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दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो, भारत की सर्दियों पर पड़ सकता है असर; सामान्य से कम ठंड की आशंका

दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो, भारत की सर्दियों पर पड़ सकता है असर; सामान्य से कम ठंड की आशंका

अल नीनो दिसंबर में चरम पर पहुंचने की संभावना, भारत के मौसम पर रहेंगी नजरें

नई दिल्ली। दुनिया के मौसम पर नजर रखने वाली जलवायु एजेंसियों के पूर्वानुमानों में इस साल अल नीनो की स्थिति मजबूत होने के संकेत मिले हैं। अक्टूबर 2026 के अंतरराष्ट्रीय आकलनों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक रह सकता है और अल नीनो दिसंबर के आसपास अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकता है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान, बारिश और मौसमी परिस्थितियों पर पड़ने की आशंका है।

विश्व मौसम संगठन (WMO) के पूर्वानुमान पर आधारित 8 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है और फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र (NOAA CPC) ने भी अक्टूबर में जारी अपने आकलन में इस घटना के मजबूत से बहुत मजबूत होने की संभावना जताई है।

क्या होता है अल नीनो?

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने से जुड़ी प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसका प्रभाव समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाली गतिविधियों के जरिए दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

इस घटना के दौरान कुछ क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न बदल सकता है, कहीं सूखे जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं और कुछ जगहों पर तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। हालांकि, इसका असर हर देश और हर मौसम में एक जैसा नहीं होता।

भारत में सर्दियों पर क्या असर पड़ सकता है?

अल नीनो के मजबूत होने से भारत के मौसम को लेकर चिंता बढ़ी है, लेकिन केवल इसी आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि देशभर में इस बार सर्दी सामान्य से कम पड़ेगी। सर्दियों के तापमान पर पश्चिमी विक्षोभ, हिमालय में बर्फबारी, हवा की दिशा, स्थानीय मौसमी परिस्थितियों और अन्य जलवायु कारकों का भी प्रभाव रहता है।

अल नीनो का भारत में मानसून की बारिश से संबंध अपेक्षाकृत अधिक जाना जाता है। सामान्य तौर पर इसके दौरान भारतीय मानसून कमजोर पड़ सकता है, लेकिन हर अल नीनो वर्ष में बारिश का परिणाम एक जैसा नहीं होता। इसी तरह, सर्दियों के तापमान का पूर्वानुमान लगाने के लिए अलग से मौसमी आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी है। 

राजस्थान में भी मौसम के पूर्वानुमान पर रहेगी नजर

राजस्थान में सर्दियों की तीव्रता का आकलन करते समय न्यूनतम तापमान, उत्तर-पश्चिमी हवाओं, पश्चिमी विक्षोभ और शीतलहर की संभावनाओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। दौसा, जयपुर, अलवर और आसपास के क्षेत्रों में ठंड कितनी पड़ेगी, इसका विश्वसनीय आकलन स्थानीय और क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

क्या इस बार गर्म रह सकती है सर्दी?

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय आकलन अल नीनो के मजबूत होने के संकेत देते हैं, लेकिन भारत में सामान्य से कम ठंड पड़ने का निष्कर्ष केवल इस घटना के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के शीतकालीन तापमान संबंधी पूर्वानुमान और क्षेत्रवार अपडेट देखना जरूरी है।

निष्कर्ष: दिसंबर 2026 में अल नीनो के मजबूत होने की संभावना वैश्विक मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, भारत में सर्दियां कितनी ठंडी या गर्म रहेंगी, यह आने वाले क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमानों और अन्य जलवायु परिस्थितियों से स्पष्ट होगा।


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