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बच्चों के जंक फूड पर लग सकता है ब्रेक! पिज्जा-बर्गर को लेकर नया प्लान

बच्चों के जंक फूड पर लग सकता है ब्रेक! पिज्जा-बर्गर को लेकर नया प्लान

पिज्जा-बर्गर और फास्ट फूड पर बढ़ी चिंता, स्कूलों के आसपास HFSS फूड पर लग सकती है रोक

पिज्जा, बर्गर, फ्राइड स्नैक्स और ज्यादा नमक-चीनी वाले फास्ट फूड को लेकर भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी चर्चा तेज हो गई है। खासतौर पर बच्चों और स्कूल जाने वाले छात्रों के खान-पान को लेकर सरकार और खाद्य नियामक स्तर पर नए नियमों पर काम किया जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक स्कूलों के आसपास High Fat, Salt and Sugar यानी HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री को सीमित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

स्कूलों के आसपास फास्ट फूड पर नजर

रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में स्कूलों के आसपास HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री को नियंत्रित करने का प्रावधान शामिल है। इसका उद्देश्य बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थों की आसान और लगातार उपलब्धता से दूर रखना है, जिनमें वसा, नमक या चीनी की मात्रा ज्यादा हो सकती है। रिपोर्टों में स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक के प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है। हालांकि यह प्रस्तावित नियम है और अंतिम रूप लागू होने से पहले नियामकीय प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

FSSAI की आधिकारिक अधिसूचना सूची में भी Food Safety and Standards (Safe Food and Balanced Diets for Children in School) Amendment Regulations, 2026 का ड्राफ्ट दर्ज है। इसमें ऐसे खाद्य उत्पादों की परिभाषा शामिल करने का प्रस्ताव है जिनमें अतिरिक्त वसा, अतिरिक्त चीनी या नमक की मात्रा अधिक है।

पिज्जा-बर्गर ही नहीं, पूरी डाइट पर ध्यान जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता केवल पिज्जा या बर्गर जैसे किसी एक खाद्य पदार्थ को लेकर नहीं है। असल मुद्दा ऐसे भोजन की बार-बार और ज्यादा मात्रा में खपत है, जिनमें नमक, फ्री शुगर, संतृप्त वसा और कैलोरी अधिक हो सकती है।

WHO के मुताबिक स्वस्थ आहार में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए, जबकि नमक, फ्री शुगर और अस्वास्थ्यकर वसा का सेवन सीमित रखना चाहिए।

ज्यादा नमक से बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर

WHO के अनुसार ज्यादा सोडियम यानी नमक का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ने से जुड़ा है और इससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। WHO वयस्कों के लिए रोजाना 2,000 मिलीग्राम से कम सोडियम, यानी 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है।

यही वजह है कि स्वास्थ्य नीतियों में केवल व्यक्तिगत खान-पान ही नहीं, बल्कि लोगों के आसपास उपलब्ध खाद्य विकल्पों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। WHO ने भी स्वस्थ भोजन के लिए ऐसे वातावरण बनाने पर जोर दिया है, जहां पौष्टिक विकल्प आसानी से उपलब्ध हों।

बच्चों के खान-पान पर क्यों है खास फोकस?

बचपन में खाने की आदतें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। स्कूलों के आसपास आसानी से मिलने वाले ज्यादा नमक, चीनी या वसा वाले स्नैक्स बच्चों के नियमित भोजन का हिस्सा बन सकते हैं। इसी वजह से स्कूलों और उनके आसपास के खाद्य वातावरण को लेकर नीतिगत चर्चा बढ़ रही है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पिज्जा या बर्गर को कभी-कभार खाने से किसी व्यक्ति को बीमारी हो जाएगी। स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण बात कुल डाइट, खाने की मात्रा, नियमितता और शारीरिक गतिविधि है।

अब आगे क्या होगा?

FSSAI का संबंधित प्रस्ताव अभी नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा है। आधिकारिक दस्तावेजों में इसे ड्राफ्ट संशोधन के रूप में दर्ज किया गया है, इसलिए इसे अंतिम नियम मानना सही नहीं होगा। आगे सार्वजनिक सुझाव और सरकार की प्रक्रिया के बाद इसके प्रावधानों में बदलाव भी संभव है।

फास्ट फूड को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच संदेश यही है कि बच्चों और परिवारों की डाइट में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए और ज्यादा नमक, चीनी तथा अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखा जाए।


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