एशेज 5वां टेस्ट, दिन 5: ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 5 विकेट से रौंदा, सीरीज़ 4-1 से अपने नाम की
- byAman Prajapat
- 08 January, 2026
टेस्ट क्रिकेट की आख़िरी सुबह, और कहानी पहले से लिखी हुई
एशेज 5वें टेस्ट का पांचवां दिन उसी एहसास के साथ शुरू हुआ, जैसा पुराने ज़माने के क्रिकेट में होता था—धूप, खामोश पिच, और दोनों टीमों के चेहरे पर थकान की साफ लकीरें। फर्क बस इतना था कि ऑस्ट्रेलिया जानता था कि कहानी उसकी मुट्ठी में है, और इंग्लैंड… बस आख़िरी पन्ना पलट रहा था।
यह सिर्फ़ एक टेस्ट मैच नहीं था।
यह एशेज की हेकड़ी, घरेलू हालात का दबदबा, और इंग्लैंड की अधूरी बेज़बॉल कहानी का अंतिम अध्याय था।
दिन 5 का खेल: औपचारिकता या आख़िरी उम्मीद?
इंग्लैंड ने दिन की शुरुआत उस स्कोर से की, जहाँ चमत्कार की ज़रूरत थी, रणनीति की नहीं। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों ने वही किया जो उन्होंने पूरी सीरीज़ में किया—लाइन-लेंथ पर टिके रहे, धैर्य रखा और बल्लेबाज़ों को खुद गलती करने दी।
कोई ड्रामा नहीं।
कोई जल्दबाज़ी नहीं।
बस क्लासिक ऑस्ट्रेलियन टेस्ट क्रिकेट।
इंग्लैंड की दूसरी पारी ज़्यादा देर टिक नहीं पाई। कुछ शॉट्स बेवजह आक्रामक थे, कुछ विकेट मजबूरी में गिरे। बेज़बॉल का साहस इस बार अनुभव के सामने फीका पड़ गया।
लक्ष्य का पीछा: ठंडे दिमाग़, गर्म इरादे
5वें दिन लक्ष्य बड़ा नहीं था, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में कुछ भी “आसान” नहीं होता। फिर भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों ने इसे ऐसे खेला जैसे रोज़ का काम हो।
शुरुआती विकेट गिरे, लेकिन घबराहट नहीं दिखी
रन गति नियंत्रित रही
हर गेंद का सम्मान किया गया
यह वही ऑस्ट्रेलिया था जो दशकों से टेस्ट क्रिकेट की रीढ़ रहा है—ना ज़्यादा शो, ना ज़्यादा शोर।
आख़िरकार, ऑस्ट्रेलिया ने 5 विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल किया और सिर्फ़ मैच नहीं, पूरी सीरीज़ पर मुहर लगा दी।
सीरीज़ का नतीजा: स्कोरलाइन नहीं, संदेश ज़्यादा बड़ा
ऑस्ट्रेलिया 4 – इंग्लैंड 1
यह स्कोरलाइन सीधा-सपाट दिखती है, लेकिन इसके पीछे संदेश बहुत साफ़ है:
घरेलू हालात आज भी टेस्ट क्रिकेट में राजा हैं
आक्रामक सोच अच्छी है, लेकिन धैर्य अब भी ज़रूरी है
एशेज सिर्फ़ स्किल नहीं, मानसिक मजबूती भी मांगती है
इंग्लैंड ने कोशिश की, कुछ सत्रों में बाज़ी मारी, लेकिन पूरी सीरीज़ में निरंतरता गायब रही।
इंग्लैंड के लिए सबक: बेज़बॉल को टेस्ट की ज़मीन पर उतारना आसान नहीं
इंग्लैंड की बेज़बॉल रणनीति ने क्रिकेट को मज़ेदार ज़रूर बनाया, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर यह कई बार आत्मघाती साबित हुई।
गलत समय पर आक्रामक शॉट
गेंदबाज़ी में धैर्य की कमी
फील्डिंग में दबाव के क्षणों में चूक
एशेज जैसी सीरीज़ में हर सेशन इम्तिहान होता है। इंग्लैंड ने कुछ पास किए, लेकिन ज़्यादातर में नंबर कटे।
ऑस्ट्रेलिया का दबदबा: पुरानी सोच, नया आत्मविश्वास
ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि उन्होंने खेल को जटिल नहीं बनाया।
गेंदबाज़ों ने विकेट का इंतज़ार किया
बल्लेबाज़ों ने स्थिति के हिसाब से खेला
कप्तानी में जोखिम नहीं, नियंत्रण था
यह जीत सिर्फ़ स्कोरबोर्ड की नहीं थी—यह टेस्ट क्रिकेट की फिलॉसफी की जीत थी।
दर्शकों के लिए एशेज का असली स्वाद
पांच टेस्ट, अलग-अलग कहानियाँ, लेकिन अंत वही—ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी।
यह सीरीज़ याद रखी जाएगी:
लंबे स्पेल्स
थके हुए लेकिन जुझारू खिलाड़ी
और वो खामोश पल, जब मैच शोर नहीं करता, बस फैसला सुनाता है
निष्कर्ष: एशेज फिर ऑस्ट्रेलिया की अलमारी में
एशेज 2025 का अंत उसी अंदाज़ में हुआ, जैसा टेस्ट क्रिकेट पसंद करता है—धीरे, ठोस और निर्विवाद।
ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 5वें टेस्ट में 5 विकेट से हराकर सीरीज़ 4-1 से जीती और एक बार फिर साबित कर दिया कि
एशेज जीतने के लिए सिर्फ़ आक्रामकता नहीं, परंपरा की समझ भी चाहिए।
टेस्ट क्रिकेट ज़िंदा है।
और एशेज?
वो अब भी ऑस्ट्रेलिया की शान है। 🏏🔥
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**Nitish Rana Backs...
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