स्विट्ज़रलैंड के बर्फ़ीले पहाड़ों में बसा दावोस एक बार फिर ग्लोबल पावर का अखाड़ा बना। World Economic Forum 2026 में CEOs, राष्ट्राध्यक्ष, नीति-निर्माता और टेक दिग्गज इकट्ठा हुए, लेकिन इस बार माहौल अलग था। ना वो पुरानी आत्मविश्वास भरी मुस्कान, ना वो “सब कंट्रोल में है” वाला अंदाज़।
दुनिया थकी हुई है—
युद्धों से
महंगाई से
जलवायु आपदाओं से
और सबसे ज़्यादा, अनिश्चित भविष्य से
WEF 2026 से पाँच बड़े टेकअवे उभरकर सामने आए, जो आने वाले दशक की तस्वीर साफ़ करते हैं।
🔑 टेकअवे 1: वैश्विक अर्थव्यवस्था अब ‘रिकवरी मोड’ में नहीं, ‘सर्वाइवल मोड’ में है
दावोस में साफ़ कहा गया— पुराना नॉर्मल वापस नहीं आएगा।
2026 में भी दुनिया की अर्थव्यवस्था दबाव में है।
ऊँची ब्याज दरें
कर्ज़ में डूबे देश
सप्लाई चेन का स्थायी असंतुलन
नेताओं ने माना कि “स्लो ग्रोथ ही न्यू रियलिटी है।” अब सवाल तेज़ विकास का नहीं, स्थिरता और सहनशीलता (Resilience) का है।
दावोस का संदेश साफ़ था: “जो देश और कंपनियाँ खुद को बदलेंगी, वही टिकेंगी।”
🤖 टेकअवे 2: AI अब भविष्य नहीं, वर्तमान का संकट और समाधान दोनों है
WEF 2026 में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस हर चर्चा का केंद्र रहा। लेकिन इस बार जश्न कम, चिंता ज़्यादा थी।
मुख्य बातें:
AI नौकरियाँ छीन भी रहा है और बना भी रहा है
रेगुलेशन के बिना AI लोकतंत्र और प्राइवेसी के लिए खतरा है
डेवलपिंग देशों के लिए AI अवसर भी है और जोखिम भी
टेक लीडर्स ने माना कि “अगर AI को इंसानी मूल्यों से नहीं जोड़ा गया, तो यह शक्ति विनाशकारी हो सकती है।”
Gen-Z भाषा में कहें तो:
AI cool है, लेकिन बिना ब्रेक वाली गाड़ी भी है।
🌱 टेकअवे 3: जलवायु संकट अब ‘भविष्य की चेतावनी’ नहीं, ‘वर्तमान की सज़ा’ है
दावोस 2026 में क्लाइमेट चेंज पर कोई बहस नहीं थी— सिर्फ़ एक स्वीकारोक्ति थी।
बाढ़
सूखा
जंगल की आग
हीटवेव
ये सब अब “नेचुरल डिज़ास्टर” नहीं, पॉलिसी फेल्योर माने गए।
WEF में यह माना गया कि ग्रीन एनर्जी की बातें बहुत हुईं, एक्शन बहुत कम।
“नेट-ज़ीरो का वादा करना आसान है, लेकिन उसकी कीमत चुकाना मुश्किल।”
🌐 टेकअवे 4: दुनिया फिर से ब्लॉक्स में बंट रही है
WEF 2026 में भू-राजनीति की छाया हर जगह दिखी। दुनिया अब ग्लोबलाइजेशन से फ्रैगमेंटेशन की ओर बढ़ रही है।
ट्रेड ब्लॉक्स
टेक्नोलॉजी वॉर्स
डिप्लोमैटिक टेंशन
नेताओं ने माना कि विश्वास की कमी सबसे बड़ा संकट है।
दावोस का कड़वा सच:
“देश अब साथ चलने की नहीं, पहले खुद बचने की सोच रहे हैं।”
WEF 2026: दावोस से निकले 5 बड़े संदेश, जो दुनिया की दिशा तय करेंगे
👩💼 टेकअवे 5: भविष्य की नौकरियाँ डिग्री से नहीं, स्किल से तय होंगी
WEF 2026 की सबसे ज़मीनी बात यही थी। डिग्री ≠ जॉब सिक्योरिटी
अब ज़रूरी है:
डिजिटल स्किल्स
क्रिएटिव थिंकिंग
री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग
युवाओं के लिए संदेश सीधा था—
“जो सीखना बंद करेगा, वही पीछे रह जाएगा।”
सरकारों से कहा गया कि एजुकेशन सिस्टम को 20वीं सदी से निकालकर 21वीं सदी में लाया जाए।
🧠 निष्कर्ष: दावोस 2026 ने आईना दिखाया
WEF 2026 कोई जादुई समाधान लेकर नहीं आया। इसने सिर्फ़ सच बोला—कड़वा, ठंडा, और साफ़।
दुनिया अनिश्चित है
चुनौतियाँ असली हैं
और समय कम है
दावोस का असली संदेश यही था:
“अब बातें नहीं, फैसले चाहिए।”
पुराने ज़माने की कहावत है— समय किसी का इंतज़ार नहीं करता। WEF 2026 ने बस यही याद दिलाया।
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