर हमला हो रहा है?
कई पुरुषों के लिए पितृसत्ता शब्द ही आरोप जैसा लगता है।
उन्हें लगता है कि—
“मैंने क्या गलत किया?”
“मुझे क्यों दोषी ठहराया जा रहा है?”
लेकिन थैरेपिस्ट कहती हैं—
यह दोष नहीं, ज़िम्मेदारी की बात है।
अगर आप सिस्टम का हिस्सा हैं, तो बदलाव में भी आपकी भूमिका है।

🌍 सोशल मीडिया पर बंटा हुआ रिएक्शन
जहां कुछ लोगों ने थैरेपिस्ट की सलाह को ज़रूरी और समयानुकूल बताया,
वहीं कई पुरुषों ने इसे “पुरुष-विरोधी” कहकर खारिज कर दिया।
कुछ यूज़र्स बोले—
“अब अपनी बात भी न रखें?”
तो कुछ ने लिखा—
“अगर सुनना भी नहीं आता, तो डेट क्यों कर रहे हो?”
❤️ क्या ऐसे रिश्ते चल सकते हैं?
सच कड़वा है—
हर रिश्ता नहीं चल पाता।
अगर विचारधाराएं बिल्कुल उलट हों,
अगर सुनने की जगह सिर्फ बचाव हो,
तो प्यार भी थक जाता है।
लेकिन जहां सम्मान, संवाद और समझ है—
वहां फर्क के बावजूद रिश्ता सांस ले सकता है।
✍️ आख़िरी बात—सीधी और साफ
पितृसत्ता से नफरत करने वाली महिला को डेट करना कोई “मिशन” नहीं है।
यह एक इंसान को समझने की कोशिश है—
उसकी लड़ाई, उसका गुस्सा, उसकी उम्मीद।
और हां,
अगर अगली बार ज़ुबान पर आए—“Not All Men”
तो एक पल रुकिए।
शायद चुप रहना ही सबसे समझदारी भरा जवाब हो।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
देखिए सुष्मिता सेन...
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