कश्मीरी हिंदू परिवार में जन्मे जीवन ने संघर्ष से बनाई पहचान, कभी बने नारद मुनि तो कभी पर्दे के सबसे यादगार खलनायक
- bySanjay
- 24 October, 2026
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से अलग-अलग तरह के किरदारों को यादगार बना दिया। पर्दे पर कभी खलनायक बनकर दर्शकों के सामने चुनौती पेश करने वाले और कभी पौराणिक फिल्मों में देवर्षि नारद मुनि के रूप में नजर आने वाले अभिनेता जीवन भी ऐसे ही कलाकारों में शामिल थे। उनका असली नाम ओमकार नाथ धर था। कश्मीरी हिंदू परिवार में जन्मे जीवन ने उस दौर में फिल्मी दुनिया में कदम रखा, जब अभिनय को हर प्रतिष्ठित परिवार में स्वीकार नहीं किया जाता था। इसके बावजूद उन्होंने अपने जुनून और मेहनत से हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी पुराने दौर की फिल्मों के दर्शकों को याद hai

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24 भाई-बहनों वाले परिवार में हुआ था जन्म
अभिनेता जीवन का जन्म 24 अक्टूबर 1915 को श्रीनगर, कश्मीर में हुआ था। उनका परिवार संपन्न और प्रतिष्ठित कश्मीरी हिंदू परिवारों में गिना जाता था। उनके परिवार में कुल 24 भाई-बहन थे। उनके दादा के कश्मीर के प्रशासन में ऊंचे पद पर रहने का भी उल्लेख मिलता है। परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा के बावजूद जीवन का बचपन आसान नहीं रहा।
जीवन से जुड़ी जीवनियों के अनुसार, उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। बताया जाता है कि उनकी मां का निधन उनके जन्म के समय हो गया था और जब वह लगभग तीन वर्ष के थे, तब उनके पिता भी चल बसे। बचपन में माता-पिता का साथ छूटने के बाद उनके जीवन में कई चुनौतियां आईं। आगे चलकर उन्होंने अपनी पहचान परिवार की पृष्ठभूमि के बजाय अपने काम और अभिनय के दम पर बनाई।

अभिनय का सपना पूरा करने के लिए छोड़ दिया घर
जीवन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभिनय की दुनिया में प्रवेश करना था। उस समय फिल्मों में काम करना कई पारंपरिक और प्रतिष्ठित परिवारों में अच्छा नहीं माना जाता था। जीवन का मन मगर फिल्मों में लगता था और वह इसी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते थे।
बताया जाता है कि लगभग 18 वर्ष की उम्र में वह घर छोड़कर मुंबई पहुंच गए। उनके पास उस समय केवल 26 रुपये थे। आज के दौर में जब फिल्मी दुनिया में प्रवेश के लिए प्रशिक्षण, संपर्क और संसाधनों की चर्चा होती है, तब जीवन का यह शुरुआती सफर उनके संघर्ष की कहानी सामने रखता है।
मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत बड़े अभिनेता के रूप में पहचान नहीं मिली। उन्होंने मोहन सिन्हा के स्टूडियो में रिफ्लेक्टर से जुड़ा काम किया। इस काम के दौरान उन्हें फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखने और अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने का अवसर मिला। धीरे-धीरे उनके लिए फिल्मों में काम करने के रास्ते खुलने लगे।

'फैशनेबल इंडिया' से शुरू हुआ फिल्मी सफर
जीवन के अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म फैशनेबल इंडिया से मानी जाती है, जो 1935 में आई थी। शुरुआती दौर से ही उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाओं में अपनी क्षमता दिखाई। उनका फिल्मी सफर कई दशकों तक चला और वह हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल हो गए, जिन्होंने बड़ी संख्या में फिल्मों में काम किया।
जीवन की खासियत यह थी कि वह केवल एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रहे। पौराणिक फिल्मों में उनकी भूमिका अलग पहचान बनाती थी, जबकि सामाजिक और व्यावसायिक फिल्मों में उन्होंने कई प्रभावशाली नकारात्मक किरदार निभाए। उनके संवाद बोलने का तरीका, चेहरे के भाव और पर्दे पर मौजूदगी उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी।

