आवाज की भी होगी सुरक्षा! AI Deepfake से बचने के लिए जॉर्जिया मेलोनी ने लिया अनोखा कदम
- bySanjay
- 07 October, 2026
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते दौर में अपनी पहचान और आवाज को सुरक्षित रखने के लिए एक असामान्य कानूनी कदम उठाया है। मेलोनी ने अपनी आवाज को साउंड ट्रेडमार्क के तौर पर पंजीकृत कराने के लिए यूरोपीय संघ के European Union Intellectual Property Office (EUIPO) में आवेदन किया है। यह कदम खास तौर पर AI की मदद से तैयार किए जा रहे Deepfake और Voice Cloning के बढ़ते खतरे के बीच उठाया गया है।
सिर्फ 4 सेकंड की रिकॉर्डिंग से आवेदन
रिपोर्टों के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2026 को दाखिल किए गए आवेदन में मेलोनी की लगभग चार सेकंड की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल है। इसमें वह इतालवी भाषा में “Io sono Giorgia Meloni” यानी “मैं जॉर्जिया मेलोनी हूं” कहती हैं। यह वाक्य उनके पुराने चर्चित राजनीतिक नारे और 2021 में प्रकाशित उनकी आत्मकथा Io sono Giorgia से भी जुड़ा हुआ है।
फिलहाल यह आवेदन जांच के चरण में है। यानी इसे अभी अंतिम रूप से मंजूरी नहीं मिली है। अगर EUIPO इसे मंजूरी देता है तो संबंधित क्षेत्रों में उनकी आवाज से जुड़े साउंड मार्क के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी आधार मिल सकता है।
AI Deepfake से आखिर खतरा क्या है?
AI तकनीक ने किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करना पहले की तुलना में काफी आसान बना दिया है। उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर AI सिस्टम किसी व्यक्ति की आवाज के टोन, उच्चारण और बोलने के अंदाज की नकल कर सकता है। इसके बाद ऐसी आवाज में ऐसे शब्द या वाक्य तैयार किए जा सकते हैं जिन्हें संबंधित व्यक्ति ने वास्तव में कभी नहीं कहा।
किसी प्रधानमंत्री या दूसरे सार्वजनिक व्यक्ति के मामले में इसका असर और गंभीर हो सकता है। नकली ऑडियो को सोशल मीडिया पर असली बयान बताकर फैलाया जाए तो लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है और किसी व्यक्ति की सार्वजनिक छवि प्रभावित हो सकती है। मेलोनी ने भी Deepfake सामग्री के संदर्भ में लोगों से ऑनलाइन कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील की है।
क्या ट्रेडमार्क से AI उनकी आवाज की नकल पूरी तरह रुक जाएगी?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवाज का ट्रेडमार्क AI से आवाज की हर तरह की नकल को अपने आप नहीं रोकता। रिपोर्टों के अनुसार, अगर आवेदन मंजूर भी हो जाता है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि कोई AI सिस्टम तकनीकी रूप से मेलोनी जैसी आवाज पैदा नहीं कर सकता।
इसके बजाय ट्रेडमार्क उन्हें कुछ परिस्थितियों में अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी रास्ता दे सकता है। यानी यह कदम AI Voice Cloning को तकनीकी रूप से बंद करने की बजाय उसके गलत या अनधिकृत इस्तेमाल पर कानूनी कार्रवाई की स्थिति मजबूत करने का प्रयास है।
मेलोनी पहले भी Deepfake मामले में कानूनी कार्रवाई कर चुकी हैं
यह पहली बार नहीं है जब मेलोनी ने अपनी डिजिटल पहचान के गलत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया है। 2024 में उन्होंने अपनी तस्वीरों से जुड़े कथित AI-generated Deepfake मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ सिविल कार्रवाई शुरू की थी। वह मामला अभी अदालत में लंबित बताया गया है।
AI के दौर में नई तरह की कानूनी सुरक्षा की शुरुआत?
मेलोनी का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि AI के कारण आवाज, चेहरा और डिजिटल पहचान की सुरक्षा का सवाल तेजी से सामने आ रहा है। पहले किसी व्यक्ति की आवाज को उसकी पहचान का हिस्सा माना जाता था, लेकिन अब AI Voice Cloning ने इसे कानूनी और तकनीकी दोनों स्तरों पर नई चुनौती बना दिया है।
मेलोनी के मामले में ट्रेडमार्क आवेदन एक खास ऑडियो पहचान को कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है तो भविष्य में दूसरे सार्वजनिक व्यक्तियों और कलाकारों के लिए भी अपनी डिजिटल आवाज और पहचान को लेकर ऐसे कानूनी उपाय अपनाने की चर्चा बढ़ सकती है।
फिलहाल मेलोनी का आवेदन EUIPO के पास जांच में है। इसलिए इसे “आवाज का ट्रेडमार्क मिल गया” कहने के बजाय “आवाज के ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया गया है” कहना ज्यादा सटीक होगा।
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देखिए सुष्मिता सेन...
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