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भारत में Childhood Obesity Crisis | 2025 में 4.1 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित

भारत में Childhood Obesity Crisis | 2025 में 4.1 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित

हाल ही में World Obesity Federation की एक नई रिपोर्ट ने भारत में बचपन के बढ़ते मोटापे (Childhood Obesity) को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया में बच्चों के मोटापे के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पहला स्थान China के पास है। यह स्थिति भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक भारत में लगभग 4.1 करोड़ बच्चे (41 million) ऐसे हैं जो overweight या obese श्रेणी में आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ सकता है। यदि वर्तमान रुझान जारी रहा, तो 2040 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 5.6 करोड़ (56 million) बच्चों तक पहुंच सकती है

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बचपन में मोटापा केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत भी कर सकता है। मोटापे के कारण बच्चों में कम उम्र में ही हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension), टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट में इसे भविष्य में होने वाले स्वास्थ्य संकट का “विस्फोट” (Explosion) बताया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में मोटापे के बढ़ने के कई प्रमुख कारण हैं। इनमें जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोबाइल और स्क्रीन टाइम में वृद्धि, और असंतुलित खान-पान शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है क्योंकि उनकी जीवनशैली अधिक sedentary हो गई है।

इसके अलावा, कई परिवारों में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी भी एक बड़ी वजह है। बच्चे अक्सर पैकेज्ड फूड, शुगर-युक्त ड्रिंक्स और फास्ट फूड का अधिक सेवन करते हैं, जिससे शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होती रहती है। समय के साथ यह अतिरिक्त वजन मोटापे में बदल जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या को नियंत्रित करना है, तो सरकार, स्कूलों और परिवारों को मिलकर प्रयास करना होगा। स्कूलों में बच्चों को नियमित खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही बच्चों को संतुलित आहार, फल-सब्जियों और पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।

सरकार के स्तर पर भी कई कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे कि जंक फूड के विज्ञापनों पर नियंत्रण, स्कूलों में हेल्दी फूड पॉलिसी लागू करना और बच्चों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में भारत को कम उम्र में होने वाली बीमारियों के बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। बचपन का मोटापा केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़ा बोझ बन सकता है।

इसलिए यह जरूरी है कि माता-पिता, स्कूल और सरकार मिलकर बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें, ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ और मजबूत बन सके।

India ranks 2nd in childhood obesity
भारत में बढ़ता बचपन का मोटापा: विश्व में दूसरे स्थान पर पहुंचा देश

 


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