विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से शुरुआती कारोबार में धड़ाम हुआ Sensex और Nifty
- byAman Prajapat
- 30 December, 2025
भारतीय शेयर बाजार की सुबह एक बार फिर भारी मन से हुई। जैसे मंदिर की घंटी बजने से पहले ही हवा में उदासी तैर रही हो। Sensex और Nifty ने शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ दिन की शुरुआत की, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वही पुराना मगर असरदार फैक्टर — विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली।
बाजार खुलते ही दबाव में दिखे प्रमुख सूचकांक
शेयर बाजार के खुलते ही Sensex लाल निशान में फिसल गया, वहीं Nifty भी जरूरी सपोर्ट लेवल से नीचे जाता हुआ नजर आया। बैंकिंग, आईटी और मेटल शेयरों में खास तौर पर दबाव दिखा। ऐसा लगा मानो बाजार कह रहा हो — “भाई, अभी भरोसा मत रखो।”
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी सबसे बड़ी वजह
बीते कई सत्रों से विदेशी फंड लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। ग्लोबल अनिश्चितता, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख, डॉलर की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल टेंशन — सब मिलकर विदेशी निवेशकों को रिस्क से दूर रहने पर मजबूर कर रहे हैं।
पुराने खिलाड़ी जानते हैं —
जब FII बेचते हैं, तो बाजार सांस रोक लेता है।
घरेलू निवेशक दे रहे हैं सहारा, लेकिन काफी नहीं
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के सामने उनका सपोर्ट फिलहाल कमजोर पड़ता दिख रहा है। SIP, म्यूचुअल फंड और रिटेल इन्वेस्टर्स बाजार में टिके हुए हैं, पर सेंटिमेंट अभी भी डगमगाया हुआ है।
सेक्टर-वाइज प्रदर्शन
बैंकिंग सेक्टर: प्राइवेट बैंकों में मुनाफावसूली
आईटी शेयर: डॉलर मजबूत होने के बावजूद दबाव
मेटल सेक्टर: वैश्विक मांग को लेकर चिंता
ऑटो और FMCG: सीमित गिरावट, थोड़ा संभलाव
कुछ डिफेंसिव स्टॉक्स ने जरूर राहत दी, लेकिन कुल मिलाकर माहौल भारी ही रहा।
ग्लोबल संकेतों का असर
एशियाई बाजारों में कमजोरी, अमेरिकी फ्यूचर्स में सुस्ती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव — इन सबका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा। निवेशक फिलहाल रिस्क-ऑफ मोड में हैं।

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो जब तक
विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं थमती
ग्लोबल संकेत स्थिर नहीं होते
ब्याज दरों को लेकर स्पष्टता नहीं आती
तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या सीख?
पुरानी कहावत है —
“बाजार गिरता है तो डर नहीं, समझ चाहिए।”
लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह समय घबराने का नहीं, बल्कि क्वालिटी स्टॉक्स पर नजर रखने का है। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए और स्टॉप-लॉस के साथ चलना चाहिए।
आगे का आउटलुक
आने वाले सत्रों में बाजार की चाल पूरी तरह
विदेशी निवेशकों की गतिविधि
अमेरिकी आर्थिक आंकड़े
वैश्विक बाजारों के रुझान
पर निर्भर करेगी। अगर FII की बिकवाली थमती है, तो बाजार में रिकवरी की सांस दिख सकती है। वरना फिलहाल संयम ही सबसे बड़ा हथियार है।
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