2026 की शुरुआत में रुपये की फिसलन: शुरुआती कारोबार में 11 पैसे टूटकर 89.99 प्रति डॉलर पर पहुंचा रुपया
- byAman Prajapat
- 01 January, 2026
नए साल 2026 की सुबह भारतीय मुद्रा बाजार के लिए कोई जश्न लेकर नहीं आई। जहां एक ओर शेयर बाजारों में सतर्कता का माहौल दिखा, वहीं दूसरी ओर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में नजर आया। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे टूटकर 89.99 प्रति डॉलर पर आ गया। यह गिरावट साफ संकेत देती है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और डॉलर की मजबूती अभी भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर भारी पड़ रही हैं।
📉 कमजोर शुरुआत, मजबूत डॉलर
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का सीधा असर रुपये पर पड़ा। जैसे ही 2026 का पहला कारोबारी दिन शुरू हुआ, डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव साफ दिखने लगा। निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की ओर झुकते नजर आए, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं में बिकवाली बढ़ी।
🌍 वैश्विक संकेतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी रुपये की चाल को प्रभावित किया। कच्चा तेल भारत के लिए बड़ा आयात खर्च है और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी सीधे तौर पर रुपये पर दबाव डालती है।
🏦 RBI की भूमिका पर नजर
हालांकि बाजार पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पैनी नजर बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि अगर रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है तो केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप कर सकता है। RBI का उद्देश्य रुपये को किसी एक स्तर पर बांधना नहीं, बल्कि अत्यधिक अस्थिरता को रोकना होता है।
📊 विदेशी निवेश और बाजार की धारणा
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी रुपये की चाल में अहम भूमिका निभा रही हैं। साल के अंत और नए साल की शुरुआत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग के चलते उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव देखा गया, जिसका असर रुपये पर पड़ा।
🛢️ कच्चा तेल और व्यापार घाटा
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हल्की मजबूती ने भी चिंता बढ़ाई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने पर व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपये पर दबाव आता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये की कमजोरी और गहराई पकड़ सकती है।
📈 आगे का आउटलुक: संभलकर कदम
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और RBI की रणनीति पर निर्भर करेगी। अगर डॉलर में मजबूती बनी रहती है तो रुपये में सीमित दायरे में कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक बुनियाद और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार रुपये को बड़े झटकों से बचाने में मदद कर सकते हैं।

🧠 निवेशकों के लिए क्या मायने
निवेशकों और आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों के लिए रुपये की यह चाल बेहद अहम है। कमजोर रुपया जहां निर्यातकों के लिए राहत ला सकता है, वहीं आयातकों के लिए लागत बढ़ा सकता है। ऐसे में मुद्रा बाजार पर नजर बनाए रखना 2026 की शुरुआत में बेहद जरूरी हो गया है।
✍️ निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत भारतीय रुपये के लिए चुनौतीपूर्ण रही। शुरुआती कारोबार में 11 पैसे की गिरावट भले ही छोटी लगे, लेकिन यह वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतों की बड़ी कहानी बयां करती है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि रुपया इस दबाव से कैसे उबरता है या फिर नई परीक्षाओं का सामना करता है।
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