60 से ज्यादा फिल्मों में नारद मुनि बनकर बनाई खास पहचान
जीवन के करियर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में देवर्षि नारद मुनि का किरदार शामिल है। भारतीय पौराणिक कथाओं में नारद मुनि को भगवान विष्णु का भक्त और विभिन्न लोकों के बीच संदेश पहुंचाने वाले ऋषि के रूप में जाना जाता है। फिल्मों में इस भूमिका को निभाने के लिए एक खास अंदाज की जरूरत होती थी, जिसे जीवन ने अपनी अभिनय शैली से लोकप्रिय बनाया।
उन्होंने कई पौराणिक फिल्मों में नारद मुनि का किरदार निभाया। अलग-अलग फिल्मी स्रोतों में इस भूमिका की संख्या 49, 60 और 61 तक बताई गई है। इसलिए उनकी भूमिका की सटीक संख्या को लेकर एकरूपता नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि वह हिंदी सिनेमा में नारद मुनि के सबसे चर्चित अभिनेताओं में से एक थे।
फिल्म हर हर महादेव उनके करियर की उल्लेखनीय फिल्मों में गिनी जाती है। पौराणिक फिल्मों के उस दौर में जीवन की नारद मुनि वाली छवि दर्शकों के बीच इतनी लोकप्रिय हुई कि उनका नाम लेते ही कई लोगों को यह किरदार याद आने लगा। एक ही तरह की भूमिका को बार-बार निभाने के बावजूद उन्होंने उसे अपनी पहचान बना लिया।
नारद मुनि से बिल्कुल अलग था खलनायक का अंदाज

जीवन के अभिनय की दूसरी बड़ी पहचान उनके नकारात्मक किरदार रहे। पर्दे पर नारद मुनि के रूप में दिखाई देने वाले यही अभिनेता दूसरी फिल्मों में ऐसे खलनायक बनते थे, जिनके सामने कहानी के नायक को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता था।
अमर अकबर एंथनी, धरम वीर, लावारिस, धर्मात्मा और हीर रांझा जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को याद किया जाता है। इन फिल्मों में उनके किरदारों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को सामने रखा। वह केवल खलनायक की भूमिका निभाने तक सीमित नहीं थे, बल्कि किरदार के स्वभाव और कहानी की जरूरत के अनुसार अपने अभिनय का अंदाज बदल लेते थे।
उनकी खासियत यह थी कि वह कम समय के दृश्य में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की क्षमता रखते थे। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और चेहरे के भाव किरदारों को प्रभावशाली बनाते थे। यही वजह रही कि उन्होंने लंबे समय तक फिल्म उद्योग में काम किया और कई पीढ़ियों के दर्शकों तक अपनी पहचान पहुंचाई।
बेटे किरण कुमार ने भी चुनी अभिनय की राह
जीवन की फिल्मी विरासत उनके परिवार में भी आगे बढ़ी। उनके बेटे किरण कुमार ने अभिनय की दुनिया में अपना करियर बनाया और फिल्मों तथा टेलीविजन में काम करके अलग पहचान हासिल की। इस तरह जीवन का नाम केवल उनके अपने अभिनय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनका परिवार भी भारतीय मनोरंजन जगत से जुड़ा रha
1987 में हुआ निधन, लेकिन किरदार आज भी यादगार
जीवन ने अपने करियर में कई दशक बिताए और हिंदी सिनेमा के बदलते दौर को करीब से देखा। उनका निधन 10 जून 1987 को 71 वर्ष की उम्र में हुआ। उनके निधन के बाद भी उनके अभिनय की चर्चा जारी रही और उनकी फिल्मों के जरिए नई पीढ़ी के दर्शकों को उनके काम को जानने का अवसर मिलता रहा
जीवन की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस कलाकार का सफर भी है, जिसने पारिवारिक और सामाजिक सीमाओं से अलग अपना रास्ता चुना, सीमित पैसों के साथ मुंबई पहुंचा और मेहनत से फिल्म जगत में जगह बनाई। उन्होंने पौराणिक किरदारों से लेकर खलनायक तक, कई अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा दिखाई।
निष्कर्ष: कश्मीरी हिंदू परिवार में जन्मे ओमकार नाथ धर, जिन्हें दुनिया अभिनेता जीवन के नाम से जानती है, ने अपने अभिनय से हिंदी सिनेमा में खास स्थान बनाया। नारद मुनि के रूप में उनकी लोकप्रियता और खलनायक के तौर पर उनकी दमदार भूमिकाएं उनके लंबे फिल्मी सफर की दो बड़ी पहचान बनी रहीं। यही वजह है कि पुराने हिंदी सिनेमा के यादगार कलाकारों की चर्चा में आज भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
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