डॉलर के सामने रुपया फिर लुढ़का: शुरुआती कारोबार में 23 पैसे टूटकर 89.94 पर पहुंचा
- byAman Prajapat
- 26 December, 2025
सुबह का वक्त था, बाजार अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था, लेकिन विदेशी मुद्रा बाजार ने दिन की टोन सेट कर दी। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 23 पैसे की तेज गिरावट के साथ 89.94 के स्तर पर पहुंच गया।
ये कोई छोटी खबर नहीं है। रुपया जब भी लड़खड़ाता है, उसका असर सिर्फ स्क्रीन पर चमकते नंबरों तक सीमित नहीं रहता — उसकी गूंज पेट्रोल पंप से लेकर किराने की दुकान तक सुनाई देती है।
💱 क्या हुआ आज बाजार में?
फॉरेक्स मार्केट में जैसे ही कारोबार शुरू हुआ, डॉलर ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। नतीजा साफ था — रुपया दबाव में आ गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 89.71 पर खुला और कुछ ही देर में 89.94 तक फिसल गया।
यह गिरावट ऐसे समय आई है जब:
वैश्विक बाजारों में डॉलर मजबूत बना हुआ है
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर हैं
कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल देखा जा रहा है
🌍 डॉलर इतना ताकतवर क्यों हो रहा है?
सच कड़वा है, लेकिन साफ है — डॉलर इस वक्त दुनिया की सबसे सुरक्षित मुद्रा बना हुआ है।
अमेरिका में:
ब्याज दरें ऊंची हैं
आर्थिक आंकड़े अपेक्षा से बेहतर हैं
फेडरल रिजर्व की सख्त नीति जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं
इन सबका सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ता है, और रुपया भी इससे अछूता नहीं।
🛢️ कच्चा तेल बना बड़ा विलेन
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है:
डॉलर की मांग बढ़ती है
आयात बिल बढ़ता है
और रुपया दबाव में आ जाता है
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हालिया तेजी ने रुपये की कमर पर सीधा वार किया है।
📉 विदेशी निवेशकों की चाल
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी इस कहानी का अहम हिस्सा हैं।
हाल के सत्रों में:
शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी
सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव
डॉलर में शिफ्ट
इन सबने रुपये की कमजोरी को और गहरा किया।
🏦 RBI की भूमिका पर नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है। हालांकि अभी तक बाजार में सीधा हस्तक्षेप देखने को नहीं मिला, लेकिन जानकार मानते हैं कि:
अगर गिरावट तेज होती है
या अस्थिरता बढ़ती है
तो RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए दखल दे सकता है।
📊 आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
यह सवाल सबसे जरूरी है।
रुपये की कमजोरी का असर:
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर
मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आयातित सामान पर
विदेश यात्रा और पढ़ाई पर
महंगाई की दर पर
सीधे शब्दों में कहें तो, जब रुपया गिरता है, तो खर्च बढ़ता है।
🔮 आगे क्या?
बाजार के जानकारों का मानना है कि निकट भविष्य में रुपया:
89.50 से 90.20 के दायरे में रह सकता है
डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतें दिशा तय करेंगी
अमेरिकी आंकड़े और फेड के बयान बेहद अहम होंगे
अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपये के लिए राह आसान नहीं है।
🧠 सीधी बात
ये सिर्फ एक दिन की गिरावट नहीं है, ये उस बड़ी तस्वीर का हिस्सा है जिसमें वैश्विक ताकतें, नीतियां और बाजार का मूड शामिल है।
पुराने जमाने में कहा जाता था — मुद्रा की सेहत देश की नब्ज होती है। आज भी बात वही है, बस स्पीड तेज हो गई है।
रुपया दबाव में है, और फिलहाल राहत की कहानी लिखी नहीं गई है।
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