बंगाल की सियासत में सियासी संग्राम: शाह के दावे पर TMC का पलटवार, “BJP 50 के आंकड़े को भी नहीं छुएगी”
- byAman Prajapat
- 30 December, 2025
बंगाल की मिट्टी में सियासत कोई नई बात नहीं है। यहां राजनीति सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि गलियों, चाय की दुकानों और आम लोगों की बातचीत में सांस लेती है। और जब चुनाव नज़दीक आते हैं, तो यह ज़मीन और भी गर्म हो जाती है। कुछ ऐसा ही नज़ारा इन दिनों पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान ने इस सियासी आग में घी डालने का काम किया। शाह ने दावा किया कि आने वाले बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। बयान बड़ा था, आवाज़ बुलंद थी, और संदेश सीधा—दिल्ली का भरोसा BJP पर टिका है।
लेकिन बंगाल है, यहां जवाब भी उसी तीखेपन से मिलता है।
TMC का करारा पलटवार
अमित शाह के इस दावे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बिना समय गंवाए सीधा जवाब दे डाला। TMC नेताओं ने साफ कहा कि BJP दो-तिहाई बहुमत तो दूर, 50 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। पार्टी का कहना है कि बंगाल की जनता सब देख रही है, सब समझ रही है, और सही वक्त पर जवाब भी देगी।
TMC प्रवक्ताओं का कहना है कि BJP ज़मीन की हकीकत से कोसों दूर है। बड़े-बड़े मंचों से बड़े-बड़े दावे करना आसान है, लेकिन बंगाल की राजनीति को समझना हर किसी के बस की बात नहीं। यहां भावनाएं मायने रखती हैं, इतिहास बोलता है, और जनता फैसला करती है।
दावों की राजनीति बनाम ज़मीनी सच्चाई
BJP का तर्क है कि केंद्र सरकार की योजनाएं, संगठन की मज़बूती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बंगाल में बड़ा बदलाव ला सकती है। पार्टी को लगता है कि 2021 के चुनावों में जो शुरुआत हुई थी, अब वह एक निर्णायक मोड़ तक पहुंचेगी।
वहीं TMC का दावा इसके ठीक उलट है। पार्टी का कहना है कि बंगाल ने BJP को पहले भी परखा है और अब नतीजा साफ है। TMC नेताओं के मुताबिक, बाहरी राजनीति, केंद्रीय एजेंसियों का दबाव और आक्रामक चुनावी भाषा बंगाल की जनता को रास नहीं आती।
सीधे शब्दों में कहें तो—दिल्ली का गणित और कोलकाता की सियासत, दोनों अलग-अलग दुनिया हैं।
ममता बनर्जी फैक्टर
इस पूरी बहस के केंद्र में एक नाम बार-बार उभरता है—ममता बनर्जी। TMC का मानना है कि ममता बनर्जी आज भी बंगाल की सबसे मजबूत और भरोसेमंद नेता हैं। उनके जमीनी जुड़ाव, संघर्ष की कहानी और राज्य के लिए खड़े होने की छवि को BJP हल्के में ले रही है।
TMC नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी सिर्फ एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि बंगाल की भावना हैं। और यही भावना चुनावी नतीजों में भी झलकेगी।
BJP का आत्मविश्वास, TMC का भरोसा
BJP जहां आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है, वहीं TMC अपने पुराने ट्रैक पर चलने में यकीन रखती है—जनता के बीच रहना, स्थानीय मुद्दों को उठाना और केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई को चुनाव का बड़ा मुद्दा बनाना।
TMC का कहना है कि महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों की परेशानी और संघीय ढांचे पर सवाल जैसे मुद्दे बंगाल में BJP के खिलाफ जाएंगे। पार्टी यह भी आरोप लगाती है कि BJP बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को समझने में नाकाम रही है।

चुनावी माहौल और आगे की राह
जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आएंगे, बयान और तीखे होंगे, आरोप और गहरे होंगे। लेकिन असली जज तो वही है—बंगाल की जनता। अभी के लिए सियासी अखाड़े में शब्दों की तलवारें चल रही हैं।
अमित शाह का दो-तिहाई बहुमत का दावा हो या TMC का 50 सीटों में सिमटने का अनुमान—ये सब सियासत का शोर है। हकीकत का फैसला मतदान के दिन होगा, जब बंगाल की जनता चुपचाप EVM के बटन पर अपनी राय दर्ज करेगी।
आख़िरी बात, बिना घुमा-फिरा कर
सच यही है—बंगाल कोई आसान मैदान नहीं। यहां जीत सिर्फ नारों से नहीं मिलती, बल्कि भरोसे से मिलती है। BJP का आत्मविश्वास अपनी जगह है, TMC का दावा अपनी जगह। लेकिन जब तक वोट नहीं पड़ते, तब तक सब कुछ सिर्फ सियासी कहानी है।
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