हिंदुस्तान में नया साल: अंग्रेज़ी न्यू ईयर या विक्रम संवत? जानिए क्या है सही
- bypari rathore
- 01 January, 2026
हिंदुस्तान में नया साल: अंग्रेज़ी या विक्रम संवत? एक जरूरी विमर्श
भारत में हर साल 1 जनवरी को अंग्रेज़ी न्यू ईयर बड़े उत्साह से मनाया जाता है। लेकिन इसी देश में एक प्राचीन, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक नववर्ष परंपरा भी है—विक्रम संवत, जो हिंदू पंचांग पर आधारित है। ऐसे में सवाल उठता है: हमें नया साल अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार मनाना चाहिए या अपने पंचांग के अनुसार?
विक्रम संवत भारत की हजारों साल पुरानी काल-गणना प्रणाली है, जो सूर्य, चंद्रमा, ऋतु परिवर्तन, कृषि चक्र और धार्मिक जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है। हमारे व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, नवरात्रि, रामनवमी जैसे पर्व इसी पंचांग के अनुसार आते हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला हिंदू नववर्ष प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक माना जाता है।
वहीं 1 जनवरी का अंग्रेज़ी नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है, जिसे भारत ने प्रशासनिक और वैश्विक सुविधा के लिए अपनाया है। यह व्यापार, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के लिए उपयोगी है, लेकिन इसका भारतीय संस्कृति या ऋतु चक्र से कोई सीधा संबंध नहीं है।
विशेषज्ञों और सांस्कृतिक विचारकों का मानना है कि यह मामला “एक को छोड़कर दूसरे को अपनाने” का नहीं है।
👉 व्यवहारिक जीवन में अंग्रेज़ी कैलेंडर जरूरी है,
👉 लेकिन सांस्कृतिक पहचान के लिए विक्रम संवत को अपनाना और मनाना भी उतना ही आवश्यक है।
आज चिंता की बात यह है कि नई पीढ़ी अपने पंचांग और परंपराओं से दूर होती जा रही है। अगर हम केवल विदेशी कैलेंडर को ही अपना सब कुछ मान लेंगे, तो धीरे-धीरे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कटते चले जाएँगे।
निष्कर्ष:
अंग्रेज़ी न्यू ईयर मनाना गलत नहीं है, लेकिन हिंदुस्तान को अपनी आत्मा से जुड़े विक्रम संवत नववर्ष को भी पूरे सम्मान के साथ मनाना चाहिए। अपनी परंपरा अपनाना पिछड़ापन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
🌿 जब हम अपना पंचांग समझेंगे, तभी अपनी संस्कृति को पूरी तरह जी पाएँगे।

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