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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में दवा संकट पर सवाल, ऑडिट में 131 अमानक बैच का खुलासा

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में दवा संकट पर सवाल, ऑडिट में 131 अमानक बैच का खुलासा

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में दवा संकट पर बड़ा सवाल: ऑडिट में 131 अमानक बैच का खुलासा, मरीजों को दवाएं देने की व्यवस्था पर उठे सवाल

राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता जांच को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। 13 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) में दवा खरीद, टेंडर और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी खामियों का उल्लेख स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दवा खरीद के अनुबंध समय पर नहीं होने से सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति प्रभावित हुई और कुछ अस्पतालों को स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदनी पड़ीं।

 

ऑडिट रिपोर्ट में क्या सामने आया?

रिपोर्ट के मुताबिक, दवाओं की खरीद के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट तय करने में देरी हुई। इसके कारण अस्पतालों में नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई और कुछ स्वास्थ्य संस्थानों को स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदनी पड़ीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाओं की गुणवत्ता जांच से जुड़े नियमों का पर्याप्त पालन नही

सबसे गंभीर बिंदु गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं के 131 बैच ऐसे पाए गए जिन्हें गुणवत्ता नियंत्रण इकाई पहले ही अमानक घोषित कर चुकी थी, फिर भी उनका वितरण और मरीजों में उपयोग होने की बात सामने आई। यह ऑडिट में दर्ज निष्कर्ष है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि हर सरकारी अस्पताल में ऐसी दवाएं दी गईं या प्रत्येक मरीज को नुकसान हुआ।

दवाओं की खरीद में देरी से कैसे बढ़ सकती है मरीजों की परेशानी?

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की नियमित उपलब्धता के लिए खरीद प्रक्रिया, भंडारण और गुणवत्ता जांच का समय पर पूरा होना जरूरी है। यदि किसी दवा का स्टॉक खत्म हो जाए या उसकी आपूर्ति में देरी हो, तो मरीज को निर्धारित दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं मिल सकती। ऐसी स्थिति में मरीज और उसके परिवार को दूसरे अस्पताल या बाहर की फार्मेसी पर निर्भर होना पड़ सकता है।

राजस्थान में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता से जुड़ी चिंताएं पहले भी सरकारी ऑडिट में दर्ज हुई थीं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित निष्पादन लेखापरीक्षा में दवाओं की कमी, मांग से कम आपूर्ति, खरीद अनुबंधों में देरी और गुणवत्ता जांच रिपोर्ट मिलने में विलंब जैसी समस्याएं दर्ज की गई थीं। यह पुरानी लेखापरीक्षा है, इसलिए इसे 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट से अलग समझना चाहिए

दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी की जिम्मेदारी क्यों अहम?

दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केवल खरीद प्रक्रिया पूरी करना पर्याप्त नहीं है। दवाओं के नमूनों की समय पर जांच, स्टॉक का सही रिकॉर्ड, अमानक घोषित बैचों की पहचान और उनके वितरण पर रोक लगाने की व्यवस्था भी जरूरी है।

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर 6 अक्टूबर 2026 को 16 से 30 सितंबर की अवधि में अमानक घोषित दवाओं से संबंधित सूचना जारी की थी। इससे स्पष्ट है कि दवा गुणवत्ता की निगरानी एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।

 

अब इस मामले में अहम सवाल यह हैं कि ऑडिट में दर्ज अनियमितताओं पर क्या कार्रवाई हुई, अमानक बैचों के वितरण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए और अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या सुधार किए जा रहे हैं। इन बिंदुओं पर संबंधित विभाग की ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया और कार्रवाई का विवरण भी सामने आना जरूरी है।

मरीजों के हित में क्या जरूरी है?

अस्पतालों में जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जाए।

गुणवत्ता जांच में विफल दवाओं को वितरण से रोका जाए।

खरीद और आपूर्ति में देरी के लिए जवाबदेही तय की जाए।

अस्पतालों और दवा भंडारों के स्टॉक की नियमित जांच हो।

ऑडिट में सामने आई कमियों पर की गई कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।

दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता सीधे मरीजों के उपचार से जुड़ी हैं। इसलिए इस मामले में केवल अनियमितताओं की पहचान ही नहीं, बल्कि सुधारात्मक कदमों और उनकी प्रगति की निगरानी भी महत्वपूर्ण है।


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