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राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की गुणवत्ता रैंकिंग में सीकर अव्वल, हनुमानगढ़ और चूरू दूसरे व तीसरे स्थान पर

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की गुणवत्ता रैंकिंग में सीकर अव्वल, हनुमानगढ़ और चूरू दूसरे व तीसरे स्थान पर

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा जारी नवीनतम गुणवत्ता-आधारित रैंकिंग में सीकर जिले ने पहला स्थान प्राप्त कर राज्य में अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता साबित की है। इस सूची में हनुमानगढ़ दूसरे और चूरू तीसरे स्थान पर रहे। यह रैंकिंग राज्य के विभिन्न जिलों के सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन, शिक्षण गुणवत्ता, परिणाम, आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक नवाचारों के आधार पर तैयार की गई है।

गुणवत्ता-आधारित मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणामों पर निर्भर रहना नहीं है, बल्कि संपूर्ण शैक्षणिक वातावरण का आकलन करना है। इसमें विद्यार्थियों की उपस्थिति, बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम, शिक्षकों की उपलब्धता, डिजिटल शिक्षा संसाधनों का उपयोग, सह-शैक्षणिक गतिविधियाँ और विद्यालयों की आधारभूत संरचना जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है। इसी समग्र मूल्यांकन के आधार पर जिलों की रैंकिंग निर्धारित की जाती है।

सीकर का शीर्ष स्थान हासिल करना इस बात का संकेत है कि जिले ने शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार और नवाचार किए हैं। यहाँ के स्कूलों में डिजिटल लर्निंग, नियमित मॉनिटरिंग और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। शिक्षकों और प्रशासन के समन्वित प्रयासों ने शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हनुमानगढ़ और चूरू का क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर आना भी उल्लेखनीय उपलब्धि है। इन जिलों ने भी शिक्षा सुधार कार्यक्रमों, बेहतर परीक्षा परिणामों और स्कूल प्रबंधन की प्रभावी रणनीतियों के माध्यम से अपना प्रदर्शन सुधारा है। यह प्रतिस्पर्धात्मक माहौल अन्य जिलों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा।

राजस्थान सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार के प्रयास कर रही है। नई शिक्षा नीतियों, डिजिटल संसाधनों के विस्तार, और निरंतर करियर मार्गदर्शन जैसी पहलें स्कूल शिक्षा प्रणाली को सशक्त बना रही हैं। गुणवत्ता रैंकिंग प्रणाली पारदर्शिता को बढ़ावा देती है और जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा स्थापित करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी रैंकिंग न केवल प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करती है, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के लिए भी उपयोगी जानकारी प्रदान करती है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किन जिलों ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

सीकर, हनुमानगढ़ और चूरू की सफलता यह दर्शाती है कि सही रणनीति, प्रभावी नेतृत्व और निरंतर निगरानी से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को उल्लेखनीय रूप से सुधारा जा सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य जिले इस प्रतिस्पर्धा में किस प्रकार आगे बढ़ते हैं और राज्य की समग्र शिक्षा गुणवत्ता को और मजबूत बनाते हैं।

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राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की गुणवत्ता रैंकिंग में सीकर अव्वल, हनुमानगढ़ और चूरू दूसरे व तीसरे स्थान पर

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