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चीन-पाकिस्तान की चालों के बीच भारत का बड़ा दांव! 'चिकन नेक' पर बनेगा दूसरा हाईवे

चीन-पाकिस्तान की चालों के बीच भारत का बड़ा दांव! 'चिकन नेक' पर बनेगा दूसरा हाईवे

🚨 चीन-पाकिस्तान की चालों के बीच भारत का बड़ा दांव! 'चिकन नेक' के पास बनेगा ₹2,077 करोड़ का 4-लेन हाईवे

भारत ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने ₹2,077.18 करोड़ की लागत से NH-327 के 31.02 किलोमीटर हिस्से को 4-लेन बनाने की मंजूरी दी है। यह सड़क बागडोगरा से गलगलिया के बीच होगी और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी।

🛣️ आखिर क्या है भारत का नया प्लान?

प्रस्तावित फोर-लेन सड़क बागडोगरा–पानीटंकी–खोरीबाड़ी–गलगलिया रूट को कवर करेगी। प्रोजेक्ट में 3 बड़े पुल, एक रोड ओवरब्रिज, 5 एलिफेंट अंडरपास और दोनों तरफ सर्विस रोड भी शामिल हैं।

इसका मकसद सिर्फ ट्रैफिक कम करना नहीं है। यह इलाका भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। बेहतर सड़क से सैनिकों, रक्षा सामान और जरूरी सप्लाई की आवाजाही भी ज्यादा तेज और सुरक्षित हो सकेगी।

🔥 'चिकन नेक' इतना महत्वपूर्ण क्यों?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। यह क्षेत्र बेहद संकरा है और इसके आसपास नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं हैं, जबकि चीन की चुंबी घाटी भी रणनीतिक रूप से नजदीक है। इसी वजह से इसे भारत की सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

⚔️ चीन-पाकिस्तान के बीच भारत क्यों बढ़ा रहा इंफ्रास्ट्रक्चर?

भारत के लिए इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पूर्वोत्तर की मुख्य भूमि से सड़क और रेल संपर्क का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में वैकल्पिक और ज्यादा क्षमता वाले मार्ग तैयार करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार पहले ही धुपगुड़ी–फालाकाटा NH-27 सेक्शन के 4-लेन विस्तार को भी आगे बढ़ा चुकी है। NHAI के अनुसार इससे एक वैकल्पिक हाई-कैपेसिटी कॉरिडोर मिलेगा और पूर्वोत्तर के साथ रणनीतिक कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

🐘 विकास के साथ पर्यावरण का भी ध्यान

प्रोजेक्ट में 5 एलिफेंट अंडरपास शामिल किए गए हैं, ताकि हाईवे के कारण हाथियों की आवाजाही प्रभावित न हो। यानी भारत का यह प्लान रणनीतिक सुरक्षा + तेज कनेक्टिविटी + वन्यजीव संरक्षण, तीनों को साथ लेकर चलने की कोशिश है।

🇮🇳 बड़ा संदेश

चिकन नेक को मजबूत करने का मतलब सिर्फ एक हाईवे बनाना नहीं है। यह भारत के लिए पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स को ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

नोट: इसे “चीन-पाकिस्तान के खिलाफ दूसरा हाईवे” कहना थोड़ा भ्रामक होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक ताजा मंजूरी नए अलग कॉरिडोर के बजाय NH-327 के 31.02 किमी हिस्से को 4-लेन बनाने की है।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

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