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साबरमती जेल में ISKP आरोपी डॉ. अहमद मोहियुद्धीन सैय्यद पर कैदियों ने किया बर्बर हमला

साबरमती जेल में ISKP आरोपी डॉ. अहमद मोहियुद्धीन सैय्यद पर कैदियों ने किया बर्बर हमला

साबरमती सेंट्रल जेल (अहमदाबाद) में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ राइसिन आतंक साजिश के मुख्य आरोपी डॉ. अहमद मोहियुद्धीन सैय्यद पर अन्य कैदियों ने कथित तौर पर हमला किया। इस मामले ने जेल सुरक्षा की चूक और आतंकी मामलों में बंदियों के बीच तनाव की गंभीरता पर नई चिंता को जन्म दिया है।

घटना का घटनाक्रम

घटना सुबह लगभग 07:00 बजे के आसपास हुई। जेल अधिकारियों के अनुसार, तीन बंदी — जो पहले से ही साबरमती जेल में सजा का सामना कर रहे थे — अचानक डॉ. सैय्यद की हाई-सिक्योरिटी विंग में मौजूद कोठरी में पहुंचे और उनसे बहस शुरू की। 

बातचीत बढ़ने के बाद वह शारीरिक टकराव में बदल गई, और उन तीनों कैदियों ने बेल्ट या पट्टी (strap) का इस्तेमाल करके सैय्यद को मारा।  

बर्बरता इतनी थी कि डॉ. सैय्यद जमीन पर गिर गए। तुरन्त जेल गार्ड और पुलिस कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें उस जगह से हटाया। 

उनकी हालत गंभीर देख, उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर्स ने आँख, चेहरे और अन्य हिस्सों पर चोटों की पुष्टि की है।  

हमलावर कौन हैं?

पुलिस निरीक्षक के. वाई. व्यास के मुताबिक, हमले में शामिल तीन कैदी हैं: अनिल कुमार, शिवम शर्मा, और अंकित लोढी।  

बताया गया है कि दो नमूद व्यक्तियों पर हत्या-मुकदमा है, जबकि तीसरे पर POCSO (बाल-सुरक्षा) से संबंधित मामला दर्ज है। 

शुरुआती रिपोर्ट में जेल प्रशासन या हमलावरों ने हमले के पीछे कोई सुरक्षित राजनीतिक या आतंकवाद-मौ motivated मक़सद न बताते हुए कहा कि यह “देशभक्ति दिखाने” का मामला हो सकता है।  

जांच और सरकारी प्रतिक्रिया

इस गंभीर हमले के बाद गुजरात एंटी-टेरेरिज्म स्क्वॉड (ATS) और जेल प्रबंधन ने तुरंत मोर्चा संभाला। ATS की टीम साबरमती जेल पहुंची और हमले की पूरी परिस्थितियों की समीक्षा शुरू कर दी।  

जेल की एसपी (सुपरिंटेंडेंट) गौरव अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि FIR दर्ज की गई है और तीनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

एक वरिष्ठ जेल अधिकारी ने यह भी कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है — सिर्फ व्यक्तिगत झगड़ा नहीं, बल्कि आतंकी आरोपी और अन्य कैदियों के बीच तनाव या पूर्व निर्धारित साज़िश की संभावना को भी खारिज नहीं किया जा रहा है।  

जेल सुरक्षा को और सख़्त करने की बात की जा रही है, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न दोहराई जाएँ। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि हमले की घटना जेल में सुरक्षा कमियों को उजागर करती है।  

Attempt to flaunt their patriotism': Ricin terror plot accused Dr Syed  Jilani attacked inside Gujarat's Sabarmati Jail by 3 inmates | Ahmedabad  News - The Times of India
Who Attacked ISI Terrorist Dr Ahmed Inside Sabarmati Jail? Full Details Emerge

डॉ. अहमद मोहियुद्धीन सैय्यद कौन हैं?

डॉ. सैय्यद पर गंभीर आतंकवादी आरोप हैं। गुजरात ATS ने कथित राइसिन साजिश के तहत उन्हें 8 नवंबर को गिरफ्तार किया था। 

उनके साथ दो और संदिग्ध भी पकड़े गए थे, और अधिकारियों ने कहा था कि उनके पास दो ग्लॉक पिस्टल, 30 कारतूस, और 4 लीटर कास्टर तेल (जिससे रिसिन बनाया जा सकता है) बरामद हुए थे।  

एजेंसी का आरोप है कि वे ISKP (Islamic State – Khorasan Province) से जुड़े हैं और आतंकवादी हमले की योजना बना रहे थे।  

राइसिन एक बेहद ज़हरीला जैविक टॉक्सिन है, और विशेषज्ञों का कहना है कि यह आतंकवाद की दुनिया में खतरनाक हथियारों में गिना जाता है।  

क्या संकेत मिलता है?

इस हमले से ये सवाल उठते हैं कि जेल के उच्च सुरक्षा विंग में आतंकी आरोपियों की सुरक्षा में कमी क्यों थी। अगर तीन अन्य बंदी इतनी आसानी से एक आतंकवादी आरोपी पर हमला कर सकते हैं, तो यह जेल की ताकत और सुरक्षा तंत्र पर एक बड़ा कलंक है।

यह भी सोचा जा रहा है कि हमला “देशभक्ति” के नाम पर किया गया हो — हमलावरों ने शायद अपने आप को “देशभक्त” साबित करना चाहा हो, या यह कोई नियोजित तनाव उत्पन्न करने की कोशिश हो।  

दूसरी ओर, यह मामला आतंकी मामलों में जेलों के अंदर बंदियों के बीच आपसी तनाव की गंभीरता को दिखाता है — जहां “सह-आरोपी” और “देशभक्त दुसरे जेल कैदी” के बीच वैचारिक और व्यवहारिक जंग हो सकती है।

भविष्य की राह

ATS और पुलिस को अब यह स्पष्ट करना होगा कि हमले के पीछे मकसद क्या था — व्यक्तिगत रंजिश, आतंकवाद-विरोधी भावना या कोई बाहरी साजिश।

जेल प्रशासन को अपनी उच्च-सुरक्षा कोठरियों (high-security wings) की समीक्षा करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादी आरोपी कैदियों की सुरक्षा और उनकी देखभाल हो।

यह घटना इस बात का संकेत भी है कि भारत में जैव-आतंकवाद (जैसे राइसिन की साजिश) जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना सिर्फ गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि बंदी प्रबंधन और जेल सुरक्षा के स्तर से भी करना होगा।

साथ ही, इस मामले की मीडिया कवरेज और सार्वजनिक हित भी बहुत ज़्यादा है — इससे यह हो सकता है कि अन्य आतंकवादी मामलों में भी जेल के अंदर सुरक्षा के मुद्दे दोबारा उठें।


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