RGHS पर गहमागहमी: निजी अस्पतालों ने इलाज रोका, मरीजों की परेशानी बढ़ी
- bypari rathore
- 21 April, 2026
RGHS विवाद गहराया: निजी अस्पतालों ने रोका इलाज, मरीजों की मुश्किलें बढ़ीं
राजस्थान में Rajasthan Government Health Scheme (RGHS) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के कई निजी अस्पतालों ने इस योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद या सीमित कर दिया है, जिससे हजारों लाभार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बुजुर्ग, सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स, जो इस योजना पर निर्भर हैं, सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कई अस्पतालों ने नए RGHS मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी है, जबकि कुछ जगहों पर पहले से भर्ती मरीजों के इलाज में भी दिक्कतें आ रही हैं। मरीजों और उनके परिजनों को या तो अस्पताल बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है या फिर निजी तौर पर खर्च उठाकर इलाज कराना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
इस पूरे मामले में डॉक्टरों के संगठन Indian Medical Association (IMA) ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। IMA का कहना है कि RGHS के तहत अस्पतालों के क्लेम का भुगतान लंबे समय से लंबित है। कई अस्पतालों के करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। IMA के अनुसार, बार-बार आग्रह करने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण दवाइयों की खरीद, स्टाफ वेतन और अन्य संचालन खर्चों को संभालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में उन्हें मजबूरी में RGHS के तहत सेवाएं सीमित करनी पड़ी हैं। कुछ अस्पतालों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे पूरी तरह से इस योजना से बाहर निकलने पर भी विचार कर सकते हैं।
वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि स्थिति को लेकर वह गंभीर है और भुगतान प्रक्रिया को तेज करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित क्लेम्स का जल्द निपटारा किया जाए। अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सुधार किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या न आए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अगर जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ सकता है। RGHS जैसी योजनाएं आम लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं, लेकिन अस्पतालों और सरकार के बीच तालमेल की कमी से इसका फायदा सीधे तौर पर मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

फिलहाल, इस खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशान आम लोग हैं, जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। मरीजों और उनके परिजनों की मांग है कि सरकार और अस्पताल जल्द से जल्द समाधान निकालें, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सामान्य हो सकें।
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