राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारी तेज, कांग्रेस ने 41 जिला पर्यवेक्षकों को सौंपी जिम्मेदारी
- bySanjay
- 11 October, 2026
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारी तेज, कांग्रेस ने 41 जिला पर्यवेक्षकों को सौंपी जिम्मेदारी

राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारियों से जुड़ी यह खबर महत्वपूर्ण है। पार्टी ने जिला स्तर पर समन्वय और चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित करने के लिए 41 जिला पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने की जानकारी दी है। इन पर्यवेक्षकों की भूमिका उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और स्थानीय संगठन के साथ तालमेल से जुड़ी बताई गई है।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की इस पहल के तहत पर्यवेक्षकों को स्थानीय नेताओं, ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों, पूर्व प्रत्याशियों और जमीनी कार्यकर्ताओं से चर्चा करने की जिम्मेदारी दी गई है। उम्मीदवारों के चयन के दौरान संगठन में उनके योगदान, स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान और चुनाव लड़ने की क्षमता जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
41 पर्यवेक्षकों में सांसद और विधायक भी शामिल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नियुक्त किए गए पर्यवेक्षकों में 5 सांसद और 7 विधायक शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को अलवर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सांसद मुरारीलाल मीणा को भरतपुर और डीग की जिम्मेदारी मिली है। विधायक रोहित बोहरा को उदयपुर और सलूंबर तथा रफीक खान को डूंगरपुर और बांसवाड़ा का पर्यवेक्षक बनाया गया है।
पर्यवेक्षकों को टिकट वितरण को लेकर संभावित असहमति, असंतुष्ट दावेदारों और स्थानीय गुटबाजी पर भी नजर रखने को कहा गया है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय बना रहे।
निकाय चुनावों के अनुभव से लिया गया सबक
हालिया शहरी निकाय चुनावों में कुछ स्थानों पर क्रॉस-वोटिंग और आंतरिक मतभेदों की खबरें सामने आई थीं। इन्हीं अनुभवों के बाद कांग्रेस ने पंचायती राज चुनावों के लिए जिला स्तर पर पर्यवेक्षकों की भूमिका बढ़ाई है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी सभी वर्गों के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और उम्मीदवार चयन पर मतभेद होने की स्थिति में संवाद बनाए रखने पर जोर दिया
राजस्थान में इस बार पंचायती राज चुनाव 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों से जुड़े हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की घोषित चुनाव प्रक्रिया के अनुसार मतदान अलग-अलग चरणों में होना है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए उम्मीदवार चयन, स्थानीय समीकरण और मतदान के बाद संगठनात्मक तालमेल अहम मुद्दे बने हुए हैं।
कांग्रेस के लिए इन पर्यवेक्षकों की भूमिका केवल उम्मीदवारों के नाम सुझाने तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी की ओर से चुनाव के बाद पंचायत समितियों में प्रधान और जिला परिषदों में प्रमुख के चयन के दौरान भी निर्वाचित सदस्यों के बीच समन्वय बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, नियुक्तियों से चुनावी परिणाम पर क्या असर पड़ेगा, यह मतदान और उसके बाद की राजनीतिक परिस्थितियों से ही स्पष्ट होगा।
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