कांग्रेस विधायकों को 5 करोड़ का ऑफर? डी.के. शिवकुमार का बड़ा आरोप
- bykrish rathore
- 16 March, 2026
कर्नाटक की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। D. K. Shivakumar, जो वर्तमान में Karnataka के उपमुख्यमंत्री हैं, उन्होंने गंभीर आरोप लगाया है कि Odisha में कांग्रेस विधायकों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की गई।
डी.के. शिवकुमार के अनुसार, ओडिशा में कांग्रेस के कुछ विधायकों को कथित रूप से लगभग 5 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया गया ताकि वे अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाएं। उन्होंने इस मामले को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां भारतीय राजनीति की पारदर्शिता और नैतिकता पर सवाल खड़े करती हैं।
शिवकुमार ने कहा कि अगर किसी विधायक को अपनी विचारधारा के कारण पार्टी बदलनी हो तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन पैसे के लालच में दल बदल करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस तरह की कथित कोशिशों की कड़ी निंदा करते हुए मांग की कि मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।
हालांकि इस आरोप पर अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी एजेंसी द्वारा जांच की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन शिवकुमार के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारत की राजनीतिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति होगी।
भारत की राजनीति में पहले भी कई बार विधायकों और सांसदों की कथित खरीद-फरोख्त के आरोप सामने आते रहे हैं। कई राज्यों में सरकार बनाने या गिराने के दौरान इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे मामलों ने अक्सर राजनीतिक नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर बहस को जन्म दिया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का दायित्व होता है कि वे अपने मतदाताओं के विश्वास को बनाए रखें। यदि विधायकों पर पैसे या अन्य प्रलोभनों के जरिए दबाव डालने की कोशिश की जाती है, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।
इस बीच कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा है कि यदि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर, अन्य राजनीतिक दलों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कुल मिलाकर, डी.के. शिवकुमार का यह बयान एक बड़े राजनीतिक विवाद की शुरुआत बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले की औपचारिक जांच होती है और इन आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है। फिलहाल यह मुद्दा भारतीय राजनीति में पारदर्शिता, नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

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