Follow Us:

Stay updated with the latest news, stories, and insights that matter — fast, accurate, and unbiased. Powered by facts, driven by you.

भारत ने स्टील आयात पर कसा शिकंजा: अचानक बढ़े आयात के बाद कुछ स्टील उत्पादों पर तीन साल का टैरिफ लागू

भारत ने स्टील आयात पर कसा शिकंजा: अचानक बढ़े आयात के बाद कुछ स्टील उत्पादों पर तीन साल का टैरिफ लागू

भारत की स्टील इंडस्ट्री कोई मामूली खेल नहीं है। यह सिर्फ लोहे-इस्पात की बात नहीं, बल्कि रोज़गार, इंफ्रास्ट्रक्चर, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ सेक्टर है। ऐसे में जब विदेशों से सस्ता स्टील अचानक बाढ़ की तरह देश में घुसने लगे, तो सरकार का चुप बैठना नामुमकिन हो जाता है।

🔥 अचानक बढ़ा स्टील आयात: चिंता की असली वजह

पिछले कुछ समय में भारत में स्टील आयात में “अचानक और तेज़” (sudden, sharp) वृद्धि देखी गई। कई देशों से कम कीमत वाला स्टील भारतीय बाजार में आया, जिसने घरेलू उत्पादकों की कमर तोड़नी शुरू कर दी।
सीधा सच यह है—जब बाहर का माल सस्ता होगा, तो देश का उद्योग घाटे में जाएगा।

छोटे और मझोले स्टील निर्माता पहले ही कच्चे माल, बिजली और लॉजिस्टिक्स की ऊँची लागत से जूझ रहे थे। ऊपर से यह आयात… मतलब डबल अटैक।

🛡️ सरकार का फैसला: तीन साल का टैरिफ

इसी हालात को देखते हुए भारत सरकार ने कुछ चुनिंदा स्टील उत्पादों पर तीन वर्षों के लिए टैरिफ (शुल्क) लगाने का निर्णय लिया।
यह कोई तात्कालिक या भावनात्मक फैसला नहीं है, बल्कि ट्रेड डेटा, इंडस्ट्री फीडबैक और वैश्विक बाजार के ट्रेंड को देखकर उठाया गया कदम है।

सरकार का साफ संदेश है—
👉 भारतीय बाजार को डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने दिया जाएगा।

⚙️ किन उत्पादों पर असर?

यह टैरिफ सभी स्टील उत्पादों पर नहीं, बल्कि कुछ खास कैटेगरी पर लगाया गया है, जिनका आयात असामान्य रूप से बढ़ा था। इनमें शामिल हैं:

फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स

कुछ अलॉय और नॉन-अलॉय स्टील

हाई-वॉल्यूम, लो-प्राइस्ड स्टील आइटम्स

इन उत्पादों के कारण घरेलू कंपनियाँ प्राइस वॉर में टिक ही नहीं पा रही थीं।

🏭 घरेलू स्टील उद्योग को राहत

इस फैसले से भारतीय स्टील कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

उत्पादन में स्थिरता आएगी

कीमतों में अनावश्यक गिरावट रुकेगी

निवेशकों का भरोसा लौटेगा

रोज़गार सुरक्षित होंगे

स्टील सेक्टर लाखों लोगों को सीधे-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है। जब यह सेक्टर डगमगाता है, तो असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

🌍 वैश्विक व्यापार नियमों के दायरे में फैसला

सरकार ने यह टैरिफ अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के तहत लगाया है। WTO के नियम साफ कहते हैं कि अगर किसी देश का घरेलू उद्योग अचानक बढ़े आयात से नुकसान में जा रहा हो, तो वह सेफगार्ड ड्यूटी या टैरिफ लगा सकता है।

मतलब यह फैसला न तो मनमाना है, न ही अवैध।

📉 उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा?

अब सीधी बात—
हाँ, कुछ हद तक असर पड़ सकता है।
स्टील की कीमतें थोड़ी स्थिर या ऊँची रह सकती हैं, जिससे कंस्ट्रक्शन और ऑटो सेक्टर पर हल्का दबाव आ सकता है।

लेकिन सरकार का मानना है कि:
👉 लंबे समय में मजबूत घरेलू उद्योग = स्थिर कीमतें + भरोसेमंद सप्लाई

India Imposes Three-Year Safeguard Duty on Steel Imports, China Among Key  Countries Affected - Pragativadi I Latest Odisha News in English I Breaking  News
भारत ने स्टील आयात पर कसा शिकंजा: अचानक बढ़े आयात के बाद कुछ स्टील उत्पादों पर तीन साल का टैरिफ लागू

🧠 रणनीति साफ है

यह फैसला एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है—

आत्मनिर्भर भारत

मेक इन इंडिया

आयात पर जरूरत से ज़्यादा निर्भरता खत्म करना

भारत दुनिया के बड़े स्टील उत्पादकों में से एक है। ऐसे में अपने ही देश में विदेशी सस्ते स्टील से हार जाना समझदारी नहीं।

📌 आगे क्या?

अगले तीन साल बेहद अहम होंगे।

सरकार हालात की लगातार समीक्षा करेगी

अगर जरूरत पड़ी, तो नीति में बदलाव भी संभव है

उद्योग से अपेक्षा है कि वह गुणवत्ता, दक्षता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाए

🧾 निष्कर्ष

भारत का यह कदम साफ दिखाता है कि सरकार अब रिएक्ट नहीं, बल्कि प्रोटेक्ट और प्लान कर रही है।
स्टील आयात पर तीन साल का टैरिफ सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि यह संदेश है कि देश अपने उद्योगों को यूँ ही डूबने नहीं देगा।

पुराने ज़माने में कहा जाता था—
“लोहे की चोट, लोहे से ही ठीक होती है।”
और इस बार भारत ने वही किया है।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

Share: