छोटे बच्चों के आहार पर FSSAI का बड़ा प्रस्ताव, 6 महीने तक के शिशुओं के फूड में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर लग सकती है रोक
- bySanjay
- 19 October, 2026
शिशु आहार के नियमों में बदलाव की तैयारी, FSSAI ने जारी किया मसौदा

नई दिल्ली। छोटे बच्चों के पोषण और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को और मजबूत करने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने रखा है। इसके तहत छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज को अलग से मिलाने पर रोक लगाने की तैयारी है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य शुरुआती उम्र में अतिरिक्त शर्करा के अनावश्यक इस्तेमाल को सीमित करना और शिशुओं की उम्र के अनुरूप पोषण संबंधी मानकों को मजबूत करना है।
FSSAI के इस प्रस्ताव से बेबी फूड बनाने वाली कंपनियों के उत्पादों की संरचना और उनमें इस्तेमाल होने वाले कार्बोहाइड्रेट को लेकर नियमों में बदलाव हो सकता है। हालांकि, अभी इसे अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए। यह एक मसौदा संशोधन है, जिस पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Amendment Regulations, 2026 का मसौदा 16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को भी इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा हुई।
क्या बदलाव करना चाहता है FSSAI?
FSSAI का प्रस्ताव छह महीने तक के शिशुओं के लिए निर्धारित खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज को अलग से मिलाने पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित है। मसौदे में प्रावधान जोड़े जाने का प्रस्ताव है, जिसके अनुसार इस आयु वर्ग के लिए बनाए गए उत्पादों में इन दोनों शर्कराओं को सामग्री के रूप में नहीं मिलाया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि प्रस्ताव का मुख्य फोकस उन उत्पादों पर है, जिन्हें विशेष रूप से छह महीने तक के शिशुओं के पोषण के लिए तैयार किया जाता है। इसे सभी खाद्य पदार्थों पर लागू होने वाला प्रतिबंध नहीं समझना चाहिए।
मसौदे में प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशुओं के लिए बनाए गए उत्पाद उनकी उम्र की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएं। खाद्य उत्पादों में किसी सामग्री का इस्तेमाल केवल स्वाद या मिठास बढ़ाने के लिए किया जा रहा है या वह पोषण संबंधी आवश्यकता के कारण मौजूद है, यह अंतर भी उत्पादों के नियमन में महत्वपूर्ण हो सकता है।
अभी क्या हैं बेबी फूड से जुड़े नियम?
मौजूदा खाद्य सुरक्षा नियम शिशु पोषण उत्पादों की संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए मानक निर्धारित करते हैं। ये नियम जन्म से लेकर 24 महीने तक के बच्चों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के पोषण उत्पादों को कवर करते हैं।
वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को कार्बोहाइड्रेट के पसंदीदा स्रोतों में शामिल किया गया है। वहीं, कुछ परिस्थितियों में सुक्रोज और फ्रक्टोज को भी कार्बोहाइड्रेट स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति है, बशर्ते निर्धारित नियमों और सीमाओं का पालन किया जाए।
अब प्रस्तावित संशोधन के जरिए छह महीने तक के शिशुओं के लिए बने उत्पादों के संबंध में अधिक सख्त प्रावधान जोड़ने की तैयारी है। यदि संशोधन अंतिम रूप में स्वीकार किया जाता है, तो निर्माताओं को इस आयु वर्ग के उत्पादों की सामग्री तय करते समय नए नियमों का पालन करना होगा>
सुक्रोज और फ्रक्टोज क्या होते हैं?
सुक्रोज सामान्य टेबल शुगर का वैज्ञानिक नाम है। यह चीनी का एक प्रकार है, जिसका इस्तेमाल कई खाद्य पदार्थों में मिठास बढ़ाने के लिए किया जाता है।
फ्रक्टोज भी एक प्रकार की शर्करा है, जो प्राकृतिक रूप से फलों और शहद जैसे खाद्य पदार्थों में मिलती है। खाद्य उद्योग में इसे कुछ प्रसंस्कृत उत्पादों में सामग्री के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, दोनों शब्दों को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर ध्यान में रखना जरूरी है। FSSAI का मौजूदा प्रस्ताव छह महीने तक के शिशुओं के लिए निर्धारित उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज को अलग से मिलाने से संबंधित है। इसे फलों में प्राकृतिक रूप से मौजूद शर्करा पर सामान्य प्रतिबंध के रूप में प्रस्तुत करना गलत होगा।
इसी तरह, यह प्रस्ताव सभी कार्बोहाइड्रेट को प्रतिबंधित करने की बात नहीं करता। शिशु पोषण उत्पादों को निर्धारित पोषण मानकों के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता बनी रहती है।
शुरुआती उम्र में पोषण पर इतना ध्यान क्यों?
