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AIIMS ने रचा इतिहास: मरीजों के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड लिंकिंग में देशभर में नंबर-1 बना एम्स

AIIMS ने रचा इतिहास: मरीजों के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड लिंकिंग में देशभर में नंबर-1 बना एम्स

देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अब कागज़ों के ढेर से निकलकर डिजिटल भविष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रही है, और इस बदलाव की अगुवाई कर रहा है अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)। मरीजों के हेल्थ रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से लिंक करने के मामले में AIIMS ने पूरे भारत में पहला स्थान हासिल कर लिया है।

यह उपलब्धि सिर्फ़ एक रैंक नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत की हेल्थकेयर प्रणाली अब पुराने, बिखरे हुए रिकॉर्ड सिस्टम को पीछे छोड़कर एकीकृत डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम की ओर बढ़ रही है।

🏥 क्या है हेल्थ रिकॉर्ड लिंकिंग?

हेल्थ रिकॉर्ड लिंकिंग का मतलब है कि किसी भी मरीज की मेडिकल हिस्ट्री —

डॉक्टर की पर्ची

जांच रिपोर्ट

दवाइयों का रिकॉर्ड

ऑपरेशन और इलाज का डेटा

इन सभी को एक यूनिक डिजिटल हेल्थ ID से जोड़ा जाए, ताकि मरीज देश के किसी भी अस्पताल में इलाज कराए, डॉक्टर उसके पुराने रिकॉर्ड तुरंत देख सके।

🇮🇳 आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की बड़ी सफलता

AIIMS की यह उपलब्धि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत सामने आई है। इस मिशन का लक्ष्य है —

“हर नागरिक के लिए एक डिजिटल हेल्थ पहचान और एक सुरक्षित हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम।”

AIIMS ने इस मिशन को ज़मीन पर उतारकर दिखा दिया कि सरकारी संस्थान भी टेक्नोलॉजी में किसी से कम नहीं हैं।

📊 AIIMS क्यों बना नंबर-1?

AIIMS को यह टॉप रैंक कई वजहों से मिली:

सबसे ज़्यादा मरीजों के हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक

तेज़ और सुरक्षित डेटा इंटीग्रेशन सिस्टम

डॉक्टर और स्टाफ की बेहतर ट्रेनिंग

राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म से मजबूत कनेक्टिविटी

मरीजों की सहमति (Consent-based Data Sharing)

AIIMS ने यह साबित कर दिया कि टेक्नोलॉजी सिर्फ़ प्राइवेट अस्पतालों की बपौती नहीं है।

🧬 मरीजों को क्या फायदा होगा?

इस डिजिटल पहल से आम आदमी को सीधे फायदे मिलेंगे:

बार-बार मेडिकल रिपोर्ट ले जाने की ज़रूरत नहीं

इमरजेंसी में डॉक्टर तुरंत पुराना रिकॉर्ड देख पाएंगे

गलत दवा या डुप्लिकेट टेस्ट का खतरा कम

इलाज तेज़ और सटीक होगा

खर्च और समय दोनों की बचत

सीधी भाषा में कहें तो — इलाज स्मार्ट, सुरक्षित और इंसान-केंद्रित होगा।

🖥️ डिजिटल इंडिया की तस्वीर

AIIMS की यह सफलता प्रधानमंत्री के Digital India Vision को भी मज़बूती देती है।
जहाँ पहले सरकारी सिस्टम को सुस्त और अव्यवस्थित माना जाता था, वहीं अब AIIMS जैसे संस्थान यह धारणा तोड़ रहे हैं।

पुराने ज़माने की फाइलें, खोई हुई रिपोर्ट्स और लंबी कतारें — अब इतिहास बनने की राह पर हैं।

👨‍⚕️ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भूमिका

AIIMS के डॉक्टरों और स्टाफ ने इस बदलाव को बोझ नहीं बल्कि अवसर के रूप में अपनाया।
टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल बैठाकर उन्होंने यह दिखा दिया कि

“जब सिस्टम और सोच दोनों बदलें, तभी असली सुधार आता है।”

AIIMS New Delhi | An edge that endures | Top Medical University
AIIMS ने रचा इतिहास: मरीजों के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड लिंकिंग में देशभर में नंबर-1 बना एम्स

🔐 डेटा सुरक्षा पर खास ध्यान

मरीजों के डेटा को लेकर सबसे बड़ा सवाल होता है — सुरक्षा
AIIMS ने स्पष्ट किया है कि:

बिना मरीज की अनुमति कोई डेटा साझा नहीं होगा

रिकॉर्ड पूरी तरह एन्क्रिप्टेड रहेंगे

डेटा का इस्तेमाल सिर्फ़ इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए होगा

यानि निजता के साथ कोई समझौता नहीं।

🚀 भविष्य की दिशा

AIIMS की यह पहल आने वाले समय में:

अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए रोल मॉडल बनेगी

ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देगी

भारत को ग्लोबल डिजिटल हेल्थ लीडर बनने की दिशा में ले जाएगी

✍️ निष्कर्ष

AIIMS का ऑल-इंडिया रैंक-1 हासिल करना सिर्फ़ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भारत का हेल्थकेयर सिस्टम बदल रहा है — जड़ों से, सोच से और तकनीक से।

पुराने तरीके सम्मान के साथ विदा ले रहे हैं, और एक नया, स्मार्ट और डिजिटल भविष्य दस्तक दे चुका है।

और हाँ — सच बोलें तो, यही वो बदलाव है जिसकी देश को बरसों से ज़रूरत थी।


Note: Content and images are for informational use only. For any concerns, contact us at info@rajasthaninews.com.

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