पीवी सिंधु की खिताबी उम्मीदों पर फिरा पानी, फ्रेंच ओपन फाइनल में एन से यंग ने पलटा मैच; पहला गेम जीतने के बाद भी हारीं भारतीय स्टार
- bySanjay
- 25 October, 2026
पीवी सिंधु की खिताबी उम्मीदों पर फिरा पानी, फ्रेंच ओपन फाइनल में एन से यंग ने पलटा मैच

पेरिस, 25 अक्टूबर 2026। भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी पीवी सिंधु फ्रेंच ओपन 2026 का खिताब जीतने से चूक गईं। महिला एकल के फाइनल में दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर-1 खिलाड़ी एन से यंग ने शानदार वापसी करते हुए सिंधु को तीन गेमों के मुकाबले में हरा दिया। सिंधु ने मैच की शुरुआत दमदार अंदाज में की और पहला गेम 21-16 से अपने नाम कर खिताब की उम्मीदें जगा दीं। हालांकि, इसके बाद मुकाबले का रुख बदल गया और एन से यंग ने अपनी गति, सटीक शॉट्स तथा लगातार दबाव बनाने की क्षमता के दम पर अगले दोनों गेम जीत लिए।
मैच का अंतिम स्कोर 16-21, 21-11 और 21-12 रहा। मुकाबला लगभग 61 मिनट तक चला। इस हार के साथ सिंधु को उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा, जबकि एन से यंग ने फ्रेंच ओपन में लगातार तीसरी बार महिला एकल का खिताब जीतने की उपलब्धि हासिल की।
पहले गेम में सिंधु का दबदबा, खेल से दिखाया आत्मविश्वास
फाइनल की शुरुआत में पीवी सिंधु ने जिस तरह का खेल दिखाया, उससे भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ गई थीं। सामने विश्व की शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल एन से यंग थीं, लेकिन सिंधु ने शुरुआत से ही उन्हें आसानी से अंक हासिल नहीं करने दिए। भारतीय खिलाड़ी ने कोर्ट पर अपनी पहुंच, नेट के पास नियंत्रण और आक्रामक शॉट्स का प्रभावी इस्तेमाल किया।
पहले गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। सिंधु ने शुरुआती दौर में अपनी लय बनाए रखी और स्कोर बराबरी के आसपास रहने के बाद महत्वपूर्ण अंकों पर बढ़त हासिल की। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी को लगातार चुनौती देते हुए पहला गेम 21-16 से जीत लिया।
यह शुरुआत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि एन से यंग के खिलाफ सिंधु का पिछला रिकॉर्ड उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा था। पहले गेम में जीत से यह संकेत मिला कि भारतीय खिलाड़ी इस बार मुकाबले में अपनी रणनीति और अनुभव का बेहतर इस्तेमाल कर रही थीं। हालांकि, बैडमिंटन में एक गेम जीतना पूरे मैच की जीत की गारंटी नहीं होता और आगे के दोनों गेमों में यही बात सामने आई।
दूसरे गेम में बदला मुकाबले का रुख
पहला गेम गंवाने के बाद एन से यंग ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने रैलियों पर अधिक नियंत्रण बनाना शुरू किया और सिंधु को लगातार कोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में खेलने के लिए मजबूर किया। उनकी तेज मूवमेंट और शॉट्स की सटीकता ने भारतीय खिलाड़ी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी।
दूसरे गेम में एन से यंग ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की। सिंधु ने वापसी की कोशिश की, लेकिन कोरियाई खिलाड़ी ने महत्वपूर्ण मौकों पर अंक हासिल कर अंतर बढ़ा लिया। नतीजा यह रहा कि सिंधु दूसरा गेम 11-21 से हार गईं और मुकाबला निर्णायक तीसरे गेम तक पहुंच गया।
इस गेम ने फाइनल की दिशा बदल दी। जहां पहले गेम में सिंधु अपनी योजना के अनुसार खेलती दिखाई दी थीं, वहीं दूसरे गेम में एन से यंग ने गति और निरंतरता के जरिए मुकाबले पर नियंत्रण हासिल कर लिया। <
निर्णायक गेम में सिंधु ने बनाई बढ़त, लेकिन बरकरार नहीं रख सकीं
