₹40 हजार करोड़ की सिंधिया राजघराने की संपत्ति पर घमासान! प्रतिमा देवी के आरोपों से नया मोड़, 14 अक्टूबर को कोर्ट सुनाएगा फैसला
- bySanjay
- 09 October, 2026
₹40 हजार करोड़ की सिंधिया राजघराने की संपत्ति पर घमासान! प्रतिमा देवी के आरोपों से नया मोड़, 14 अक्टूबर को कोर्ट सुनाएगा फैसला
ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की करीब ₹40 हजार करोड़ की संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। ग्वालियर की अदालत में संपत्ति के बंटवारे और उससे संबंधित समझौते पर उठाई गई आपत्तियों को लेकर दोनों पक्षों के वकीलों की बहस पूरी हो चुकी है। अब अदालत ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। इस सुनवाई पर परिवार के सदस्यों के साथ-साथ इस लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद पर नजर रखने वालों की निगाहें टिकी हैं।
इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब प्रतिमा देवी ने संपत्ति बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षरों को लेकर आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि सहमति से हुए बंटवारे के दस्तावेजों पर उनसे धोखे से हस्ताक्षर कराए गए थे। उन्होंने अदालत से मांग की है कि इस मामले में साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया जाए, ताकि उनके दावों की जांच हो सके।
प्रतिमा देवी ने समझौते पर क्यों उठाए सवाल?

प्रतिमा देवी, दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की रिश्तेदार हैं। उन्होंने अदालत में अतिरिक्त आवेदन देकर संपत्ति बंटवारे से संबंधित समझौते की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन दस्तावेजों को सहमति के आधार पर तैयार किया गया बताया जा रहा है, उन पर हस्ताक्षर उनकी वास्तविक सहमति से नहीं हुए थे।
प्रतिमा देवी की ओर से अदालत से आग्रह किया गया है कि उनके आरोपों की जांच के लिए साक्ष्य दर्ज किए जाएं। इस कारण अदालत के सामने अब यह महत्वपूर्ण प्रश्न है कि समझौते पर आगे बढ़ने से पहले उनकी आपत्तियों पर साक्ष्य लिए जाएं या उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही निर्णय किया जाए।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि धोखे से हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप प्रतिमा देवी का पक्ष है। इस पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना अभी बाकी है।
वसुंधरा राजे और अन्य पक्षों की ओर से क्या कहा गया?
इस विवाद में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे सहित परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़े पक्ष भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी ओर से अदालत में प्रतिमा देवी की आपत्तियों का विरोध किया गया है।
दूसरे पक्ष का तर्क है कि संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर सहमति से किए गए थे। इस तरह अदालत के सामने दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। एक ओर प्रतिमा देवी अपने हस्ताक्षरों की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि समझौते पर सहमति थी।
दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने तर्क रखे हैं और अंतरिम आवेदनों पर बहस पूरी हो चुकी है। अब अदालत को तय करना है कि इन आपत्तियों पर आगे किस कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।
14 अक्टूबर को क्या तय करेगा न्यायालय?
इस मामले में 14 अक्टूबर 2026 की तारीख महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस तारीख पर अदालत के सामने मुख्य प्रश्न प्रतिमा देवी की आपत्ति और साक्ष्य प्रस्तुत करने के उनके अनुरोध से संबंधित है। इसे पूरे संपत्ति विवाद का अंतिम निपटारा मानना फिलहाल सही नहीं होगा।
अदालत यह तय कर सकती है कि प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया जाए या समझौते से संबंधित आवेदन पर आगे किस तरह निर्णय लिया जाए। इसके बाद मामले की अगली कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।
दशकों से चला आ रहा है संपत्ति का विवाद
सिंधिया राजपरिवार की संपत्तियों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। इसमें उत्तराधिकार, संपत्ति पर अधिकार और परिवार के सदस्यों के बीच हुए समझौते जैसे प्रश्न शामिल रहे हैं। करीब ₹40 हजार करोड़ की बताई जा रही संपत्ति के मूल्य और उसके बंटवारे को लेकर यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा है।
अब प्रतिमा देवी की आपत्ति ने समझौते की प्रक्रिया को लेकर एक नया कानूनी सवाल खड़ा कर दिया है। 14 अक्टूबर को आने वाला आदेश यह तय करने में अहम होगा कि इस आपत्ति की जांच के लिए आगे साक्ष्य दर्ज किए जाएंगे या अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अगला कदम उठाएगी।
फिलहाल, इस मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है। 14 अक्टूबर की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि संपत्ति बंटवारे से जुड़े समझौते और प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर अदालत आगे किस दिशा में बढ़ेगी।
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राजस्थान में अपराधों...
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