राजस्थान पंचायत चुनाव से पहले BJP-कांग्रेस ने झोंकी ताकत, 3 लाख कार्यकर्ताओं के साथ गांवों में उतरेगी बीजेपी; कांग्रेस भी तैयार
- bySanjay
- 06 October, 2026
राजस्थान पंचायत चुनाव से पहले BJP-कांग्रेस ने झोंकी ताकत, 3 लाख कार्यकर्ताओं के साथ गांवों में उतरेगी बीजेपी; कांग्रेस भी तैयार
जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने गांवों तक संगठन को मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों की तैयारी तेज कर दी है। 6 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक बीजेपी पंचायत चुनाव में बड़े स्तर पर संगठनात्मक ताकत लगाने की तैयारी कर रही है, जबकि कांग्रेस भी स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार चयन और संगठन को सक्रिय करने पर जोर दे रही है।
बीजेपी गांव-गांव संगठन मजबूत करने की तैयारी में
अमर उजाला की आज की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया निकाय चुनाव में बढ़त के बाद बीजेपी पंचायत चुनाव के लिए करीब 3 लाख कार्यकर्ताओं को गांवों में सक्रिय करने की तैयारी कर रही है। पार्टी का फोकस बूथ और पंचायत स्तर तक संगठन को मजबूत करने तथा चुनावी अभियान को स्थानीय मुद्दों से जोड़ने पर है।
पंचायत चुनावों में स्थानीय संगठन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। गांवों में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय समीकरण और पंचायत स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनते हैं। इसलिए दोनों प्रमुख दल अब अपने-अपने संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं।
कांग्रेस भी उम्मीदवार चयन और संगठन पर दे रही जोर
कांग्रेस की ओर से भी पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज की जा रही हैं। पार्टी स्थानीय और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने तथा चुनावी अभियान में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस के सामने हालिया निकाय चुनावों के बाद संगठनात्मक स्तर पर कुछ चुनौतियां भी हैं। पार्टी ने नगर निकाय चुनावों में कथित क्रॉस-वोटिंग और अन्य शिकायतों की जांच के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी को अपनी रिपोर्ट देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
पंचायत चुनाव के कार्यक्रम में आज बदलाव
पंचायती राज चुनाव की तारीखों को लेकर भी आज महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, धनतेरस के दिन मतदान न हो, इसे ध्यान में रखते हुए पहले तीन चरणों की मतदान तिथियों को एक-एक दिन पहले किया गया है। चौथे चरण के कार्यक्रम में बदलाव नहीं किया गया है।
चुनाव कार्यक्रम में बदलाव का सीधा असर उम्मीदवारों की तैयारियों, नामांकन प्रक्रिया और प्रचार की टाइमलाइन पर पड़ेगा। ऐसे में राजनीतिक दलों को भी अपने स्थानीय कार्यक्रम और संगठनात्मक गतिविधियों को संशोधित करना पड़ सकता है।
महिला आरक्षण से बदलेंगे गांवों के राजनीतिक समीकरण
राजस्थान पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण भी इस बार महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा है। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 7,201 गांवों में महिला सरपंच चुनी जाएंगी और 20 जिलों में प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
इस आरक्षण व्यवस्था के चलते राजनीतिक दलों को उम्मीदवार चयन में नए समीकरणों पर काम करना होगा। कई पंचायतों में पहली बार नए राजनीतिक परिवारों और स्थानीय चेहरों को चुनाव मैदान में उतरने का अवसर मिल सकता है।
कांग्रेस ने पुलिस और सरकारी मशीनरी को लेकर उठाए सवाल
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव भी सामने आया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हालिया निकाय चुनावों के दौरान कथित पुलिस हस्तक्षेप और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर डीजीपी को ज्ञापन दिया है।
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में 152 FIR और शिकायतों का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। ये कांग्रेस के आरोप हैं; इन आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष का अलग दृष्टिकोण भी सामने आया है।
BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ रही राजनीतिक बयानबाजी
पंचायत चुनाव नजदीक आने के साथ BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो रही है। बीजेपी की ओर से कांग्रेस के चुनावी आरोपों को खारिज किया गया है, जबकि कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और प्रशासनिक भूमिका को लेकर सवाल उठा रही है।
अब दोनों दलों की असली चुनौती गांवों में अपने संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों का चयन करने की होगी। पंचायत चुनाव में राज्य स्तर के बड़े नेताओं के साथ-साथ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
गांवों के स्थानीय मुद्दे बनेंगे चुनावी हथियार
पंचायत चुनाव के दौरान पानी, बिजली, सड़क, सिंचाई, रोजगार, किसानों से जुड़े मुद्दे और स्थानीय विकास जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। कांग्रेस पहले ही किसानों से जुड़े खाद, बीज, बिजली और सिंचाई जैसे मुद्दों को उठाती रही है। वहीं बीजेपी की रणनीति संगठनात्मक नेटवर्क और सरकार के कामकाज को गांवों तक पहुंचाने पर केंद्रित है।
ऐसे में आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं रहेंगे, बल्कि दोनों प्रमुख दलों के लिए ग्रामीण राजस्थान में संगठन और राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा भी होंगे।
अब टिकट वितरण पर रहेगी नजर
चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ सबसे ज्यादा नजर संभावित उम्मीदवारों की सूची और टिकट वितरण पर रहेगी। पंचायत समिति, जिला परिषद, प्रधान, जिला प्रमुख और सरपंच पदों के लिए स्थानीय स्तर पर दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, 6 अक्टूबर 2026 को राजस्थान की राजनीति में पंचायत चुनाव सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। BJP बड़े संगठनात्मक अभियान की तैयारी में है, कांग्रेस अपने स्थानीय नेटवर्क और उम्मीदवार चयन को मजबूत करने में जुटी है और चुनाव कार्यक्रम में बदलाव के बाद दोनों दलों के पास अब अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने का समय और स्पष्ट हो गया है।
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