तीसरे गेम में मुकाबला फिर रोमांचक हुआ। सिंधु ने हार नहीं मानी और शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन करते हुए 8-5 की बढ़त बना ली। इस स्थिति में भारतीय खिलाड़ी के पास मैच को अपने पक्ष में मोड़ने का अवसर था। लेकिन एन से यंग ने धैर्य बनाए रखा और लगातार अंक जुटाते हुए स्कोर बराबर कर दिया।
इसके बाद दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने बढ़त हासिल कर ली। सिंधु ने कुछ रैलियों में अच्छी चुनौती पेश की, लेकिन एन से यंग ने शॉट्स की गुणवत्ता और कोर्ट कवरेज के दम पर दबाव बनाए रखा। जैसे-जैसे निर्णायक गेम आगे बढ़ा, कोरियाई खिलाड़ी की निरंतरता निर्णायक साबित हुई।
अंततः एन से यंग ने तीसरा गेम 21-12 से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। सिंधु ने फाइनल में संघर्ष जरूर किया, लेकिन शुरुआती बढ़त को खिताबी जीत में बदलने में सफल नहीं हो सकीं। <
एन से यंग के खिलाफ चुनौती अब भी कायम
इस हार के बाद एन से यंग के खिलाफ सिंधु का आमने-सामने का रिकॉर्ड 0-11 हो गया। यानी दोनों खिलाड़ियों के बीच अब तक हुए 11 मुकाबलों में दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने जीत दर्ज की है।
हालांकि, इस फाइनल में सिंधु का पहला गेम जीतना उनके प्रदर्शन का उल्लेखनीय पहलू रहा। उन्होंने शुरुआत में विश्व नंबर-1 खिलाड़ी को दबाव में रखा और यह दिखाया कि सही रणनीति तथा लय के साथ वह शीर्ष स्तर की प्रतिद्वंद्वी को चुनौती दे सकती हैं। लेकिन पूरे मैच में उसी स्तर का नियंत्रण बनाए रखना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ।
एन से यंग की खासियत यह रही कि उन्होंने पहला गेम गंवाने के बाद भी घबराहट नहीं दिखाई। उन्होंने अपने खेल में सुधार किया, लंबे मुकाबलों में निरंतरता रखी और निर्णायक क्षणों पर अंक हासिल किए। फाइनल में यही अंतर दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बीच निर्णायक बना।
सिंधु के लिए फाइनल तक पहुंचना क्यों अहम रहा?
खिताब नहीं जीत पाने के बावजूद फ्रेंच ओपन 2026 में सिंधु का अभियान कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने पहली बार इस टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में जगह बनाई। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने जापान की हिना अकेची को तीन गेमों के मुकाबले में हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया था।
सिंधु के लिए यह साल भी उतार-चढ़ाव के बीच वापसी का अवसर रहा है। जुलाई में उन्होंने जापान ओपन का खिताब जीता था, जो दिसंबर 2024 के बाद उनका पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब था। फ्रेंच ओपन के फाइनल तक पहुंचना उनके लिए इस प्रदर्शन को आगे बढ़ाने का एक और संकेत रहा, भले ही वह इस बार ट्रॉफी नहीं उठा सकीं।
फ्रेंच ओपन का यह फाइनल सिंधु के लिए एक बड़ी उपलब्धि के करीब पहुंचकर रुक जाने वाला मुकाबला रहा। उन्होंने शुरुआत में शानदार खेल दिखाया, लेकिन एन से यंग ने दूसरे और तीसरे गेम में बेहतर नियंत्रण कायम कर लिया। भारतीय खिलाड़ी की नजर अब आगामी टूर्नामेंटों में अपनी लय बरकरार रखने और शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ जीत हासिल करने पर होगी।
निष्कर्ष: पीवी सिंधु फ्रेंच ओपन 2026 का खिताब नहीं जीत सकीं, लेकिन फाइनल तक का उनका सफर भारतीय बैडमिंटन के लिए सकारात्मक रहा। पहले गेम की जीत ने उनकी क्षमता दिखाई, जबकि एन से यंग की वापसी ने साबित किया कि शीर्ष स्तर पर पूरे मैच के दौरान निरंतरता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है
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**Nitish Rana Backs...
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