जीवन के शुरुआती छह महीने शिशु की वृद्धि और विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान उचित पोषण शिशु के स्वास्थ्य और विकास की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है।
स्वास्थ्य संबंधी सार्वजनिक दिशा-निर्देशों में आम तौर पर जीवन के पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान को प्रोत्साहित किया जाता है, जहां यह संभव और उपयुक्त हो। FSSAI का प्रस्ताव भी शुरुआती शिशु पोषण को लेकर इसी व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के अनुरूप बताया गया है।
खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त शर्करा का अधिक सेवन बच्चों में अस्वास्थ्यकर आहार संबंधी आदतों और मोटापे जैसे दीर्घकालिक जोखिमों से जुड़ा हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में नियामक प्राधिकरण शिशु पोषण उत्पादों की संरचना पर अधिक स्पष्ट मानक तय करने की दिशा में काम कर रहा है।
हालांकि, किसी एक खाद्य सामग्री को लेकर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि उससे हर बच्चे को निश्चित रूप से नुकसान होगा। शिशुओं की पोषण संबंधी जरूरतें उम्र, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती हैं। इस खबर का मुख्य विषय खाद्य उत्पादों के नियामकीय मानक हैं, न कि किसी विशेष बच्चे के लिए चिकित्सकीय सलाह।
कंपनियों और बेबी फूड निर्माताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि प्रस्तावित संशोधन अंतिम रूप से लागू होता है, तो छह महीने तक के शिशुओं के लिए उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को अपनी सामग्री और उत्पादन प्रक्रिया की समीक्षा करनी पड़ सकती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद नए नियमों के अनुरूप हों।
इसका असर उत्पादों के फॉर्मूलेशन, गुणवत्ता जांच और नियामकीय अनुपालन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए वे प्रस्तावित प्रतिबंध का पालन कैसे करती हैं।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार में उपलब्ध किसी विशेष ब्रांड का उत्पाद बदल जाएगा, उसकी कीमत बढ़ेगी या कोई उत्पाद बाजार से हटाया जाएगा। ऐसे निष्कर्ष तभी निकाले जा सकते हैं, जब अंतिम नियम, उनकी लागू होने की तारीख और कंपनियों के अनुपालन संबंधी जानकारी स्पष्ट हो।
आम माता-पिता को अभी क्या समझना चाहिए?
इस प्रस्ताव का संबंध मुख्य रूप से छह महीने तक के शिशुओं के लिए निर्धारित खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने के नियमों से है। इसे सभी बेबी फूड, सभी उम्र के बच्चों के उत्पादों या प्राकृतिक रूप से शर्करा वाले खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध के रूप में नहीं देखना चाहिए।
माता-पिता को शिशुओं के आहार में बदलाव करने से पहले अपने बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य स्वास्थ्यकर्मी की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। किसी वायरल पोस्ट या अधूरी खबर के आधार पर शिशु के दूध अथवा निर्धारित पोषण उत्पाद को अचानक बदलना उचित नहीं है।
यदि यह प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में अधिसूचित होता है, तो इसके दायरे, लागू होने की तारीख और निर्माताओं के लिए आवश्यक बदलावों की अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
60 दिनों तक मांगे जाएंगे सुझाव और आपत्तियां
FSSAI ने मसौदा संशोधन को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, राजपत्र की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 60 दिनों के भीतर संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस अवधि में प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद नियामक प्राधिकरण संशोधन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसलिए प्रस्तावित प्रतिबंध को तत्काल लागू हो चुका नियम बताना सही नहीं होगा।
यह प्रक्रिया नियामकीय बदलावों में महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे संबंधित उद्योग, विशेषज्ञ और अन्य हितधारक प्रस्ताव पर अपनी राय दे सकते हैं। अंतिम नियम प्रकाशित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्ताव में कोई बदलाव किया गया है या नहीं और नए प्रावधान किस तारीख से लागू होंगे।
निष्कर्ष: शिशु पोषण मानकों को मजबूत करने की दिशा में प्रस्ताव
FSSAI का यह मसौदा संशोधन छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में अतिरिक्त सुक्रोज और फ्रक्टोज के इस्तेमाल को सीमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामकीय पहल है। इसका उद्देश्य शिशु पोषण उत्पादों को उम्र के अनुरूप जरूरतों के हिसाब से तैयार करने और शुरुआती जीवन में अतिरिक्त शर्करा के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने पर ध्यान देना है।
फिलहाल यह प्रस्ताव सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया में है। इसलिए इसे अंतिम प्रतिबंध कहना सही नहीं होगा। आगे की स्थिति FSSAI द्वारा प्राप्त सुझावों पर विचार करने और संशोधन को अंतिम रूप देने के बाद स्पष्ट होगी
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