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जयपुर में लेपर्ड सफारी का बढ़ा क्रेज! झालाना में पर्यटकों की संख्या 8 साल में करीब तीन गुना, आमागढ़ भी बना आकर्षण का केंद्र

जयपुर में लेपर्ड सफारी का बढ़ा क्रेज! झालाना में पर्यटकों की संख्या 8 साल में करीब तीन गुना, आमागढ़ भी बना आकर्षण का केंद्र

राजस्थान की राजधानी जयपुर अब केवल अपने ऐतिहासिक किलों, महलों और गुलाबी शहर की पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीव पर्यटन के लिए भी पर्यटकों का ध्यान खींच रही है। शहर के भीतर स्थित झालाना लेपर्ड रिजर्व और आमागढ़ लेपर्ड सफारी में पर्यटकों की दिलचस्पी बढ़ने की खबर सामने आई है। अरावली की पहाड़ियों का प्राकृतिक नजारा, जंगल में सफारी का अनुभव और तेंदुओं को उनके प्राकृतिक आवास में देखने की संभावना इन क्षेत्रों को खास बना रही है।

 

झालाना सफारी में पर्यटकों की संख्या करीब तीन गुना

हिंदुस्तान टाइम्स की 11 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, झालाना लेपर्ड रिजर्व में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017-18 में यहां 15,479 पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 46,519 हो गई। इस दौरान रिजर्व से होने वाली आय भी 2017-18 के ₹17.23 लाख से बढ़कर 2025-26 में ₹4.24 करोड़ तक पहुंच गई।

ये आंकड़े जयपुर में वन्यजीव पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं। झालाना की खासियत यह है कि जंगल का अनुभव लेने के लिए पर्यटकों को शहर से दूर किसी बड़े राष्ट्रीय उद्यान तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

आमागढ़ में भी पर्यटकों की दिलचस्पी

झालाना के साथ आमागढ़ लेपर्ड सफारी भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आमागढ़ में 2025-26 के दौरान 16,248 पर्यटक पहुंचे। यह सफारी मई 2022 में शुरू हुई थी। वन विभाग के अनुसार, यहां 15 से अधिक तेंदुए मौजूद हैं।

दोनों क्षेत्रों में तेंदुओं के अलावा अन्य वन्यजीव और पक्षी भी पाए जाते हैं। जंगल, पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण के कारण यहां आने वाले पर्यटकों को शहरी पर्यटन से अलग अनुभव मिलता है।

जयपुर में ही जंगल सफारी का अनुभव

झालाना और आमागढ़ की एक बड़ी विशेषता इनका जयपुर शहर के भीतर या उसके नजदीक होना है। इससे जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक ऐतिहासिक स्थलों के साथ वन्यजीव पर्यटन को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।

वन विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों में तेंदुओं के बार-बार दिखाई देने और अरावली की प्राकृतिक सुंदरता ने इनकी लोकप्रियता बढ़ाने में भूमिका निभाई है। हालांकि, जंगल में वन्यजीवों का दिखना निश्चित नहीं होता; यह उनकी गतिविधियों और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

सफारी पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप झालाना या आमागढ़ लेपर्ड सफारी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले बुकिंग की उपलब्धता, निर्धारित समय और प्रवेश संबंधी नियमों की पुष्टि कर लें।

सफारी के लिए अग्रिम परमिट या टिकट बुकिंग की जरूरत हो सकती है।

सुबह और शाम की सफारी के समय मौसम और सीजन के अनुसार बदल सकते हैं।

जंगल में गाइड और सफारी संचालकों के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

तेंदुओं को देखने की गारंटी नहीं होती, इसलिए वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

राजस्थान वन विभाग के वन्यजीव पर्यटन बुकिंग पोर्टल पर परमिट से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है।

 

जयपुर के पर्यटन कारोबार को मिल सकता है फायदा

झालाना और आमागढ़ जैसे पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता बढ़ने से जयपुर में होटल, स्थानीय परिवहन, गाइड सेवाओं और अन्य पर्यटन कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए इन क्षेत्रों से जुड़े कारोबार और रोजगार के अलग-अलग आंकड़ों की जरूरत होगी।

निष्कर्ष: जयपुर के झालाना और आमागढ़ लेपर्ड सफारी क्षेत्र वन्यजीव पर्यटन की पहचान मजबूत कर रहे हैं। झालाना में आठ वर्षों के दौरान पर्यटकों की संख्या लगभग तीन गुना होना और आमागढ़ में हजारों पर्यटकों का पहुंचना इस बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।


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