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राजस्थान मेयर चुनाव में क्रॉस-वोटिंग ने बदला समीकरण, 25 सितंबर को जयपुर-जोधपुर-कोटा पर नजर

राजस्थान मेयर चुनाव में क्रॉस-वोटिंग ने बदला समीकरण, 25 सितंबर को जयपुर-जोधपुर-कोटा पर नजर

राजस्थान मेयर चुनाव में क्रॉस-वोटिंग ने बदला समीकरण, 25 सितंबर को जयपुर-जोधपुर-कोटा पर नजर

जयपुर: राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में महापौर पद के चुनाव ने प्रदेश की स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कई नगर निगमों में पार्टी के पार्षदों की संख्या और मेयर चुनाव में मिले वोटों के बीच अंतर देखने को मिला है। खास तौर पर अजमेर और पाली में क्रॉस-वोटिंग की चर्चा ने राजनीतिक समीकरणों को सुर्खियों में ला दिया है।

अजमेर में बदला पूरा गणित

अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के पास भाजपा से ज्यादा पार्षद होने के बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा मेयर चुनी गईं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भाजपा के पास 32 और कांग्रेस के पास 37 पार्षद थे, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद भी निर्णायक स्थिति में थे। मतदान में कांग्रेस की ओर से क्रॉस-वोटिंग की बात सामने आई।

यह परिणाम इस वजह से महत्वपूर्ण रहा क्योंकि पार्षदों की संख्या का सीधा गणित मेयर चुनाव के अंतिम परिणाम में उसी रूप में दिखाई नहीं दिया।

पाली में भी क्रॉस-वोटिंग की चर्चा

पाली नगर निगम में भी मेयर चुनाव के दौरान क्रॉस-वोटिंग की चर्चा रही। यहां भाजपा की नमिता बुबकिया ने कांग्रेस की बागी प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को हराया। रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को 33 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 3 वोट और अन्य को 29 वोट मिले।

बीकानेर में कांग्रेस ने दर्ज की जीत

दूसरी ओर बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर चुने गए। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें 50 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र शेखावत को 30 वोट मिले। इस तरह बीकानेर उन नगर निगमों में रहा जहां कांग्रेस मेयर पद हासिल करने में सफल रही।

सात निगमों के नतीजों में अलग-अलग तस्वीर

अब तक सामने आए सात नगर निगमों के मेयर चुनावों में भाजपा ने छह और कांग्रेस ने एक मेयर पद जीता है। भाजपा ने अजमेर, अलवर, पाली, उदयपुर के साथ भीलवाड़ा और भरतपुर में मेयर पद हासिल किया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला विजयी रहे।

हालांकि इन परिणामों को केवल पार्टी के पार्षदों की संख्या से समझना आसान नहीं है। निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और कुछ जगहों पर मतदान के दौरान सामने आए क्रॉस-वोटिंग के मामलों ने चुनावी गणित को प्रभावित किया।

अब जयपुर, जोधपुर और कोटा की बारी

राजस्थान की राजनीति में अब सबसे ज्यादा नजर जयपुर, जोधपुर और कोटा पर है। इन तीनों नगर निगमों में मेयर चुनाव 25 सितंबर 2026 को होने हैं और मतदान के बाद उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

जोधपुर में भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया है। इससे 100 सदस्यीय निगम में भाजपा की संख्या 45 से बढ़कर 52 बताई गई है।

जयपुर में भी मेयर पद के लिए मुकाबला अब मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच केंद्रित हो गया है, जबकि कोटा में भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन के बीच मुकाबला तय बताया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है 25 सितंबर का चुनाव?

जयपुर, जोधपुर और कोटा राजस्थान के प्रमुख शहरी केंद्र हैं। इन नगर निगमों के मेयर चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहां पार्षदों का गणित, निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और संभावित क्रॉस-वोटिंग परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

हाल के निकाय चुनावों में सामने आए परिणामों ने यह भी दिखाया है कि पार्षदों की संख्या और मेयर चुनाव के अंतिम वोटों के बीच अंतर संभव है। इसलिए 25 सितंबर को होने वाली वोटिंग पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल जयपुर, जोधपुर और कोटा के परिणाम आने बाकी हैं। 25 सितंबर की वोटिंग के बाद ही इन तीनों शहरों में मेयर की तस्वीर साफ होगी


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