कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च घटाने की तैयारी, 137 दवाओं की कीमतों में 70% तक कमी की उम्मीद; 9 नवंबर से लागू होंगी नई दरें
- bySanjay
- 18 October, 2026
कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च घटाने की तैयारी, 137 दवाओं की कीमतों में 70% तक कमी की उम्मीद

नई दिल्ली। कैंसर का इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतें लंबे समय से बड़ी आर्थिक चुनौती बनी हुई हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली 137 गैर-अनुसूचित दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित करने का कदम उठाया है। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से संबंधित दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 70 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के अंतर्गत काम करने वाली राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 17 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में जानकारी दी। नई दरें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होनी निर्धारित हैं। सरकार का उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति और बिक्री के दौरान जुड़ने वाले अत्यधिक व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों के लिए इलाज को अधिक किफायती बनाना है।
1. क्या है सरकार का नया फैसला?
सरकार ने 137 चिन्हित गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के लिए व्यापारिक मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 प्रतिशत तक सीमित करने की व्यवस्था की है। यह फैसला दवा की कीमत तय होने और मरीज तक पहुंचने की प्रक्रिया में लगने वाले अतिरिक्त मार्जिन को नियंत्रित करने से संबंधित है।
गैर-अनुसूचित दवाएं वे होती हैं, जिन पर आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल दवाओं की तरह पहले से निर्धारित मूल्य-सीमा लागू नहीं होती। ऐसे मामलों में आपूर्ति श्रृंखला में जुड़ने वाले मार्जिन के कारण मरीज को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
नई व्यवस्था के तहत संबंधित दवाओं की कीमतों की दोबारा गणना की जाएगी। हालांकि, सभी दवाओं की कीमत समान अनुपात में नहीं घटेगी। वास्तविक कमी प्रत्येक दवा की मौजूदा कीमत और उसकी मूल्य संरचना पर निर्भर करेगी।
2. 70 प्रतिशत तक कीमत कम होने का क्या मतलब है?
इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संबंधित दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत में 70 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना जताई गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सूची में शामिल हर दवा की कीमत अनिवार्य रूप से 70 प्रतिशत कम होगी।
कुछ दवाओं में कमी अधिक हो सकती है, जबकि दूसरी दवाओं में बदलाव का अनुपात अलग रहेगा। सरकार के अनुसार, कीमतों में संभावित कमी मौजूदा मूल्य संरचना के आधार पर तय होगी।
इसलिए मरीजों और उनके परिवारों को नई दरें लागू होने के बाद अपनी दवा की संशोधित MRP की जांच करनी चाहिए। पुरानी कीमत और नई कीमत की तुलना करने से ही वास्तविक बचत का पता चल सकेगा।
3. किन मरीजों को मिल सकता है फायदा?
यह व्यवस्था उन मरीजों के लिए प्रासंगिक है, जिनके उपचार में सूचीबद्ध 137 कैंसर दवाओं में से कोई दवा इस्तेमाल होती है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें अलग-अलग प्रकार के कैंसर के इलाज में प्रयुक्त दवाएं शामिल हैं। इनमें स्तन, प्रोस्टेट, कोलन, अंडाशय और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से संबंधित उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं तथा इम्यूनोथेरेपी की दवाएं भी शामिल हैं।
हालांकि, इसका लाभ हर कैंसर मरीज को एक जैसा नहीं मिलेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मरीज की निर्धारित दवा नई मूल्य-नियंत्रण सूची में शामिल है या नहीं और उसकी कीमत में कितना बदलाव होता है।
मरीजों को अपनी दवा केवल कीमत के आधार पर बदलने के बजाय इलाज कर रहे डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
4. मरीजों को कितनी आर्थिक राहत मिलने का अनुमान है?
सरकार ने इस पहल से कैंसर मरीजों को सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये की संभावित बचत होने का अनुमान जताया है। यह अनुमान संबंधित दवाओं की कीमतों और बाजार में होने वाले बदलावों के आधार पर है। वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-सी दवाएं इस्तेमाल की जा रही हैं और उनकी संशोधित कीमतें कितनी कम होती हैं।
कैंसर के इलाज में दवाओं के अलावा अस्पताल में भर्ती होने, जांच, डॉक्टर की फीस, रेडिएशन, सर्जरी और अन्य उपचार प्रक्रियाओं का खर्च भी हो सकता है। इसलिए दवाओं की कीमत कम होने से कुल इलाज का खर्च हर मरीज के लिए समान रूप से नहीं घटेगा।
फिर भी, जिन मरीजों के नियमित उपचार में महंगी सूचीबद्ध दवाएं शामिल हैं, उनके लिए कीमत में कमी आर्थिक बोझ कम करने में मददगार हो सकती है।
5. नई कीमतें कब से लागू होंगी?
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होनी निर्धारित हैं। दवा निर्माताओं को अधिसूचना प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर अपनी संशोधित कीमतें NPPA को बताने के निर्देश दिए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत संबंधित दवाओं की संशोधित MRP के अनुसार बिक्री की जानी चाहिए। दवा दुकानों और अस्पतालों में भी मरीजों को नई कीमत की जानकारी मिलना महत्वपूर्ण होगा।
मरीजों को सलाह दी जाती है कि नई दरें लागू होने के बाद दवा खरीदते समय बिल और पैकेट पर दर्ज MRP जरूर देखें। किसी दवा की कीमत को लेकर संदेह होने पर आधिकारिक मूल्य सूची से उसका मिलान किया जा सकता है।
6. पहले भी कैंसर दवाओं की कीमतों पर हुआ था नियंत्रण
कैंसर की दवाओं को किफायती बनाने के लिए सरकार पहले भी मूल्य नियंत्रण से जुड़े कदम उठा चुकी है। वर्ष 2019 में 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित करने की पहल की गई थी। सरकार के अनुसार, उस कदम के बाद 526 ब्रांडों की अधिकतम खुदरा कीमतों में भी कमी दर्ज की गई थी।
अब 137 अतिरिक्त चिन्हित दवाओं पर नई व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य मूल्य नियंत्रण का दायरा बढ़ाना है। इससे सरकार को उम्मीद है कि दवाओं की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने और मरीजों तक अपेक्षाकृत किफायती उपचार पहुंचाने में मदद मिलेगी।
7. मरीज अपनी दवा की नई कीमत कैसे जांचें?
नई दरें लागू होने के बाद मरीज और उनके परिवार संबंधित दवा की कीमत की पुष्टि राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की वेबसाइट या सरकार के Pharma Sahi Daam ऐप के माध्यम से कर सकते हैं।
दवा खरीदते समय इन बातों पर ध्यान दें:
दवा का पूरा नाम और उसकी ताकत यानी डोज की जानकारी मिलाएं।
पैकेट पर दर्ज MRP और बिल पर लिखी कीमत देखें।
सुनिश्चित करें कि संबंधित दवा नई मूल्य-नियंत्रण सूची में शामिल है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का 137 कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित करने का फैसला इलाज की लागत कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संबंधित दवाओं की MRP में 70 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई गई है और नई दरें 9 नवंबर 2026 से लागू होनी निर्धारित हैं।
हालांकि, वास्तविक राहत दवा की नई कीमत और मरीज के उपचार में उसके इस्तेमाल पर निर्भर करेगी। इस फैसले का पूरा असर नई कीमतें लागू होने और बाजार में उनके पालन के बाद स्पष्ट होगा।
महत्वपूर्ण सूचना: यह समाचार सरकारी घोषणा पर आधारित है। दवा की कीमत, उपलब्धता या इलाज में बदलाव करने से पहले आधिकारिक मूल्य सूची और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें
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