विदेशी निवेशकों की बिकवाली से शेयर बाजार फिसला, शुरुआती तेजी के बाद ब्लू-चिप शेयरों में भारी दबाव
- byAman Prajapat
- 13 January, 2026
भारतीय शेयर बाजार ने आज सुबह उम्मीदों की धूप में आंखें खोली थीं, लेकिन दोपहर होते-होते माहौल बदल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी ने हल्की तेजी दिखाई, निवेशकों को लगा कि शायद बाजार फिर से रफ्तार पकड़ लेगा। मगर ये खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की कमर तोड़ दी और देखते-ही-देखते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए।
आज का बाजार एक बार फिर याद दिला गया कि जब विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII पीछे हटते हैं, तो बाजार की चाल भी लड़खड़ा जाती है। विदेशी फंड आउटफ्लो का सीधा असर ब्लू-चिप शेयरों पर दिखा, जिन पर आमतौर पर निवेशकों को सबसे ज्यादा भरोसा होता है।
🔻 शुरुआती तेजी, फिर अचानक ब्रेक
कारोबार की शुरुआत में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में हल्की खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स कुछ अंकों की बढ़त के साथ खुला और निफ्टी भी हरे निशान में था। लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। नतीजा — बाजार की दिशा पलट गई।
यह कोई पहली बार नहीं है। बाजार का इतिहास गवाह है कि जब भी वैश्विक संकेत कमजोर होते हैं और डॉलर मजबूत होता है, विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। आज भी वही पुरानी कहानी, वही पुराना दर्द।
🌍 विदेशी फंड आउटफ्लो बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती, वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की बढ़ती ताकत के कारण विदेशी निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने भारतीय बाजार से पैसा निकाला, जिसका असर सीधे सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा।
सीधी भाषा में कहें तो — पैसा बाहर गया, बाजार नीचे आया। इसमें कोई जादू नहीं, बस बाजार का कड़वा सच है।
📉 ब्लू-चिप शेयरों में बिकवाली
आज की गिरावट सबसे ज्यादा उन शेयरों में दिखी जिन्हें आम निवेशक “सुरक्षित” मानता है। बड़े बैंक, आईटी दिग्गज और चुनिंदा इंडस्ट्रियल शेयरों में जबरदस्त दबाव देखा गया। ब्लू-चिप शेयरों में बिकवाली ने बाजार की धार को कुंद कर दिया।
जो शेयर बाजार की रीढ़ माने जाते हैं, जब वही कमजोर पड़ जाएं, तो पूरा ढांचा हिल जाता है — और आज वही हुआ।
🏦 सेक्टरों का हाल
बैंकिंग सेक्टर: भारी बिकवाली, खासकर बड़े निजी बैंकों में दबाव
आईटी सेक्टर: डॉलर मजबूत होने के बावजूद मुनाफावसूली हावी
ऑटो सेक्टर: सीमित गिरावट, लेकिन सपोर्ट नहीं मिला
एफएमसीजी: अपेक्षाकृत स्थिर, लेकिन खरीदारी की कमी
आज बाजार साफ-साफ कह रहा था — “जोखिम लो, लेकिन संभलकर।”
🧠 निवेशकों की सोच में बदलाव
रिटेल निवेशक अब पहले से ज्यादा सतर्क हो चुके हैं। कोविड के बाद आए बुल रन ने कई नए निवेशकों को बाजार से जोड़ा, लेकिन अब उतार-चढ़ाव ने उन्हें सिखा दिया है कि शेयर बाजार कोई शॉर्टकट नहीं, बल्कि लंबी दौड़ का खेल है।
आज के कारोबारी सत्र में कई निवेशक साइडलाइन पर खड़े दिखे। न ज्यादा खरीदारी, न ज्यादा जोखिम — बस इंतजार।

📊 बाजार की चाल क्या संकेत देती है?
आज की गिरावट यह इशारा करती है कि बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन मोड में है। जब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं और वैश्विक संकेत साफ नहीं होते, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद करना खुद को धोखा देना होगा।
पुराने ट्रेडर्स हमेशा कहते हैं — “मार्केट में सब्र सबसे बड़ा हथियार है।” आज भी वही सच साबित हुआ।
🔮 आगे का रास्ता
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। अगर एफआईआई की बिकवाली थमती है, तो बाजार फिर से संभल सकता है। लेकिन अगर आउटफ्लो जारी रहा, तो उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
✍️ निष्कर्ष
आज का दिन बाजार के लिए कोई बड़ा हादसा नहीं था, लेकिन यह एक साफ चेतावनी जरूर था। शुरुआती तेजी के झांसे में आकर आंख बंद करके निवेश करना अब समझदारी नहीं। बाजार ने फिर याद दिलाया — यहां भावनाओं से नहीं, समझ से पैसा बनता है।
सीधा-सा फंडा है:
जो शोर में खरीदेगा, वो सन्नाटे में पछताएगा।
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जयपुर मे सोने और चां...
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