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जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, फसल विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, फसल विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

मोतिहारी/लखीसराय। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए बिहार में जैविक, प्राकृतिक और विविधीकृत खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में मोतिहारी में ICAR के वैज्ञानिकों ने प्रगतिशील किसानों के खेतों का दौरा कर विभिन्न कृषि तकनीकों का जायजा लिया।

वैज्ञानिकों ने खेतों में वर्मी कंपोस्ट, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और बागवानी जैसी तकनीकों का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों को जोड़ने की सलाह दी। वैज्ञानिकों का कहना है कि फसल विविधीकरण से उत्पादन जोखिम कम करने के साथ किसानों की आमदनी के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

वहीं, लखीसराय के आदिवासी क्षेत्रों में हर्बल और औषधीय खेती को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। किसानों 

को अश्वगंधा, तुलसी, एलोवेरा, लेमनग्रास और सफेद मूसली जैसी उपयोगी औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ वैकल्पिक और अधिक मूल्य वाली फसलों से जोड़ना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की उम्मीद है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, बागवानी और औषधीय पौधों की खेती को बाजार से जोड़कर किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाया जा सकता है।


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