पश्चिमी राजस्थान में बड़े सैन्य अभ्यास से बढ़ी हलचल, जैसलमेर-जोधपुर समेत कई इलाकों पर नजर
- bySanjay
- 22 September, 2026
पश्चिमी राजस्थान में बड़े सैन्य अभ्यास से बढ़ी हलचल, जैसलमेर-जोधपुर समेत कई इलाकों पर नजर

जयपुर/जोधपुर: पश्चिमी राजस्थान आने वाले दिनों में बड़े सैन्य अभ्यासों के कारण देश-दुनिया की नजर में रहने वाला है। भारतीय वायुसेना ने 21 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 के बीच पश्चिमी राजस्थान के बड़े हिस्से में हवाई गतिविधियों के लिए एयरस्पेस आरक्षित किया है। इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जोधपुर और बीकानेर के नाल क्षेत्र के आसपास का इलाका शामिल बताया गया है।
आसमान में दिखेगी सैन्य गतिविधियों की हलचल
इन सैन्य गतिविधियों के चलते पश्चिमी राजस्थान का आसमान सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सक्रिय रह सकता है। इस अवधि में अलग-अलग सैन्य अभ्यासों के कारण निर्धारित क्षेत्रों में हवाई गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी।
जोधपुर में भारत और जापान की वायुसेनाओं का ‘वीर गार्जियन 26’ अभ्यास 11 से 22 सितंबर तक आयोजित किया गया, जिसमें जापानी F-2A लड़ाकू विमानों की भारत में पहली भागीदारी भी रिपोर्ट की गई है।
इसके बाद 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय ‘तरंग शक्ति 2026’ अभ्यास आयोजित होने की जानकारी सामने आई है। इसमें करीब 40 देशों की भागीदारी बताई गई है।
पर्यटन पर क्या असर पड़ेगा?
जैसलमेर, जोधपुर और आसपास के रेगिस्तानी इलाकों में पर्यटन गतिविधियां राजस्थान की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सैन्य अभ्यास के दौरान यदि किसी विशेष क्षेत्र में प्रशासन या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अस्थायी प्रतिबंध अथवा आवाजाही संबंधी निर्देश जारी किए जाते हैं, तो स्थानीय पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, अभी उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पूरे पश्चिमी राजस्थान में पर्यटन बंद होने की कोई जानकारी नहीं है। इसलिए सैन्य अभ्यास को सीधे तौर पर पर्यटन में गिरावट से जोड़ना उचित नहीं होगा।
स्थानीय स्तर पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किन क्षेत्रों में अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था या हवाई गतिविधियों से संबंधित प्रतिबंध लागू किए जाते हैं।
स्थानीय कारोबार पर भी रहेगी नजर
जैसलमेर और जोधपुर जैसे पर्यटन शहरों में होटल, रेस्तरां, टैक्सी, गाइड और हस्तशिल्प कारोबार से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर भी इस दौरान नजर रहेगी।
दूसरी तरफ बड़े सैन्य आयोजनों से इन शहरों में सुरक्षा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। सैन्य अभ्यासों में आने वाले जवानों, अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मियों की आवाजाही से स्थानीय सेवाओं की मांग में भी बदलाव हो सकता है।
पहले ही पोखरण में दिखी सैन्य गतिविधि
सितंबर में जैसलमेर के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना का Dronathon-2026 भी आयोजित हुआ था। 14 से 16 सितंबर तक हुए इस आयोजन में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों के प्रदर्शन और परीक्षण पर ध्यान दिया गया। PIB के अनुसार इसका उद्देश्य निगरानी, टोही, स्वायत्त संचालन, स्वार्म तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे क्षेत्रों में तकनीकी क्षमताओं का मूल्यांकन करना था।
इसी तरह राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत-अमेरिका का Yudh Abhyas 2026 अभ्यास भी चल रहा है। इसमें दोनों देशों के सैनिक संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
पश्चिमी राजस्थान क्यों महत्वपूर्ण?
पश्चिमी राजस्थान का बड़ा हिस्सा भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब है। रेगिस्तानी भूगोल और विशाल प्रशिक्षण क्षेत्रों के कारण यह इलाका भारतीय सैन्य प्रशिक्षण और अभ्यासों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
आने वाले दिनों में कई अभ्यासों के चलते जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, फलोदी और बीकानेर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां चर्चा में बनी रह सकती हैं। हालांकि, आम लोगों और पर्यटकों के लिए वास्तविक प्रभाव स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले निर्देशों पर निर्भर करेगा।
Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.
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