राजस्थान के 16 जिलों में सूखे का संकट, 16,400 गांवों में पानी-चारे की किल्लत; सरकार बना रही विशेष राहत योजना
- bySanjay
- 02 October, 2026
राजस्थान के 16 जिलों में सूखे का संकट, 16,400 गांवों में पानी-चारे की किल्लत; सरकार बना रही विशेष राहत योजना

राजस्थान में इस साल मानसून के दौरान बारिश के असमान वितरण का असर अब कई इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश के 16 जिलों में सूखे और अकाल जैसे हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष राहत योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक करीब 16,400 गांवों और 52 शहरों में पेयजल, पशुओं के लिए चारे और ग्रामीण रोजगार से जुड़ी परेशानियां सामने आ रही हैं।
बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी और मध्य राजस्थान के बड़े हिस्सों में बताया गया है। कई प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य बारिश के मुकाबले भारी कमी दर्ज की गई है। ऐसे में सरकार अब पानी की उपलब्धता, पशुधन के लिए चारा, रोजगार और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत जैसे मुद्दों को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रही है।
16 जिलों में सूखे जैसे हालात

ताजा रिपोर्ट के अनुसार सूखे की स्थिति से प्रभावित जिलों में पश्चिमी राजस्थान के कई जिले शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रभावित इलाकों के बड़े हिस्से में सामान्य से 33 प्रतिशत तक भी बारिश नहीं हुई।
अत्यधिक प्रभावित गांवों की संख्या कई जिलों में काफी ज्यादा बताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- बाड़मेर — 2,460 गांव
- जोधपुर — 1,838 गांव
- नागौर — 1,589 गांव
- जयपुर — 1,400 गांव
- बालोतरा — 1,216 गांव
- जालोर — 1,117 गांव
- अजमेर — 1,134 गांव
- पाली — 1,030 गांव
- फलोदी — 1,064 गांव
- जैसलमेर — 961 गांव
- चूरू — 934 गांव
- बीकानेर — 919 गांव
- ब्यावर — 787 गांव
- सिरोही — 530 गांव
ये आंकड़े प्रभावित गांवों की स्थिति का संकेत देते हैं और बताते हैं कि समस्या केवल एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है।
बारिश की कमी ने बढ़ाई परेशानी
राजस्थान में मानसून के दौरान बारिश का वितरण इस साल काफी असमान रहा। अगस्त के अंत में भी मौसम संबंधी आंकड़ों में राज्य के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने की बात सामने आई थी। उस समय 41 में से 18 जिलों को बारिश की कमी वाली श्रेणी में बताया गया था और पाली, जालोर, जैसलमेर, बांसवाड़ा तथा उदयपुर जैसे जिलों में कमी ज्यादा थी।
सितंबर की शुरुआत में भी राजस्थान में कुल बारिश सामान्य से करीब 21 प्रतिशत कम दर्ज की गई थी। उस समय 21 जिलों में बारिश की कमी बताई गई थी, जबकि जोधपुर और उदयपुर संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल थे।
अब मानसून सीजन समाप्त होने के बाद बारिश की कमी वाले इलाकों में पानी और चारे की समस्या अधिक गंभीर रूप में सामने आने की आशंका है।
16,400 गांवों के लिए राहत योजना पर काम

सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। रिपोर्ट के अनुसार चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह योजना करीब 15 दिनों में सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद सूखा प्रभावित इलाकों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज पर फैसला हो सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में आपदा प्रबंधन, जलदाय, जल संसाधन, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभागों के अधिकारी शामिल हैं। लक्ष्य यह है कि जिन इलाकों में पानी और चारे की कमी ज्यादा है, वहां जरूरत के मुताबिक राहत पहुंचाई जा सके।
पेयजल संकट से निपटने के लिए 650 वाहन और 3,200 श्रमिक
सूखे जैसे हालात वाले क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती पेयजल की बताई जा रही है। इसके लिए सरकार की ओर से 650 पानी के वाहन और करीब 3,200 श्रमिक तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा बंद पड़े हैंडपंपों की मरम्मत के लिए 150 वाहनों को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध मौजूदा जल स्रोतों को जल्द से जल्द चालू करना है।
स्थानीय स्तर पर तुरंत कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टरों को भी आपातकालीन मद से खर्च करने का अधिकार दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कलेक्टरों को स्थानीय जरूरत के मुताबिक जल व्यवस्था पर राशि स्वीकृत करने की व्यवस्था की गई है।
इंसानों के साथ पशुधन के लिए भी चुनौती
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता का संबंध केवल घरेलू जरूरतों से नहीं है। बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे में पानी की कमी के साथ पशुओं के लिए चारे और पानी की उपलब्धता भी बड़ी चिंता बन सकती है।
विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए राहत योजना में पेयजल के साथ पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था को भी प्रमुखता दिए जाने की जरूरत सामने आ रही है।
रोजगार पर भी पड़ सकता है असर
कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ता है। जहां खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिलती, वहां उत्पादन प्रभावित हो सकता है। खेती और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीण परिवारों की आय पर इसका असर पड़ने की संभावना रहती है।
इसी वजह से प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत भी बढ़ सकती है। राज्य सरकार की प्रस्तावित राहत योजना में रोजगार से जुड़ी जरूरतों को भी शामिल किए जाने की बात रिपोर्ट में सामने आई है।
नहर क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति
राज्य सरकार की योजना में इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों के लिए अलग रणनीति तैयार करने की बात भी सामने आई है। उपलब्ध जल और अतिरिक्त आवश्यकता का आकलन करके पानी के वितरण की निगरानी बढ़ाने की योजना है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध जल संसाधनों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जाए और प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों तथा पशुधन के लिए पेयजल की व्यवस्था बनी रहे।
राजस्थान में इस बार बारिश का असमान वितरण क्यों बना चिंता?
राजस्थान में बारिश की कमी हर जिले में एक जैसी नहीं रही। कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि कई जिलों में कमी दर्ज की गई। अगस्त के आंकड़ों में पाली, जालोर, बांसवाड़ा और जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में बड़ी कमी सामने आई थी, जबकि कुछ अन्य जिलों में सामान्य से अधिक बारिश भी दर्ज हुई।
यही असमानता अब जल प्रबंधन के लिए चुनौती बन रही है। किसी इलाके में बारिश कम होने पर वहां जलाशयों, भूजल और स्थानीय जल स्रोतों पर दबाव बढ़ता है, जबकि दूसरे इलाके में हुई अतिरिक्त बारिश हमेशा उस कमी वाले क्षेत्र तक नहीं पहुंच पाती।
अक्टूबर में भी गर्मी ने बढ़ाई चिंता
मानसून की विदाई के बाद राजस्थान के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने से पानी की मांग बढ़ सकती है। बारिश के बाद मिट्टी में उपलब्ध नमी भी समय के साथ कम होती है। ऐसे में जिन इलाकों में मानसून के दौरान पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, वहां अक्टूबर और आगे के महीनों में जल संकट पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
देश स्तर पर भी 2026 का मानसून कमजोर रहा। रॉयटर्स ने 30 सितंबर को रिपोर्ट किया कि जून-सितंबर 2026 के दौरान भारत में मानसूनी बारिश सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम रही और यह एक दशक से अधिक समय में सबसे कम मानसूनी बारिश रही।
अब सरकार के सामने क्या बड़ी चुनौती है?
राजस्थान में मौजूदा स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में सरकार के सामने कई अहम चुनौतियां रहेंगी—
- प्रभावित गांवों में नियमित पेयजल उपलब्ध कराना।
- पशुधन के लिए पर्याप्त पानी और चारे की व्यवस्था करना।
- बंद पड़े हैंडपंप और स्थानीय जल स्रोतों को जल्द चालू करना।
- पानी के टैंकरों की नियमित निगरानी और जरूरत के अनुसार वितरण।
- प्रभावित ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना।
- उपलब्ध जलाशयों और नहरों के पानी का प्रभावी प्रबंधन।
- जिन क्षेत्रों में फसल उत्पादन प्रभावित हुआ है, वहां स्थिति का आकलन करना।
राज्य सरकार की प्रस्तावित विशेष राहत योजना और आगामी वित्तीय पैकेज से यह स्पष्ट होगा कि सूखे जैसे हालात से प्रभावित गांवों के लिए राहत का दायरा कितना रखा जाता है।
फिलहाल स्थिति क्या है?
2 अक्टूबर 2026 की उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के 16 जिलों में सूखे और अकाल जैसी स्थिति को देखते हुए विशेष राहत योजना तैयार की जा रही है। करीब 16,400 गांव और 52 शहर पेयजल, चारे और रोजगार की चुनौतियों से प्रभावित बताए गए हैं। सरकार ने तत्काल पेयजल व्यवस्था के लिए वाहन और श्रमिक तैनात किए हैं, जबकि लंबी अवधि के लिए राज्य स्तरीय एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है।
यह स्थिति राजस्थान के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून सीजन खत्म होने के बाद अब अगले बारिश वाले दौर तक प्रभावित क्षेत्रों को उपलब्ध जल संसाधनों के सहारे ही अपनी जरूरतें पूरी करनी होंगी। आने वाले दिनों में सरकार की विशेष राहत योजना और प्रभावित जिलों के लिए उठाए जाने वाले कदम इस संकट की दिशा तय करने में अहम होंगे।
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"इको-फ्रेंडली इनोवेश...
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