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फारूक अब्दुल्ला के बयान से सियासी भूचाल! बोले—पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा उठा रहा, BJP ने मांगा जवाब

फारूक अब्दुल्ला के बयान से सियासी भूचाल! बोले—पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा उठा रहा, BJP ने मांगा जवाब

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर बवाल! पाकिस्तान को लेकर ऐसा क्या बोल गए NC अध्यक्ष कि भाजपा ने खोल दिया मोर्चा?

श्रीनगर, 24 अक्टूबर 2026। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है और इसी वजह से जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज दुनिया तक पहुंच रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली से कश्मीरियों को न्याय मिलने की उम्मीद कम है।

उनकी टिप्पणी सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान से पाकिस्तान के पक्ष को राजनीतिक समर्थन मिलता है। कुछ नेताओं ने अब्दुल्ला से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की, जबकि भाजपा के एक प्रवक्ता ने पुलिस कार्रवाई की मांग भी उठाई।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अधिकारों, राज्य का दर्जा बहाल करने और अनुच्छेद 370 से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद जारी हैं। <

बारामूला में क्या बोले फारूक अब्दुल्ला?

रिपोर्टों के मुताबिक, फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली के राजनीतिक नेतृत्व पर निशाना साधा। उनका कहना था कि कश्मीर के भविष्य और वहां के लोगों के अधिकारों से जुड़े सवालों पर केंद्र से न्याय मिलने की उम्मीद करना मुश्किल है।

अब्दुल्ला ने पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए कहा कि पड़ोसी देश विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहता है। उनके बयान का आशय यह था कि कश्मीर का प्रश्न अंतरराष्ट्रीय चर्चा में बने रहने से वहां के लोगों की पहचान और उनके मुद्दे दुनिया के सामने आते हैं।

उन्होंने कश्मीर के लोगों से अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर एकजुट रहने का भी आह्वान किया। अब्दुल्ला ने चेतावनी दी कि यदि लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तो उनकी राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान कमजोर पड़ सकती है।

उनके बयान का सबसे अधिक विवादित हिस्सा पाकिस्तान को कश्मीरियों की रक्षा करने वाला बताने के रूप में सामने आया। इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया। 

भाजपा ने क्यों जताई कड़ी आपत्ति?

फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पर जम्मू-कश्मीर भाजपा के नेताओं ने कड़ा विरोध जताया। भाजपा नेताओं का तर्क है कि पाकिस्तान को कश्मीरियों का हितैषी बताना उस क्षेत्र के इतिहास और आतंकवाद से जुड़े अनुभवों की अनदेखी करता है।

भाजपा के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष सत शर्मा ने अब्दुल्ला से अपने बयान पर माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत में किसी नेता को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है और इसी स्वतंत्रता के कारण अब्दुल्ला इस तरह के बयान दे पा रहे हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया।

भाजपा के अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे का इस्तेमाल भारत के खिलाफ राजनीतिक अभियान चलाने के लिए करता रहा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की भूमिका को कश्मीरियों की सुरक्षा से जोड़कर पेश करना उचित नहीं है।

भाजपा के कुछ नेताओं ने बयान को राष्ट्रविरोधी बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की। हालांकि, किसी नेता द्वारा विवादित राजनीतिक टिप्पणी किए जाने और उसके आधार पर किसी अपराध का कानूनी रूप से स्थापित होना दो अलग बातें हैं। किसी संभावित कानूनी कार्रवाई की स्थिति को आधिकारिक पुलिस या न्यायिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकता है। 

अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे का मुद्दा फिर चर्चा में

फारूक अब्दुल्ला और उनकी पार्टी लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाते रहे हैं। अनुच्छेद 370 को अगस्त 2019 में हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद से ये मुद्दे क्षेत्र की राजनीति में लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं, अधिकारों और पहचान से जुड़े सवालों पर बातचीत होनी चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा अनुच्छेद 370 हटाने को राष्ट्रीय एकीकरण और क्षेत्र में विकास तथा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताती है।

इसी राजनीतिक मतभेद के बीच अब्दुल्ला की पाकिस्तान संबंधी टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया है। जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व केंद्र की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा का कहना है कि कश्मीर की समस्याओं पर चर्चा करते समय पाकिस्तान की भूमिका और सीमा पार आतंकवाद के इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। <

फारूक अब्दुल्ला ने भारतीय होने पर क्या कहा?

इस विवाद के बीच अब्दुल्ला के पूरे बयान का संदर्भ समझना भी जरूरी है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने कभी भारतीय होने से इनकार नहीं किया। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद के भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कल्पना ऐसे देश की थी, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग साथ रह सकें।

उन्होंने धार्मिक आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन की राजनीति की भी आलोचना की। इस तरह उनके भाषण में केंद्र सरकार की आलोचना, कश्मीर की पहचान का सवाल, पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका और भारत की धर्मनिरपेक्ष परिकल्पना जैसे कई विषय शामिल थे।

हालांकि, विवाद का केंद्र उनका पाकिस्तान संबंधी कथन बना, जिसे भाजपा नेताओं ने भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया। 

क्या इस बयान से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बढ़ेगा तनाव?

फिलहाल इस बयान के राजनीतिक प्रभाव का आकलन करना जल्दबाजी होगा, लेकिन इससे नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच वैचारिक टकराव एक बार फिर सामने आया है। जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक पहचान, केंद्र के साथ संबंध, राज्य का दर्जा और सुरक्षा जैसे मुद्दे पहले से ही राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं।

ऐसे बयानों का असर पार्टी कार्यकर्ताओं, राजनीतिक समर्थकों और सार्वजनिक विमर्श पर पड़ सकता है। भाजपा इस टिप्पणी को पाकिस्तान के पक्ष में बयान के रूप में पेश कर रही है, जबकि अब्दुल्ला के भाषण का व्यापक संदर्भ केंद्र की नीतियों और कश्मीरियों के अधिकारों पर उनकी आलोचना से जुड़ा है।

आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से इस विवाद पर कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण आता है या नहीं, और क्या बयान को लेकर कोई औपचारिक शिकायत या कानूनी कार्रवाई होती है।

निष्कर्ष

फारूक अब्दुल्ला की पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता है और इससे कश्मीरियों की आवाज दुनिया तक पहुंचती है। भाजपा ने इस बयान की आलोचना करते हुए माफी की मांग की और कुछ नेताओं ने कानूनी कार्रवाई की बात कही।

अब इस विवाद में आगे की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और किसी औपचारिक कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। खबर को समझते समय अब्दुल्ला के पूरे भाषण, भाजपा की प्रतिक्रिया और सत्यापित तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी है


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